मंजूरी मिली, लेकिन ट्रांसप्लांट में अभी करना होगा इंतजार

मंजूरी मिली, लेकिन ट्रांसप्लांट में अभी करना होगा इंतजार
Hamidia hospital

| Publish: Sep, 22 2018 05:03:03 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

हमीदिया अस्पताल में संसाधनों की कमी के चलते किडनी ट्रांसप्लांट में होंगी दिक्कतें

भोपाल. सरकार ने हमीदिया अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट को मंजूरी दे दी है। हालांकि अस्पताल के मौजूदा हालात को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि निकट भविष्य में मरीजों को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलने वाला है। कॉलेज में न तो ट्रांसप्लांट करने मॉड्यूलर ओटी है, न ही अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर। यही नहीं ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी स्टाफ और चिकित्सकों की टीम भी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना था कि अभी से तैयारियां शुरू की जाएं तो भी अस्तपाल में ट्रांसप्लांट शुरू करने में कम से कम दो साल और लगेंगे।

यह हैं दिक्कतें
1- विशेषज्ञों की कमी
क्या होना चाहिए : ट्रांसप्लांट के लिए किडनी रोग विशेषज्ञ के साथ सामान्य सर्जरी, एनिस्थिसिया सहित अन्य चिकित्सकों की टीम होनी चाहिए। जो इस काम के लिए विशेष दक्षता प्राप्त हो।
वास्तविक स्थिति : गांधी मेडिकल कॉलेज में किडनी रोग विशेषज्ञ नहीं है। मेडिसिन विभाग के एक डॉक्टर हैं जिन्होंने नेफ्रोलॉजी का विशेष डिप्लोमा किया है। इनके अलावा ट्रांसप्लांट के लिए अन्य कोई तैयार नहीं है।

2- विशेष ओटी और आईसीयू
क्या होना चाहिए : विशेष मॉड्यूलर ओटी के साथ अलग आइसीयू की जरूरत होगी। ट्रांसप्लांट के बाद संक्रमण से बचाने मरीजों को यहां अतिरिक्त सुविधाएं मुहैया कराई जाती है।
वास्तविक स्थिति : मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इसके लिए कॉर्डियक थोरेसिक यूनिट का उपयोग करेगा, लेकिन अभी इस यूनिट के निर्माण शुरू ही हुआ है। इसमें ओटी और आइसीयू तैयार किए जाएंगे।

3- दक्ष टैक्निकल स्टाफ
क्या होना चाहिए : चिकित्सकों के साथ ट्रांसप्लांट के लिए सपोर्टिंग स्टाफ की जरूरत होती है। इन सभी को ट्रांसप्लांट से जुड़ी विशेष ट्रैनिंग दी जाती है। इसमें वार्ड ब्याय से लेकर नर्सिंग स्टाफ शामिल होते हैं।
वास्तविक स्थिति : ऐसा कोई स्टाफ तैयार नहीं है। कॉलेज प्रबंधन की मंशा है जब ट्रांसप्लांट शुरू होगा तब मौजूदा स्टाफ में से ही अलग स्टाफ तैयार कर उन्हें ट्रैनिंग दी जाएगी।

4- अलग विभाग
क्या होना चाहिए : ट्रांसप्लांट के लिए सबसे जरूरी है अलग विभाग होना। इसमें नेफ्रॉलॉजी, जनरल सर्जरी, यूरोलॉजी विशेषज्ञों के साथ एक अलग विभाग तैयार होता है जो सिर्फ ट्रांसप्लांट से जुड़े काम देखेगा।
वास्तविक स्थिति : अलग विभाग के लिए प्रस्ताव दिया हुआ है। विभाग तैयार करने में कम से कम तीन साल लगेंगे। इस काम में 23 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

5- जांच की सुविधा
क्या होना चाहिए : ट्रांसप्लांट के पहले मरीजों की किडनी के लिए क्रॉस मैचिंग टेस्ट के साथ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं। इसके लिए व्यवस्थित लैब की जरूरत होती है।
वास्तविक स्थिति : कॉलेज में इसकी सुविधा नहीं है। ऐसे में कॉलेज इन जाचों को निजी लैब से कराएगा। हालांकि इसके लिए भी विभाग निजी लैब से निविदाएं मंगावानी पडेंग़ी, तमाम सरकारी प्रक्रियाओं के बाद ही लैब तय हो पाएगी।

जीएमसी डीन डॉ. एमसी सोनगरा कि माने तो हमीदिया अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए पर्याप्त सुविधाएं हैं। फिलहाल अस्थायी ट्रांसप्लांट सेंटर बनाया जाएगा। बाद में कॉलेज में नेफ्र ोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग अलग से तैयार किए जाएंगे।

 

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