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रूठा मानसून: अब भिगोयगा आपको, जानें दस सालों में जून की बारिश का आंकड़ा

- 251 जिलों में कम बरसात
- 151 जिलों में बेहद कम बारिश
- मध्यप्रदेश में 25 प्रतिशत कम बरसे मेघ

राजधानी भोपाल में जून में 127 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए, लेकिन 1 से 29 जून तक 69.4 मिमी बारिश ही हो पाई है।

भोपाल

Published: June 30, 2022 11:15:19 am

भोपाल। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ का कहर है। बिहार में भी कुछ जगह बाढ़ के हालात हैं। यह स्थिति नेपाल से पानी छोडऩे के कारण ज्यादा बन रही है। उधर, देश के 15 राज्य सामान्य बारिश को भी तरस रहे हैं। सबसे खराब हालत उत्तरप्रदेश की है तो वहीं मध्यप्रदेश भी 25 प्रतिशत कम बरसे मेघों से तरस रहा है।
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ऐसे में मानसून ठिठकने का असर खरीफ फसल की बुआई पर पड़ा है। खासकर धान पर। बीते साल 36.03 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हो चुकी थी। इस बार 19.59 लाख हेक्टेयर (45.62 प्रतिशत कम) में ही बुआई हुई है। सभी खरीफ फसलों की बात करें तो बीते साल 184.436 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। इस बार 140.524 लाख हेक्टेयर में हो पाई है।
वहीं बताया जा रहा है कि MP में मानसून करीब एक हफ्ते से सुस्त पड़ा है। हालांकि बुधवार को कुछ हिस्सों में मानसूनी बारिश ने राहत दी। बुधवार रात गुना, खजुराहो, छतरपुर, पन्ना, कटनी, मंडला, जबलपुर सहित कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। जबलपुर में बुधवार सुबह से शाम तक 66 मिमी बारिश हुई। राजधानी में बादल छाए रहे, लेकिन बरसे नहीं।
कब में होगी बारिश
मौसम के जानकारों क अनुसार मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ व कुछ राज्यों में 1 जुलाई से तेज वर्षा का दौरा शुरु हो सकता है। जबकि मध्यप्रदेश के कई जिले 30 जून से ही बारिश में भिगने शुरु हो जाएंगे। दअरसल मौसम विज्ञानी ममता यादव के अनुसार इस समय पंजाब से मप्र, छग होते हुए ओडिशा तक एक ट्रफ गुजर रही है। इससे डिंडोरी, मंडला, रीवा, छतरपुर आदि क्षेत्रों में बारिश हो रही है। आगामी 48 घंटों में मानसून ग्वालियर, चंबल क्षेत्र में भी दस्तक दे सकता है। राजधानी में गरज चमक के साथ बारिश हो सकती है।
बताया जाता है कि देश के 251 जिलों (36 प्रतिशत) में कम बरसात हुई है। 151 जिलों (21 प्रतिशत) में बेहद कम बरसात हो पाई है। 86 (12 प्रतिशत) जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश हुई है। 78 जिलों (11 प्रतिशत) में सामान्य से ज्यादा बरसात हो चुकी है। 132 जिलों (19 प्रतिशत) में ही सामान्य बारिश हो पाई है।
ऐसे समझें: कहां कितनी बारिश?

राज्य - औसत - सीजन में - माइनस अंतर प्रतिशत
उत्तरप्रदेश - 89.2 - 23.4 - 74
दिल्ली - 60.4 - 15.8 - 74
केरल - 621.9 - 291.9 - 53
गुजरात - 104 - 49.5 - 52
झारखंड - 181.4 - 89.5 - 50
उत्तराखंड - 168.2 - 97.6 - 42
हिमाचल प्रदेश - 95.4 - 55.5 - 42
ओडिशा - 201.4 - 125.1 - 38
हरियाणा - 50 - 31 - 38
महाराष्ट्र - 199.9 - 137.9 - 31
छत्तीसगढ़ - 178.4 - 126.6 - 29
मिजोरम - 411.5 - 307 - 25
मध्यप्रदेश - 124.2 - 93.2 - 25
पंजाब - 49.7 - 37.1 - 25
कर्नाटक - 192.9 - 153.1 - 21
(28 जून तक बिहार में 99 मिमी औसत बारिश हुई थी। यह सामान्य से 29 प्रतिशत कम थी। 24 घंटे में ही 137.4 मिमी बारिश के साथ यह राज्य सामान्य बारिश की श्रेणी में आ गया।)
मध्यप्रदेश के इन जिलों में बेहद गिरा पानी-
जिला - औसत - सीजन में - माइनस अंतर प्रतिशत
भिंड - 61.6 - 5.3 - 91
उमरिया - 137.9 - 38 - 72
आलीराजपुर - 115.5 - 40.6 - 65
मंदसौर - 92.6 - 33.6 - 64
नीमच - 89.6 - 35.3 - 61
रीवा - 118.1 - 45.9 - 61
(अशोकनगर, खंडवा, मुरैना, श्योपुर, विदिशा मेें सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है)

