चार लोक परंपराओं की लोक गायिकी से किया वर्षा ऋतु का वर्णन

चार लोक परंपराओं की लोक गायिकी से किया वर्षा ऋतु का वर्णन

hitesh sharma | Publish: Sep, 11 2018 07:50:52 PM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

'बादल राग-16' में वर्षा गीतों का गायन

 

भोपाल। भारत भवन में चल रहे 'बादल राग-16' के चौथे दिन सोमवार को वर्षागीतों पर आधारित लोक गीतों की प्रस्तुति हुई। पहली प्रस्तुति खंडवा से आई संगीता पाराशर ने निमाड़ी वर्षा गीतों की दी। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत गणेश वंदना म्हारा अंगणा म आज पधारो गणपतिजी... से हुई। इसके बाद पाणीं की पयली फुहारजी, भींज म्हारी रेशम की साड़ी... से कलारसिकों को वर्षा की फुहार का एहसास कराया।

सुरीले लोक गीतों से सजी शाम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने चौमासा गीत मारुजी पांच अरज म्हारी आज सूणों नणदो रा वीराजी... पेश किया तो फसल बोने के उल्लास में बोवनी गीत आयो आयो छे वावणी को दिन रे खेत मड वतर घणों... पेश किया। इसके बाद रक्षा बंधन पर गाया जाने वाला लाया घुंघरियारी गाड़ी वीराजी म्हारा लाया घुंघरियारी गाड़ी... सुनाया।

राधा-कृष्ण की भक्ति पर आधारित झूला गीत तुम आओ नंदकिशोर झूला कुंजन म... से प्रस्तुति को विराम दिया। उनके सुषमा साध, सौम्या मांगरोले, कृति साध ने गायिका में संगत दी। वहीं, हारमोनियम पर शिवम पटेल, तबला पर विपुल शर्मा, बांसुरी पर नितेश और ढोलक पर जितेन्द्र बंसल ने संगत दी।

कार्यक्रम की अगली कड़ी में रीवा से आई शिवानी पांडे ने बघेली वर्षागीत पेश किए। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत हिंदुली गीत चारिनि खूटे के बनी रे... कजरी गीत हरे-हरे दशरथ राज दुलारे... झूला गीत धानि-धानि रे कदम तोरी डाली.... सुनाया।

इसके दादरा में लाल आंखिन मा छिउला के पानी, शिव भक्ति का भोला गीत भोलन तोरे लंबे देसवा और अंत में बिरज के बिहारी आबा... गाकर कृष्ण भक्ति का वर्णन किया। उनके साथ शशिकुमार पांडे, शिवांगी पांडे और मनीषा सिंह ने संगत दी। तलबा पर यतिन्द्र शुक्ला, ढोलक पर सचिन विश्वकर्मा और मंजीरे पर मार्तण्ड तिवारी ने संगत दी।

 

 

साउनी सुहानी रे...
भोपाल के फूल सिंह माण्डरे ने बुंदेली वर्षा गीतों में लोक पंरपराओं का वर्णन किया। प्रस्तुति की शुरुआत उन्होंने वाह तकत गई रैन सजना न... से की। इसके बाद जन्मे आधी रात मोहन..., आज तो सजना मोरे घर रहो..., झूला झूलन जाऊंगी माई मोरी... उत्तर सुमरो बद्रीनाथ को... सुनाया।

प्रस्तुति को विस्तार देते हुए मोरे राम घरे कब आओग हो... पेश किया तो साउन सुहानी रे... प्रस्तुति को विराम दिया। उनके साथ कोरस पर नीता झा, कोरस पर सीमा सक्सेना, ढोलक पर शब्बीर खान तबला पर संजीव नागर और मंजीरा पर राम लखन श्रीवास ने संगत दी।

ससुराली में आकर सीखी मालवी
अगली प्रस्तुति उज्जैन से आई तृप्ति नागर ने मालवी वर्षा गीत पेश किए। प्रस्तुति की शुरुआत राखी गीत राखी दीवासों आवियो वीरो... से की। इसके बाद चौमासा गीत, मेवाजी आपे बरसो ने... सुनाया। उन्होंने झूला गीत, सावन गीत, बदरा गीत, हिंडोला गीत और विरह गीत पेश किया। तृप्ति मूलत: आगरा की रहने वाली हैं। उन्होंने उज्जैन में शादी के बाद मालवी सीखी। मालवी गीतों पर पीएचडी के बाद शास्त्रीय गायन के साथ मालवी गीत भी गानें लगीं।

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