पूर्व मंत्रियों ने चुनाव के लिए ठोकी ताल, उलझे टिकट के समीकरण

पूर्व मंत्रियों ने चुनाव के लिए ठोकी ताल, उलझे टिकट के समीकरण

Harish Divekar | Publish: Sep, 27 2018 07:07:18 PM (IST) | Updated: Sep, 27 2018 07:07:19 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

- कुछ की दावेदारी से मुश्किल, सत्ता-संगठन सीट के गुणा-भाग में जुटा


पंद्रह साल की सत्ता पूरी करके विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी भाजपा सरकार के लिए पूर्व मंत्रियों की टिकट के लिए दावेदारी मुसीबत का सबब बन गई है। इन पूर्व मंत्रियों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव के लिए ताल ठोंक दी है। अभी पार्टी ने इनका न तो टिकट फायनल किया है और न हरी झंडी दी है। उलटे कुछ पूर्व मंत्रियों के टिकट को लेकर न तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रजामंद रहे हैँ और न पार्टी आलाकमान, लेकिन इनके बागी तेवरों को अनदेखा करना आसान नही है। इसलिए सत्ता-संगठन इन सीटों पर समीकरणों को समझ तोड़ ढूंढने में जुटे हैं।
कहां-क्या स्थिति-

अजय विश्नोई- जबलपुर की पाटन सीट पर पिछली बार १२७३६ वोट से हारने के बाद पूर्व मंत्री अजय की दावेदारी ने मुश्किल कर दी है। उनकी दावेदारी पाटन सीट की बजाए पनागर या जबलपुर पश्चिम सीट पर होने से उलझन बढ गई है।

 

पनागर से अभी भाजपा विधायक सुशील तिवारी हैं, जबकि जबलपुर पश्चिम पर हरजीतसिंह बब्बू की दावेदारी है। पिछली बार बब्बू हार गए थे। अभी पाटन सीट कांग्रेस विधायक नीलेश अवस्थी के पास है। अजय आयकर छापे व स्वास्थ्य घोटाले में उलझ चुके हैं।

अनूप मिश्रा- पूर्व मंत्री व भाजपा सांसद अनूप मिश्रा पिछली बार भितरवार विधानसभा सीट पर कांग्रेस विधायक लाखन सिंह यादव से ६५४८ वोटों से चुनाव हार गए थे। तब उन्होंने भितरघात के आरोप लगाए थे। अब मिश्रा की दावेदारी भितरवार के साथ ग्वालियर पूर्व और दक्षिण सीट पर है। इसलिए उनके कारण तीनों सीटों के समीकरण प्रभावित हो रहे हैं। ग्वालियर पूर्व से माया सिंह और दक्षिण सीट से नारायण सिंह कुशवाह विधायक व मंत्री हैं। लेकिन, सवर्ण आंदोलन के चलते मिश्रा की अनदेखी आसान नहीं।

 

लक्ष्मीकांत शर्मा- व्यापमं घोटाले में जेल काट चुके लक्ष्मीकांत का क्षेत्र विदिशा जिले की सिंरोज सीट है। शर्मा जब जेल से बाहर आए थे, तो बड़ा शक्ति-प्रदर्शन किया था। उनके समर्थक टिकट मांग भी हो चुके हैं। अभी सिरोंज विधायक कांग्रेस के गोवर्धन उपाध्याय है।लक्ष्मीकांत महज १५८४ वोट से हारे थे। सवर्ण आंदोलन के बीच उनके असर को अनदेखा करना आसान नहीं। इसीलिए व्यापमं घोटाले सामने आने के बाद पहली बार लक्ष्मीकांत ने बीते शनिवार को सीएम शिवराज से मुलाकात की थी।

हिम्मत कोठारी- रतलाम सिटी सीट पर पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी दावेदारी कर रहे हैं। अभी यहां भाजपा विधायक चैतन्य कश्यप है। हिम्मत यहां से विधायक बने थे, लेकिन पूर्व में निर्दलीय विधायक पारस सकलेचा से हार गए। इसके बाद पिछली बार पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था। उनकी जगह चैतन्य कश्यप लड़े और जीत गए। अब फिर हिम्मत ने दावेदारी की है। इससे चैतन्य की विधायकी के समीकरण गड़बड़ा गए हैं।

 

कमल पटेल- हरदा सीट पर पूर्व मंत्री कमल पटेल अड़े हैं। पिछले कुछ समय से उनकी सरकार से पटरी नहीं बैठ रही। इसलिए उनके टिकट पर असंमजस है। कमल ने बेटे सुदीप को जिलाबदर करने की कार्रवाई होने पर खनन माफिया व सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वे पिछली बार कांग्रेस विधायक रामकिशोर दोगने से ४६५१ वोट से हारे थे।

रामकृष्ण कुसमरिया- पूर्व मंत्री रामकृष्ण का पिछली बार टिकट कट गया था। २००८ के चुनाव में पथरिया सीट से विधायक व मंत्री बने थे, फिर २०१३ के चुनाव में उनके स्थान पर लखन पटेल को टिकट मिला और वे जीते। कुसमरिया को बुंदेलखंड विकास प्राधिकारण अध्यक्ष बनाकर साधने की कोशिश की, लेकिन वे अब फिर मैदान में आ गए हैं।
कन्हैयालाल अग्रवाल- गुना व बमोरी विधायक रहे पूर्व मंत्री अग्रवाल पिछली बार कांग्रेस विधायक महेंद्र सिंह सिसौदिया से चुनाव हार गए थे। इस बार फिर बमोरी सीट से अग्रवाल दावेदारी कर रहे हैं।

दशरथ सिंह लोधी- दमोह की जबैरा सीट पर पिछली बार लोधी कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप सिंह से ११८९६ वोटों से हार गए थे। लोधी फिर दावेदारी कर रहे हैं। इस दौरान आधा दर्जन दावेदार इस सीट पर सामने आ चुके हैं।

 

करण सिंह वर्मा- इछावर सीट पर महज ७४४ वोट से चुनाव हार गए पूर्व मंत्री करण सिंह वर्मा इस बार पूरी मजबूती से दावेदारी कर रहे हैं। यहां नई दावेदारों ने चेहरा बदलने की मांग की है।

बृजेंद्र प्रताप सिंह- पूर्व मंत्री बृजेंद्र को पिछले चुनाव में पवई सीट पर कांग्रेस विधायक मुकेश नायक से हार मिली थी। बृजेंद्र ११६९५ वोट से हारे थे। अब फिर दावेदार हैं, लेकिन दावेदार बढ़ गए हैं।

हरिशंकर खटीक- पूर्व मंत्री खटीक पिछली बार जतारा सीट पर महज २३३ वोट से हार गए थे। खटीक हार के बाद से ही चुनाव की तैयारी के लिए जुटे हुए हैं। लेकिन, यहां भी नया चेहरा लाने की मांग बुलंद है।

 

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