फसलों की बुआई पर इतना असर
वहीं कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 24 जून को समाप्त सप्ताह तक पिछले साल के मुकाबले देश में 23.81 प्रतिशत खरीफ की बुआई कम हुई है। धान की बुआई पिछले साल के मुकाबले 45.62 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जून के चौथे सप्ताह तक 36.03 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई की जा चुकी थी। इस वर्ष 19.59 लाख टन ही बुआई की गई है। यानी पिछले साल के मुकाबले 16.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई शुरू नहीं हो पाई है। सिर्फ गुजरात में पिछले साल से ज्यादा बुआई हो चुकी है।

खरीफ फसल : कहां कितनी बुआई-
राज्य - 2022 - 2021
उत्तरप्रदेश - 29.449 - 30.513
कर्नाटक - 18.568 - 21.221
महाराष्ट्र - 17.533 - 32.127
गुजरात - 12.036 - 8.636
राजस्थान - 10.284 - 14.502
हरियाणा - 8.848 - 9.229
पंजाब - 7.999 - 19.479
बिहार - 3.665 - 5.041
मध्यप्रदेश - 2.560 - 5.650
छत्तीसगढ़ - 0.550 - 2.983
(आंकड़े लाख हेक्टेयर में)

झमाझम बारिश का इंतजार: ऐसे समझें 10 सालों में जून में बारिश की स्थिति

मध्यप्रदेश में तमाम जिलों के साथ ही राजधानी भोपाल के वासियों को इन दिनों झमाझम बारिश का इंतजार है। पहला मानसूनी माह यानि जून गुरुवार को समाप्त हो जाएगा, लेकिन इस बार तय समय पर मानसून आने के बाद भी जून का कोटा अधूरा है। जून में औसतन बारिश 127 मिमी होनी चाहिए, लेकिन शहर में अब तक महज 69.4 मिमी ही बारिश हो पाई है। अगर पिछले दो सालों की बात की जाए तो जून में कोटे से कहीं अधिक बारिश दर्ज की गई थी,जबकि इस बार जून में कोटे से आधे से थोड़ी ज्यादा बारिश दर्ज हो पाई है। पिछले आठ साल बाद जून माह में इतनी कम बारिश दर्ज की गई है।

राजधानी में मानसून सक्रिय होने के लिए दस दिन से अधिक का वक्त गुजर चुका है, लेकिन इस बार बारिश की रफ्तार काफी सुस्त है। मानसून का सीजन 1 जून से शुरू हो जाता है। जून के शुरुआती दिनों में प्री-मानसून और मानसून सक्रिय होने के बाद मानसूनी बारिश के चलते शहर में अच्छी बारिश होती है, लेकिन इस बार न तो प्री-मानसून बारिश अच्छी हो पाई और न मानसून में तेज बारिश के आसार अब तक बन पाए। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग के एसएन साहू ने बताया कि फिलहाल मौसम का रूख इसी तरह रहने की संभावना है। गुरुवार को भी बादल छाए रह सकते हैं और गरज, चमक के साथ बौछारों की स्थिति बन सकती है।
इस साल अब तक बारिश की स्थिति-
69.4 मिमी बारिश: 1 से 29 जून तक
127 मिमी औसत बारिश होनी चाहिए जून में

दस सालों में जून में बारिश की स्थिति (बारिश मिमी में)
: 2012 : 94.9
: 2013 : 460.3
: 2014 : 23.2
: 2015 : 166.7
: 2016 : 107.4
: 2017 : 86.5
: 2018 : 113.3
: 2019 : 115.6
: 2020 : 405.3
: 2021 : 266.3

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