#kyonkhulenschool: तीसरी लहर का भय और स्कूल खोलने की तैयारी

#kyonkhulenschool: कई राज्यों में कोरोना के खतरे को देखते हुए फिर से स्कूल बंद करने की शुरूआत हो चुकी है, वहीं मध्यप्रदेश में 20 सितंबर से स्कूल खोले जा रहे हैं, जबकि परिजनों की रूचि भी बच्चों को स्कूल भेजने में नजर नहीं है.

By: Subodh Tripathi

Published: 18 Sep 2021, 08:31 PM IST

भोपाल. कोरोनाकाल में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के स्कूल खोले जा रहे हैं, कक्षा 12 तक के बच्चों के स्कूल पहले ही खुल चुके हैं, चूंकि अभी भी कोरोना के केस आ रहे हैं, कोविड प्रोटोकाल के तहत कई पाबंदिया भी है, कई प्रदेश में स्कूल फिर से बंद किए जा रहे हैं, ऐसे में मध्यप्रदेश में स्कूल खोलना कितना उचित है, इस पर पत्रिका द्वारा बच्चों, अभिभावक, शिक्षकों, प्राचार्यों,स्कूल संचालक, शिक्षाविदों व बुद्धिजीवियों आदि की राय व उनके विचार आप तक पहुंचाए जाएंगे। #kyonkhulenschool:

20 सितंबर से खुलेंगे स्कूल

मध्यप्रदेश में 20 सितंबर से स्कूल खोलने की तैयारी हो रही है. वहीं कुछ राज्यों में स्कूल बंद होने लगे हैं. क्योंकि इन राज्यों में कोरोना के केस आने लगे हैं। ऊपर से कोरोना की तीसरी लहर का भय भी लोगों के मन में समाया है। इस कारण परिजन भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने में खुश नहीं नजर आ रहे हैं. क्योंकि हालही कुछ बडी कक्षाओं के साथ विद्यालयों को खोलने की शुरूआत की गई थी, लेकिन चंद बच्चे भी विद्यालय नहीं पहुंचे।

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पहले होंगे हाथ सैनेटाईज फिर बिठाएंगे दूर दूर

अब छोटे बच्चों के स्कूल नए रुप में नजर आएंगे, बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दूर दूर बिठाया जाएगा, हाथ सैनिटाईज किए जाएंगे, स्कूल में बच्चों के लिए मास्क की व्यवस्था भी रहेगी, हाथ धोने के लिए साबुन भी रहेगा.

50 फीसदी बच्चों के साथ लगेगी कक्षाएं

मध्यप्रदेश में सोमवार से कक्षा 1 से 5 तक की कक्षाएं शुरू की जा रही है. जिसके तहत 50 प्रतिशत बच्चों को ही विद्यालय बुलाया जाएगा. बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए बिठाया जाएगा. बच्चे विद्यालय में भी मास्क लगाकर बैठेंगे, उनके हाथ भी सैनेटाईज किए जाएंगे, इसी के साथ सभी कोविड नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा, ताकि बच्चे हर स्थिति में सुरक्षित रहें.

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कोराना की तीसरी लहर का भय

भले ही सरकार ने विद्यालय खोलने का मन बना लिया है. लेकिन पालकों में अभी भी कोरोना की तीसरी लहर का भय समाया हुआ है, आधे परिजन भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं है, यह स्थिति हालही में देख चुके हैं, जब कई बड़ी कक्षाएं खोली गई, लेकिन चंद बच्चे भी स्कूल नहीं पहुंचे थे-

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लद्दाख में फिर से स्कूल बंद

कई राज्यों में स्कूल खुलने के बाद जब कोरोना का खतरा नजर आने लगा, तो फिर से स्कूल बंद करने की तैयारी शुरू हो चुकी है, ऐसा ही लद्दाख में भी हो रहा है, यहां स्कूल तो खोल दिए थे, लेकिन कोरोना के खतरे को देखते हुए यूनियन टेरिटरी ऑफ लद्दाख ने 18 सितंबर से 15 दिनों के लिए सभी स्कूल और होस्टल तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, इसके बाद जो स्थिति रहेगी, उसके अनुसार स्कूल खोलने पर विचार किया जाएगा. हालांकि कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ऑनलाइन क्लासेस जारी रहेगी।

चूंकि बच्चों के जीवन का सवाल होता है। इसलिए हम रिस्क नहीं ले सकते हैं। बच्चा थोड़ा पिछड़ भी जाएगा, तो कोई बात नहीं। बाद में कवर कर लेगा। लेकिन जब तक कोरोना का खतरा समाप्त नहीं होता है। तब तक बच्चे को विद्यालय भेजना ठीक नहीं है।
-आशीष शर्मा, पालक, इंदौर

बच्चों की ऑनलाइन क्लास चल रही है। जो ऑनलाइन पढ़ाया जाता है। उसका हम घर पर रिवीजन भी करा देते हैं। वैसे भी छोटी कक्षाओं के बच्चों को स्कूल नहीं भेजे तो भी चल जाता है। क्योंकि उतना तो घर में पढ़ा सकते हैं। लेकिन स्कूल भेजना अभी ठीक नहीं लग रहा है। अधिकतर परिजन छोटे बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है।

-राजेश पाटीदार, पालक, इंदौर

पिछले 18 माह से कक्षा 1 से लेकर 5 तक की कक्षाएं नहीं लगने के कारण बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है, इस कारण बच्चों के परिजन भी बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं, लेकिन पूर्ण सुरक्षा के साथ, इसलिए विद्यालय स्तर पर भी सभी नियमों का कढाई से पालन करते हुए स्कूल खोले जाएंगे।
-मुकेश जैन, प्राचार्य, शासकीय उमावि जावद

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