scriptholi 2022- holika dahan-gokasth-lakdi-holika-pichkari | Holi 2022- होलिका दहन में भद्रा बाधक, लेकिन पूंछ काल में रात्रि 8:48 से 10:25 बजे तक है शुभमुहूर्त | Patrika News

Holi 2022- होलिका दहन में भद्रा बाधक, लेकिन पूंछ काल में रात्रि 8:48 से 10:25 बजे तक है शुभमुहूर्त

होलिका दहन के दिन रात्रि 1 बजे के बाद तक रहेगी भद्रा

भोपाल

Published: March 04, 2022 01:01:52 am

भोपाल. पांच दिवसीय होलिका उत्सव की शुरुआत 17 मार्च होलिका दहन के साथ होगी, लेकिन इस बार दिन भद्रा होने के कारण होलिका दहन के लिए शुभमुहूर्त का इंतजार करना होगा। दरअसल इस दिन भद्रा दोपहर बाद से शुरू हो जाएगी और रात्रि 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगी। पंडितों का कहना है कि इस स्थिति में जब भद्रा का वास पूंछ में होता है, उस समय शुभमुहूर्त में होलिका दहन करना चाहिए। वहीं इस बार कोरोना की पाबंदियां नहीं हैं। ऐसे में रंगों का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
Holi 2022- होलिका दहन में भद्रा बाधक, लेकिन पूंछ काल में रात्रि 8:48 से 10:25 बजे तक है शुभमुहूर्त
Holi 2022- होलिका दहन में भद्रा बाधक, लेकिन पूंछ काल में रात्रि 8:48 से 10:25 बजे तक है शुभमुहूर्त
स्वर्ग में रहेगा भद्रा का वास

पं. प्रहलाद पंड्या का कहना है कि होलिका दहन के दिन भद्रा रहेगी, इसी दिन व्रत की पूर्णिमा भी रहेगी। सिंह राशि का चंद्र होने के कारण भद्रा का वास स्वर्गलोक में रहेगा, जो अशुभ नहीं माना जाता है, लेकिन फिर भी भद्रा होने के कारण पूंछ में भद्रा के वास के दौरान होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। इस दिन पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और रवि योग भी रहेगा।
गोकाष्ठ उपलब्ध कराने समितियां कर रही हैं लगातार पहल
इस बार होलिका दहन के लिए अधिक से अधिक गोकाष्ठ उपलब्ध कराने के लिए गोकाष्ठ समितियां लगातार पहल कर रही है। इसी प्रकार गोशालाओं में भी अतिरिक्त गोकाष्ठ तैयार किया जा रहा है। बृजमोहन रामकली गो संरक्षण केंद्र के अध्यक्ष प्रहलाद दास मंगल और प्रमोद नेमा ने बताया कि होलिका उत्सव को देखते हुए एक अतिरिक्त मशीन लगाकर गोकाष्ठ तैयार किया जा रहा है। इसके लिए 2 हजार क्ंिवटल गोकाष्ठ तैयार किया जा रहा है। यह गोकाष्ठ शहर के श्मशान घाटों के अलावा सांची, विदिशा सहित अन्य स्थानों पर सप्लाई किया जाता है।
Holi 2022- होलिका दहन में भद्रा बाधक, लेकिन पूंछ काल में रात्रि 8:48 से 10:25 बजे तक है शुभमुहूर्तभद्रा के दौरान होलिका दहन करना निषेध
पं. विष्णु राजौरिया का कहना है कि अक्सर पूर्णिमा पर भद्रा की स्थिति रहती है। होलिका दहन के दिन भी भद्रा रहेगी, जो दोपहर से लेकर मध्यरात्रि तक रहेगी, लेकिन भद्रा के दौरान होलिका दहन करना निषेध माना गया है, ऐसे में जब भद्रा पूंछ में रहेगी, उस समय होलिका दहन कर सकते हैं। पूंछ में आने के बाद रात्रि 8 बजकर 48 मिनट से सवा दस बजे तक होलिका दहन करना श्रेष्ठ रहेगा। पूंछकाल में भद्रा कमजोर हो जाती है और इसका दोष समाप्त हो जाता है, इसलिए पूंछ में वास के दौरान शुभ मुहूर्त में होलिका दहन कर सकते हैं।
गाए फाग गीत, अबीर-गुलाल लगाकर दी एक दूसरे को बधाई
रंगों के पर्व होली की रंगत शहर में दिखाई देने लगी है। शहर में होली की तैयारियों के साथ ही प्री होली सेलिब्रेशन का सिलसिला भी शुरू हो गया है। जैन समाज की महिलाओं के संगठन अखिल भारतवर्षीय महिला ग्रुप की महिलाओं ने कोहेफिजा में प्री-होली सेलिब्रेशन का आयोजन किया। इस मौके पर महिलाओं ने फाग गीत गाए, एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी। राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाओं ने एकत्रित होकर होली उत्सव मनाया। इस मौके पर वरिष्ठ महिलाओं का सम्मान भी किया गया। आयोजक मंजू जैन ने बताया कि इस मौके पर महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे इस वर्ष अपने घरों में काम करने वाली महिलाओं को उपहार देकर सम्मानित करेंगी।
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