निराश्रित गायों का उपयोग सेरोगेटेड मदर की तरह करें — राज्यपाल

गौ नस्ल सुधार का अभियान चले
देशी नस्ल के उन्नत बछिए करें तैयार
समग्र योजना बनाकर करें गौ संरक्षण—संवर्धन का कार्य
राज्यपाल ने की पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के काम—काज की समीक्षा

गौ-वंश को बचाना वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती है। इस सिनेरियो को बदलने के लिए गौ पालन के समग्र प्रोजेक्ट पर कार्य करें। आधुनिक तकनीक का उपयोग निराश्रित गायों का उपयोग सेरोगेटेड मदर की तरह करने पर विचार किया जाए। यह बात राज्यपाल लालजी टंडन ने मंगलवार को राजभवन में नाना जी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के काम—काज की समीक्षा करते हुए कही।
राज्यपाल ने कहा कि यूनिवर्सिटी लक्ष्य बनाकर देशी नस्ल की उन्नत बछिए तैयार करे। इन्हें बेचकर यूनिवर्सिटी अतिरिक्त आय कमा सकती है। इसके साथ गायों के लिए चारा पैदा करने का काम भी नई तकनीक के साथ किया जाए। बाजार में ऐसे बैग मिल रहे हैं जिनमें एक से डेढ़ माह तक हरा चारा सुरक्षित रहता है। उत्पादित चारा जहाँ एक ओर विश्वविद्यालय के पशुओं की आहार आवश्यकताओं को पूरा करेगा

राज्यपाल ने कहा कि यूनिवर्सिटी के इस नवाचार से ग्रामीण भी पशुपालन के लिए प्रोत्साहित होंगे। यूनवर्सिटी को गौ नस्ल सुधार का अभियान भी चलाना चाहिए। केवल अनुदान पर आश्रित रहने की मानसिकता से बाहर आना होगा। अपने खुद के स्त्रोत विकसित कर आत्म-निर्भर बनने पर फोकस करें। नस्ल सुधार, चारा और दूध उत्पादन में नई तकनीक के उपयोग का एकीकृत रूप से क्रियान्वयन करे। बैठक में राज्यपाल की पहल पर विश्वविद्यालय को पशुपालन विभाग द्वारा सौ-सौ गायों की 10 गौशालाएँ संचालित करने के लिए अनुदान उपलब्ध कराने का निर्णय हुआ।

टंडन ने कहा कि संसाधनों के विकास के कार्यों को प्राथमिकता दी जाए ताकि नई परियोजना सेल्फ सस्टेनेबल रहें। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा बॉयो गैस प्लान्ट लगाने की योजना संचालित की गई है, जिसमें प्लांट लगाने के साथ कम्पनी उत्पादित गैस भी खरीद लेती है।

प्लांट का अवशेष से भी अच्छी खाद बनती है, जिसे तालाब में प्रवाहित कर मत्स्य उत्पादन में कई गुना वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने अपेक्षा की कि विश्वविद्यालय इस तरह नई तकनीक के सफल प्रयोगों को दिखाकर किसानों तक पहुँचाने के प्रयास करें। उन्होंने कहा कि गायों की प्रजनन क्षमता में भी सुधार के प्रयास जरूरी हैं। नई विधियों से एक वर्ष में कई उन्नत नस्ल तैयार करने के उदाहरण मिल रहे हैं। इसका विस्तार कर देशी नस्ल को बेहतर बनाने के कार्य किये जायें। उन्होंने कहा कि बाजारवाद के चलते विदेशी कम्पनियाँ कभी देशी नस्लों को बढ़ावा नहीं देगी। केन्द्र सरकार देशी नस्ल सुधार कार्यक्रम पर विशेष बल दे रही है। उसके सहयोग से एक-डेढ़ वर्ष में चमत्कारी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

राज्यपाल टंडन ने कहा कि महान नानाजी देशमुख के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय चुनौतियों के नवाचारी सोच के साथ समाधान की कार्य-शैली का उदाहरण प्रस्तुत करे। उन्होंने बताया नानाजी के समय सरकार बोरिंग नि:शुल्क करवाती थी। पम्प पर भी काफी अनुदान था। कॉस्ट आयरन पाइप लगाना पड़ता था, जो बहुत महंगा होता था। गरीब किसान उसका लाभ नहीं ले पाते थे। नाना जी ने निकट के जंगल के बाँसों को अंदर से खोखला कर उनको पाइप बनाकर उपयोग किया और गाँव की खेती की दशा बदल दी।

harish divekar
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