भूलकर भी गणेशजी की पीठ नहीं देखना चाहिए, बनते-बनते बिगड़ने लगेंगे सारे काम

गणेश के दर्शन करने से ही कई बिगड़े काम बनने लग जाते हैं। वे भक्तों के दुखों को दूर कर शत्रुओं से भी रक्षा करते हैं। भगवान के रोज दर्शन ...

By: Manish Gite

Published: 22 Aug 2017, 03:19 PM IST

भोपाल। गणेश के दर्शन करने से ही कई बिगड़े काम बनने लग जाते हैं। वे भक्तों के दुखों को दूर कर शत्रुओं से भी रक्षा करते हैं। भगवान के रोज दर्शन करने से हमारा मन शांत और प्रसन्नचित्त रहता है, लेकिन खास बात यह है कि गणेशजी के दर्शन पीठ की तरफ से बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

भोपाल के पंडित वल्लभाचार्य शुक्ल बता रहे हैं कि क्यों गणेशजी के दर्शन उनकी पीठ की तरफ से नहीं करना चाहिए। भगवान के दर्शन हमेशा उनके सामने से ही करने चाहिए...।

गणेशजी की पीठ में रहती है दरिद्रता
भगवान गणेश की पीठ के दर्शन नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश के शरीर पर जीवन और ब्रह्मांड से जुड़े अंग हैं। उनकी सूंड पर धर्म विराजमान है, कानों पर ऋचाएं, दाएं हाथ में वर, बाएं हाथ में अन्न का वास है, वहीं पेट में समृद्धि, नाभि में ब्रह्मांड, आंखों में लक्ष्य, पैरों में सातों लोक और मस्तिष्क पर ब्रह्मलोक माने गए हैं। गणेशजी के सामने पहुंचकर दर्शन करने से सभी सुख, शांति और समृद्धि मिलती है। वहीं भगवान की पीठ में दरिद्रता का निवास रहता है।

माना जाता है कि भगवान की पीठ के दर्शन करने वाला चाहे कितना भी धनवान हो, उसके घर पर दरिद्रता का प्रभाव पड़ने लगता है। जाने-अनजाने में यदि भगवान की पीठ देख ले तो भगवान गणेश से क्षमा-याचना कर उनका पूजन करना चाहिए। इससे आप पर होने वाला बुरा प्रभाव खत्म हो जाएगा।

गणेशजी का विशेष दिन है बुधवार
मान्यताओं के मुताबिक भगवान गणेश का विशेष दिन बुधवार है। उन्हें यह दिन बेहद प्रिय है। इस दिन बुध ग्रह के लिए भी पूजा की जाती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह अशुभ स्थिति में हो तो बुधवार के दिन गणेशजी की आराधना करें।

ऐसे करें पूजा
गणेश को सिंदूर, चंदन, जनेऊ, दूर्वा, लड्डू का भोग अथवा गुड़ या मोदक का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

यह है वो विशेष मंत्र
प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।

बुधवार का स्वामी बुध होता है, जो बुद्धि का कारक माना जाता है। इस तरह बुद्धि प्रधानता वाला दिन होने के कारम इस दिन गणेशजी को मोदक का भोग लगाकर पूजा करना चाहिए। इससे व्यक्ति प्रखर बुद्धि का धनी होता है। ऊर्जा से भी भरपूर होता है।

ज्योतिषीय मापदंड के अनुरूप दूर्वा छाया गृह केतु को संबोधित करती है। गणपति जी धुम्रवर्ण गृह केतु के अधिष्ट देवता है तथा केतु गृह से पीड़ित जातकों को गणेशजी को 11 अथवा 21 दूर्वा का मुकुट बनाकर गणेश कि मूर्ति/प्रतिमा पर जातक बुधवार कि सायं 4 से 6 बजे के बीच सूर्यास्त पूर्व गणेशजी को अर्पित करना हितकारी रहता है।

बुधवार के लिए यह है विशेष गणेश मंत्र
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय।
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।

घर के मुख्य दरवाजे पर भगवान गणेश की प्रतिमा लगी हो तो उस घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। नकारात्मक शक्ति भीतर प्रवेश नहीं कर पाती है।

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