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भगवान भक्तों के मन में बसते हैं, उन्हें प्राप्त करने के लिए निर्मल मन होना चाहिए। जिस तरह से पांच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव ने भगवान के दर्शन कर लिये

By: मनोज अवस्थी

Published: 04 Jan 2018, 10:43 AM IST

भोपाल। भगवान भक्तों के मन में बसते हैं, उन्हें प्राप्त करने के लिए निर्मल मन होना चाहिए। जिस तरह से पांच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव ने भगवान के दर्शन कर लिये उन्हें प्राप्त कर दिया, यह निर्मल मन की प्रत्याशा ही है। यह उद्गार संतश्री ज्ञानदेव महाराज ने बुधवार को एकतापुरी दुर्गा मंदिर राजीव नगर सेमरा में श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्राणी की लालसाएं बढ़ती जाती हैं, लेकिन संतोष होने पर सब कुछ चला जाता है, इसीलिए कहा गया है कि गौधन, गज धन, बाज धन और रतन धन खान जब आवै संतोष धन, सब धन धूनि समान। संसार की सारी विपत्तियां असंतोष से पैदा होती हैं, उन विपत्तियों से छुटकारा पाने के लिए हरिभक्ति ही सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।

उन्होंने कथा के सुनने और उसे मनन करने के लिए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया। मयूर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति बुधवार को कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और बालक ध्रुव की सुंदर अनूठी झांकी प्रस्तुत की गई। इसके साथ ही वृंदावनधाम से आए कलाकारों द्वारा आकर्षक मयूर नृत्य प्रस्तुत किय गयाए जिसकी सभी ने खूब सराहना भी की। कथा समापन के दौरान वंृदावन धाम की पुण्य यात्रा पर जाने वाले भाग्यशाली विजेता के नाम की घोषणा भी की गई। इसमें प्रतिदिन दो श्रद्धालुओं को लकी कूपन के माध्यम से समिति द्वारा वृंदावनधाम की यात्रा के लिए चुना जाता है। यज्ञ मंडप में भी अधिक से अधिक जोड़ों की बैठने की व्यवस्था की गई है।

मंगलगान करते निकली कलश शोभायात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

भोपाल. कोलार स्थित संस्कार मैरिज गार्डन के पीछे ग्राउंड पर सात दिवसीय भागवत कथा का बुधवार से शुभारंभ हुआ। इस मौके पर कलश शोभायात्रा निकाली गई, इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। कलश शोभायात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लिए हुए मंगलगीत गाते चल रही थी। कथावाचक बग्गीनुमा रथ पर सवार थे, जगह-जगह यात्रा का स्वागत सत्कार हो रहा था। आसपास के क्षेत्रों में भ्रमण कर कलश यात्रा आयोजन स्थल पहुंची। यहां विधिवत पूजा अर्चना के साथ कथा की शुरुआत हुई। कथा के पहले दिन भागवताचार्य पं. मुकेश महाराज ने भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिना भक्ति के भगवान को प्राप्त करना संभव नहीं है। पवित्र मन, निस्वार्थ सेवा और भक्ति से ही भगवान की प्राप्ति हो सकती है।

मनोज अवस्थी
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