GST फ्री होंगे ये प्रोजेक्ट, जानिये क्या होगा आपको फायदा

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने जारी किए आदेश...

By: दीपेश तिवारी

Published: 10 Feb 2018, 01:44 PM IST

भोपाल। जीएसटी को लेकर लंबे समय से चल रहे विरोध व मप्र में चुनावों से कुछ समय पहले ही सरकार ने लोगों को इससे राहत देने के लिए कुछ प्रोजेक्ट्स को इससे बाहर कर दिया है। इसके बाद प्रदेश में एमपी हाउसिंग बोर्ड, भोपाल विकास प्राधिकरण सहित सभी प्राधिकरण, नगर निगम और प्राइवेट प्रोजेक्ट के सस्ते मकान इसके दायरे में आएंगे।
एक ओर जहां इस निर्णय को सरकार द्वारा जीएसटी का भार लोगों पर कम करने की कोशिश बताया जा रहा है। वहीं विपक्षी इसे पूरी तरह से चुनाव से जोड़ रहे हैं।

सस्ते मकानों और फ्लैट्स पर सरकार अब जीएसटी वसूल नहीं करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आदेश जारी कर अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पुराने आदेश को वापस लिया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के एेलान के बाद प्रदेश में एमपी हाउसिंग बोर्ड, भोपाल विकास प्राधिकरण सहित सभी प्राधिकरण, नगर निगम और प्राइवेट प्रोजेक्ट के सस्ते मकान इसके दायरे में आएंगे।

बिजली-पानी कनेक्शन पर भी जीएसटी
अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले परिवारों को नल एवं बिजली कनेक्शनों पर भी जीएसटी अदा करना पड़ रहा था। घरोंदा बर्रई में ईडब्ल्यूएस आवास बुक कराने वाले सतीश भारती को बीडीए से मिले भुगतान आदेश मे जल कनेक्शन के 3500 रुपए अदा करने कहा गया जिस पर 60 रुपए अतिरिक्त जीएसटी भी चार्ज किया गया है।

इधर,अहाते भी होंगे बंद, बार लाइसेंस की कोशिश शुरू...
प्रदेश में बंद किए जा रहे 149 अहातों में सबसे ज्यादा भोपाल में बंद किए जा रहे हैं। वर्तमान में भोपाल में 51 शराब अहाते हैं, इसमें से 30 अहाते 31 मार्च को बंद हो जाएंगे। 21 शराब दुकानों पर शराब पीने की सुविधा दी जाएगी। इसके चलते शराब ठेकेदारों ने अहाते के घाटे से बचने के लिए बार लाइसेंस लेने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि बार अहाते के स्थान पर नहीं खोले जा सकेंगे, मगर इससे उनके घाटे की भरपाई के साथ-साथ सरकार के राजस्व की भरपाई भी हो जाएगी। नए बार के लाइसेंस चूना भट्टी, दस नंबर, पंचशील नगर, पीएनटी, त्रिलंगा, कोलार के सर्वधर्म, ललिता नगर में खोले जाएंगे।

वहीं बजट सत्र का नहीं होगा दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण-
विधानसभा के बजट सत्र का सीधा प्रसारण नहीं हो पाएगा। दूरदर्शन तैयार है, लेकिन मामला कार्यवाही के विलोपन के हिस्से को लेकर फंस गया है। इस मुद्दे को सुलझाने में वक्त लगेगा।

जबकि छत्तीसगढ़ में पिछले सत्र से ही सीधा प्रसारण होने लगा है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश विधानसभा के सत्र के दौरान प्रश्नकाल के एक घंटे का सीधा प्रसारण किए जाने का निर्णय लिया था। विधानसभा सचिवालय ने दूरदर्शन से संपर्क किया था, जिसकी ओर से प्रसारण संबंधी फीस सहित अन्य सहमति दे दी गई थी, लेकिन पेंच कार्यवाही के विलोपन के हिस्से को लेकर फंसा हुआ है। विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह का कहना है कि तकनीकी कारणों से बजट सत्र की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं किया जा रहा है।

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दीपेश तिवारी
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