MP में वोटरों की नब्ज टटोलने के लिए पदयात्रा!...

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने 30 सितंबर से नर्मदा पदयात्रा पर निकलने का ऐलान किया है।

By: दीपेश तिवारी

Published: 11 Sep 2017, 11:36 AM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे यात्राओं की सियासत गर्माने लगी है। पहले भी यात्राओं से सत्ता की दूरी नापने की कोशिशें होती रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नवंबर से जनदर्शन यात्रा पर निकलने वाले हैं, जबकि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने 30 सितंबर से नर्मदा पदयात्रा पर निकलने का ऐलान किया है। शिवराज ने जहां जनदर्शन को जनता की समस्याओं को सुलझाने वाला अभियान करार दिया है, तो वही दिग्विजय ने अपनी पदयात्रा को निजी और धार्मिक बताया है।

दर्शनयात्रा पर सीएम :
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी जनदर्शन यात्रा के दौरान एक दिन में एक जिले की कम से कम तीन विधानसभा सीटों पर वे जाएंगे। उनका जनदर्शन अभियान पहले भी बेहद लोकप्रिय हुआ था।

अजय की पदयात्रा:
अजय सिंह ने भी दीपावली के बाद पदयात्रा पर निकलने का ऐलान किया है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के सामने अजय के साथ पदयात्रा में शामिल होने या फिर उसे अपनी ही पदयात्रा का हिस्सा बताने का दांव खेलने का विकल्प है।

भिक्षा मांगकर खाएंगे दिग्विजय:
नर्मदा पदयात्रा के लिए दिग्विजय ने पार्टी से छह महीने लिए हैं। इस दौरान वे भिक्षा मांगकर खाएंगे। वैसे तो दिग्विजय ने सीएम पद से इंकार कर दिया है, लेकिन सियासी दिग्गजों को उनका यह दांव खाली नहीं लगता।

कर्ज माफी रूपी रथ पर सवार:
मध्यप्रदेश में पिछले दिनों हुए किसानों के उग्र आंदोलन के बाद कांग्रेस, राजस्थान में भी किसानों की कर्ज माफी रूपी रथ पर सवार हो गई है। दरअ-सल राजस्थान में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष होने हैं। इस चुनावी समर को पार करने के लिए कांग्रेस किसानों की आत्महत्या और कर्ज माफी रूपी रथ पर सवार होना चाह रही है।

जहां भाजपा केन्द्र व राज्य सरकार की जनकल्याण की योजनाओं को मुद्दा बनाने जा रही है तो कांग्रेस किसानों के साथ आगे बढ़ रही है। इसके स्पष्ट संकेत कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बांसवाड़ा की रैली में दिए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट भी अपनी हर बातचीत में किसानों को मुद्दा बना रहे हैं।

क्यों यह मुद्दा अहम?
करीब तीन चौथाई से अधिक मतदाताकृषि से जुड़ा हुआ है। हर वर्ष प्राकृतिक कहर से किसानों की कमर टूट रही है। बैंकों से लिए कर्जे किसान चुका नहीं पा रहे हैं। इसलिए गाहे-बाहे किसानों की आत्महत्या करने की खबरें आ रही है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपी में इस मुद्दें को चुनाव में भुनाया और जीत हासिल की। कांग्रेस को लगता है कि सरकार विधानसभा चुनाव से पहले किसानों के कर्जे माफ कर सकती है। ऐसे में भाजपा को इसका लाभ नहीं मिले, इसलिए कांग्रेस ने इस मुद्दें को खुलकर उछाल रही है।

दीपेश तिवारी
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