हीमोग्लोबिन की कमी से होती है खतरनाक बीमारी सेहत के लिए रखें इन बातों का ध्यान

ऑक्सीजन के प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक होता है हीमोग्लोबिन, इसके कमी से शरीर में कमजोरी नशों में दर्द जैसी अनेक बिमारियां होती है

By: KRISHNAKANT SHUKLA

Updated: 03 Jun 2019, 02:44 PM IST

भोपाल. स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमारे शरीर में सभी प्रकार के तत्वों की जरूरत होती है। उनमें लोहा भी एक घटक होता है, जो शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। इसे लोह युक्त प्रोटीन भी कहते है। जो हमारे शरीर में ऑक्सीजन के प्रवाह को संतुलित करता है। इस लोह युक्त प्रोटीन को ही हीमोग्लोबिन कहा जाता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने से शरीर में थकान, कमजोरी, नशों में दर्द जैसी अनेक बिमारियां होने लगती है। इलाज के दौरान अधिकांश डॉक्टर सबसे पहले खून की जांच इसीलिए करते है ताकि शरीर में मौजूद हीमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगाया जा सके।

शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा

पुरुषों में हीमोग्लोबिन की सही मात्रा 14 से 17 ग्राम/100 मिली. रक्त होती है, वहीं स्त्रियों में ये मात्रा 13 से 15 ग्राम/100 मिली. रक्त होती है। शिशुओं के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा लगभग 14 से 20 ग्राम/100 मिली. रक्त होनी चाहिए। हीमोग्लोबिन की कमी होने पर डॉक्टर हीमोग्लोबिन बढ़ाने वाले विटामिन लिखते है। जो अस्थिमज्जा यानि हड्डियों के बीच में खून बनाने का काम करता है। जिससे लाल रक्त कण बनते हैं और इन्हीं कणों से फिर श्वेत कण भी बनते हैं जो घाव को जल्दी भरने में सहायक होते हैं।

सेहत

हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने के उपाय

शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने के लिए लीची स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर माना जाता है। जो रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पाचन-प्रक्रिया में सहायक होती है। लीची में बीटा कैरोटीन, राइबोफ्लेबिन, नियासिन और फोलेट जैसे विटामिन बी उचित मात्रा में पाया जाता है। इसमें मौजूद विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है।

चुकंदर शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने के लिए चुकंदर सबसे अच्छा खाद्य प्रदार्थ है। चुकंदर पोषक तत्वों की खान है। इसमें आयरन, फोलिक एसिड, फाइबर, और पोटेशियम ये सभी सही मात्रा में पाया जाता है। ये शरीर की लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि करता है।

अनार हीमोग्लोबिन बढ़ाने में बहुत लाभकारी होता है। अनार में आयरन और कैल्शियम के साथ-साथ प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर जैसे तत्व होता हैं, जिनसे शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिलती है।

हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाले रोग

शरीर में हीमोग्लोबिन हीम यानी आयरन और ग्लोबिन प्रोटीन से मिलकर बनता है और जब आहार में आयरन की कमी होती है तो शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर भी गिरने लगता है। हीमोग्लोबिन की कमी शरीर में ऑक्सीजन की कमी कर देती है जिससे थकान और कमजोरी महसूस होने लगती है। इस स्थिति को एनीमिया कहा जाता है।

एनीमिया – एनीमिया कोई बीमारी नहीं है लेकिन ये स्थिति कई बीमारियों का कारण जरूर बन जाती है। एनीमिया महिलाओं में ज्यादा देखा जाता है, खासकर प्रेगनेंसी के दौरान। क्योंकि इस समय शरीर को विटामिन, मिनरल, फाइबर की ज्यादा मात्रा की जरुरत पड़ती है।

ब्लड में लोह तत्व कम होने से थकान और कमजोरी बढ़ती जाती है। ब्रेस्ट फीडिंग करवाने वाली महिलाएं भी अक्सर एनीमिया से ग्रस्त रहती हैं। इसके अलावा यूट्रस में ट्यूमर होने, आँतों में अल्सर होने, पाइल्स होने और डाइटिंग करने जैसी स्थितियों में भी एनीमिया की आशंका बढ़ जाती है।

डॉक्टर का कहना

भोपाल जेके हॉस्पिटल के डॉक्टर आर्दश से हुई बातचीत के मुताबिक शरीर में खून की मात्रा सामान्य होने पर ही शरीर स्वस्थ होता है, और शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा कम होने की स्थिति में एनीमिया लक्षण सामने आने लगते हैं। हीमोग्लोबिन का स्तर गिरने के और कारण भी हो सकते हैं जैसे कि सर्जरी के कारण अत्यधिक खून का बहना, लगातार रक्त दान, बोन मेरो की बीमारियां, कैंसर, गुर्दों की समस्याएं, गठिया, मधुमेह, पेट के अल्सर और पाचन तंत्र की अन्य बीमारियां। ऐसी बिमारियों का समय पर इलाज कराना जरूरी है।

नोट - हीमोग्लोबिन की कमी होने पर एक बार डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कई बार हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाले लक्षण अन्य बिमारियों के भी संकेत दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेकर दवा लें।

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