राज्यपाल की समझाइश पर माने पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा

- पार्टी में उपेक्षा से थे नाराज

By: anil chaudhary

Published: 28 May 2020, 05:04 AM IST

भोपाल. पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा की नाराजगी अब दूर हो गई है। भाजपा की लगातार उपेक्षा के कारण वे नाराज थे। सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल लालजी टंडन की समझाइश के बाद वह माने हैं।
पार्टी जानती थी कि लालजी टंडन की बात मिश्रा नहीं टालेंगे। वह अटल के साथी रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जब अनूप मिश्रा राज्यपाल से मुलाकात करने पहुंचे तो टंडन ने उसी अधिकार से उन्हें समझाइश दी। हालांकि, मिश्रा ने अपनी बात भी कही। राज्यपाल ने अंत में कहा कि घर में ही रहें, तभी सम्मान होता है। मिश्रा ने उनकी बात मानी और राजभवन से बाहर आ गए। मालूम हो मिश्रा हाल ही में पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से भी मुलाकात की थी, लेकिन यहां बात नहीं बनी थी।
- अटल का पांच दशक पुराना साथ
अटल और टंडन करीब पांच दशक साथ रहे। अटल ने जब सक्रिय राजनीति से संन्यास लिया तब उनके स्थान पर टंडन ही लखनऊ से लोकसभा चुनाव लड़े थे। अटल के परिवार में उन्हें वही सम्मान मिलता रहा है, जो अटल को मिलता था, इसलिए वे पूरे अधिकार और हक से उनके सामने अपनी बात कहते रहे हैं।
- पार्टी में लगातार उपेक्षा से खफा
चार बार के विधायक और एक बार के सांसद मिश्रा की नाराजगी की मुख्य वजह पार्टी में लगातार उपेक्षा रही है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में उनकी इच्छा के विपरीत भितरवार से टिकट दिया गया। वे चुनाव हार गए। आरोप यह लगा कि भाजपा के लोगों ने जानबूझकर चुनाव हरवा दिया। उसके बाद लोकसभा चुनाव में भी उनकी टिकट काटकर नरेंद्र सिंह तोमर को मुरैना से उतारा गया। अब वे विधानसभा उपचुनाव में मुरैना जिले की जौरा सीट से टिकट चाहते हैं, लेकिन पार्टी इसके लिए तैयार नहीं है। यह सीट कांग्रेस के बनवारी लाल शर्मा के निधन के कारण रिक्त हुई है
- अटल की भतीजी छोड़ चुकी साथ
अटल की भतीजी करुणा शुक्ला वर्ष 2013 के लोकसभा चुनाव के पहले भाजपा छोड़ कांग्रेस का दामन थाम चुकी हैं। कांग्रेस ने उन्हें 2018 में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ उतारा था। हालांकि, वे हार गई थीं। अब पार्टी को डर है कि कहीं अनूप बगावती तेवर अपनाते हुए ऐसा कोई कदम न उठा लें, जिससे पार्टी को नुकसान हो।
- निष्कासित गुड्डू बोले- अदालत जाऊंगा
पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को भाजपा ने प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने पत्र जारी कर कहा कि कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने के निष्कासित किया जाता है। गुड्डू ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और तुलसी सिलावट के खिलाफ बयानबाजी की थी, जिस पर उनको नोटिस दिया गया था। इधर, गुड्डू ने भी एक पत्र जारी किया। इसमें लिखा है कि दलित नेता के खिलाफ भाजपा का रवैया शर्मनाक है। वे तीन महीने पहले भाजपा छोड़ चुके हैं तो फिर उनको कारण बताओ नोटिस और निष्कासन की कार्रवाई कैसे हो सकती है। इसके खिलाफ वे अदालत जाएंगे। गुड्डू ने कहा कि वे नौ फरवरी को भाजपा छोड़ चुके हैं। उन्होंने अपना इस्तीफा भी सार्वजनिक किया है। गुड्डू और उनके पुत्र अजीत बोरासी विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे। अजीत घट्टिया से कांग्रेस के रामलाल मालवीय के खिलाफ चुनाव लड़े थे, जिसमें वे हार गए थे।

- जल्द होगी कांग्रेस में वापसी
गुड्डू अब दोबारा कांग्रेस में शामिल होने वाले हैं। उन्होंने कांग्रेस में वापसी का आवेदन भी दे दिया है। गुड्डू की हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से मुलाकात हो चुकी है। कमलनाथ ने गुड्डू की वापसी का विरोध कर रहे मालवा अंचल के विधायकों को भी समझाइश देकर राजी कर लिया है। सूत्रों की मानें तो गुड्डू को सांवेर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार और मंत्री तुलसी सिलावट के खिलाफ चुनाव लड़ाया जा सकता है।
- शेजवार से मिले प्रभुराम
उपचुनाव के चलते राजनीति के धुर विरोधी भी नजदीक आने लगे हैं। सांची विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ गौरीशंकर शेजवार से मिलने पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी मिलने पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने शेजवार के साथ क्षेत्र के विकास का रोड मैप तैयार करने पर चर्चा की। अब राजनीति का रुख बदल गया है तो विरोधियों को साधना भी जरूरी हो गया है। आने वाले समय में सांची उपचुनाव होना है जिसमें भाजपा की तरफ से प्रभुराम चौधरी उम्मीदवार बनेंगे। ऐसे में उनको शेजवार के समर्थन की भी बड़ी जरुरत होगी। इस क्षेत्र से भाजपा की तरफ से शेजवार उम्मीदवार बनते रहे हैं। पिछली बार शेजवार के बेटे मुदित ने प्रभुराम के खिलाफ चुनाव लड़ा था लेकिन प्रभुराम ने जीत हासिल की थी। अब डेढ़ साल बाद फिर चुनाव का मौका आ गया है लेकिन सियासत की चाल बदल गई है और उम्मीदवारों के दल भी बदल गए हैं। अब प्रभुराम को मुदित के सहयोग की उम्मीद है।

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