MP: सरकार के 20 एप, 5 करोड़ रुपए भी खर्च, काम एक भी नहीं कर रहा

सरकारी मोबाइल एप लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। 

देवेन्द्र शर्मा @ भोपाल सरकारी मोबाइल एप लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। कुछ एप को छोड़ दें तो अधिकतर प्ले-स्टोर की शोभा बढ़ा रहे हैं।विभाग भी इनकी सुध नहीं ले रहे हैं। यहां आने वाली शिकायतों और सुझावों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। 'पत्रिका' ने जब इन एप की पड़ताल की तो हकीकत सामने आई।  मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 20 एप बनाए हैं। प्रति एप औसत 25 लाख रुपए खर्च के अनुसार इनपर पांच करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। भोपाल नगर निगम का एप की लागत ही लगभग चार करोड़ रुपए हैं।

ननि: चार करोड़ का एप, काम का नहीं
भोपाल नगर निगम ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत अक्टूबर में भोपाल प्लस एप लॉन्च किया। इसे प्राइस वाटर कूपर (पीडब्ल्यूसी) कंपनी ने करीब चार करोड़ रुपए में बनाया है। संभवत: यह प्रदेश का सबसे महंगा एप है, बावजूद इसके तीन माह में महज 5000 लोगों ने ही डाउनलोड किया। इसमें तमाम खामियां हैं।

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30 लाख उपभोक्ता, डाउनलोड 13 हजार
बिजली कंपनी के एप के भी यही हाल है। मध्यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में इस समय भोपाल-ग्वालियर क्षेत्र मिलाकर 30 लाख से अधिक उपभोक्ता है। इसे 5 जनवरी तक 13071 लोगों ने ही डाउनलोड किया था। शिकायतें की संख्या महज 5267 ही है।

इसलिए बेकाम साबित हो रहे
आईटी एक्सपर्ट पूनम साहू का कहना है कि एक ठीक-ठाक एप बनने में 20 लाख से 80 लाख रुपए तक खर्च होते हैं। सरकारी विभाग इतनी राशि खर्च कर एप तो बनवा लेते हैं, लेकिन शिकायतों को आमजन के लिए नहीं खोला जाता।  ये काम नहीं करते तो लोग इस्तेमाल बंद कर देते हैं।
 
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सरकारी एप डाउनलोड होने की स्थिति
एप नाम    विभाग    डाउनलोड
ई-विधान    विधानसभा    342
लैंड रिकॉर्ड एमपी    भू-अभिलेख    710
एमपी एनएचएम    स्वास्थ्य मिशन    570
एमपी इलेक्शन    चुनाव आयोग    615
डिस्कवर एमपी    टूरिज्म    17368
एमपी एसएसडीजी    सांख्यिकी विभाग    335
एमपी जीआईडी    भूगर्भ विभाग    254
एमपी एपीक    चुनाव आयोग    526
हाईकोर्ट ऑफ मप्र    हाईकोर्ट    380
एमपीएमकेवीवीसीएल    बिजली कंपनी    13071

इनका रिकॉर्ड कुछ बेहतर है

स्वच्छ मप्र

इसे 10 हजार लोगों ने डाउनलोड किया, लेकिन ये काम नहीं कर रहा।

एमपी ऑनलाइन

एक लाख ने डाउनलोड किया। सरकारी काम आधा ही करता है। इससे बिजली बिल भुगतान नहीं हो रहा।

किसान योजना
इस एप को एक लाख लोगों ने डाउनलोड किया। लेकिन इसमें डाटा नहीं होने से बेकाम है।

एम शिक्षामित्र
एक लाख डाउनलोड हो चुके हैं। शिकायत हैं कि इसमें लॉगिन करने में दिक्कत है।


इनका कहना है...
सरकार जनता के हित के लिए एप बनाती है। जरूरत के अनुसार सुधार कराते हैं। जिन विभागों के एप नहीं है वहां भी जल्द ही एप लॉन्च कर लोगों को मोबाइल से शिकायत की सुविधा दी जाएगी।
- मोहम्मद सुलेमान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
Brajendra Sarvariya
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