पुलिस अफसरों को जेंडर सेंसेटिविटी का टेस्ट पास करना हो सकता है अनिवार्य

महिला सशक्तिकरण विभाग ने प्रादेशिक स्टीयरिंग कमेटी को दिया सुझाव,गोवा और कर्नाटक में पुलिस अफसरों को देना पड़ता है अनिवार्य टेस्ट।

By: दीपेश तिवारी

Published: 10 Nov 2017, 11:11 AM IST

भोपाल। राजधानी में हुई गैंग रेप की घटना में पुलिस के असंवेदनशील रवैये के बाद अब सरकार जल्द ही अपना सख्त रवैया दिखा सकती है। सरकार पुलिस अफसरों को प्रोवीजन के दौरान जेंडर सेंसेटिविटी का टेस्ट पास करना अनिवार्य किया जा सकता है। प्रदेश सरकार ने महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर अंकुश लगाने के लिए एक स्टीयरिंग कमेटी बनाई है। यह कमेटी अपने अपनी रिपोर्ट में सरकार को कुछ ऐसा ही सुझाव देने जा रही है।

सरकार पुलिस अफसरों की फील्ड पोस्टिंग से पहले लैंगिक संवेदनशीलता का एक टेस्ट अनिवार्य कर सकती है। इस मामले में मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण विंग ने अपना सुझाव प्रदेश स्तर पर गठित स्टीयरिंग कमेटी को दिया है। ये कमेटी लैंगिक हिंसा से जुडे़ मसलों पर नियंत्रण और प्रभावी कार्रवाई के लिए जल्दी ही अनुशंसा रिपोर्ट शासन को देगी।

महिला बाल विकास विभाग की ही एक अन्य अहम विंग महिला सशक्तिकरण ने अपनी रिपोर्ट में सुझाया है कि पुलिस को संवेदनशील बनाए बिना यौन हिंसा रोकना संभव नहीं है। जरूरी है कि पुलिस अफसरों को लैंगिक संवेदनशीलता का सैद्धांतिक परिचय भी कराया जाए। इसी क्रम में महिला सशक्तिकरण के एक्सपट्र्स ने सुझाया है कि पुलिस अफसरों को उनके प्रोविजनल अवधि में जेंडर सेंसविटी (लैंगिक संवेदनशीलता) का पेपर पास करना अनिवार्य किया जाए।

राज्य पुलिस सेवा के अफसर अपने प्रोवीजन कार्यकाल में उस पेपर को पास नहीं करते तो उनकी प्रोबेशन की अवधि को लगातार बढ़ाया जाए। महिला सशक्तिकरण विभाग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता वाली प्रदेश स्टीयरिंग कमेटी को इस मामले में कर्नाटक और गोवा के मॉडल भी सुझाए हैं। बता दें कि इन दोनों राज्यों में जेंडर सेंसविटी के टेस्ट को पास करने के बाद ही अफसर को मैदानी नियुक्ति मिलती है। हालांकि, इस मॉडल में प्रदेश की जरूरत के मुताबिक बदलाव करने का सुझाव भी दिया है। गौरतलब है कि अधिकतर यौन हिंसा में पुलिस का रवैया महिला के प्रति असहयोगात्मक रहा है।

पुलिस के अलावा दूसरी एजेंसी भी करे जांच - अब तक गैंग रेप, यौन उत्पीडऩ, बाल यौन हिंसा और घरेलू हिंसा जैसे महिला उत्पीडऩ से जुड़े मामलों की जांच पुलिस ही करती रही है, लेकिन कमेटी का सुझाव है कि इसके लिए एक अलग से मैकेनिज्म बनना चाहिए। जिसमें महिला बाल विकास और सिविल सोसायटी के सदस्य शामिल रहें।

पुलिस अफसरों में जेंडर संवेदनशीलता की विशेष जरूरत है। आम तौर पर अभी तक इसका अभाव ही दिखा है, इसलिए विभाग ने प्रदेश की स्टीयरिंग कमेटी को सुझाव दिया है कि गोवा व कर्नाटक की तर्ज पर या उसमें जरूरत के हिसाब से संशोधन करके पुलिस अफसरों का जेंडर संवेदनशीलता का टेस्ट पास करना अनिवार्य किया जाए।
- सुरेश तोमर, संयुक्त संचालक महिला सशक्तिकरण, मध्यप्रदेश

दीपेश तिवारी
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