सीबीआइ का नया फंडा: टारगेट पूरा करने के लिए एक केस की दर्ज की 22 एफआईआर

सीबीआइ का नया फंडा: टारगेट पूरा करने के लिए एक केस की दर्ज की 22 एफआईआर

Deepesh Tiwari | Updated: 07 May 2019, 08:57:03 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

एक साल चार महीने बाद भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची जांच एजेंसी, एक ही आरोपी को पकड़ पाए...

भोपाल राधेश्याम दांगी की रिपोर्ट...
MP की सीबीआइ की एंटी करप्शन ब्रांच ने पंजाब नेशनल बैंक की भोपाल, इंदौर और उज्जैन की अलग-अलग शाखाओं में 2013-18 के बीच हुए घोटाले की 22 एफआइआर दर्ज की, जबकि प्रकरण एक ही था।

लेकिन सीबीआइ भोपाल ने टारगेट पूरा करने के लिए एक ही दिन एक मामले की, जिसमें अधिकांश आरोपी समान हैं, की 22 एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी, लेकिन यह कायमी दर्ज होने के एक साल चार महीने बाद भी नतीजे पर नहीं पहुंची। अब तक एक आरोपी नरेंद्र प्रजापति को ही एक मामले में गिरफ्तार किया गया है।

 

 

 

इंदौर, भोपाल और उज्जैन की बैंक शाखाओं में प्रजापति और बैंक प्रबंधकों के सहयोग से 100 करोड़ का लोन घोटाला सामने आया था, इस पर सीबीआइ ने अलग-अलग प्रकरण कायम कर लिया। इसके बाद भी जांच अधूरी पड़ी हुई है। सवा साल बाद भी मात्र एक आरोपी ही पकड़ पाई टीम। 22 प्रकरणों में 116 आरोपी बनाएं गए। जबकि इन सभी प्रकरणों में आरोपियों के नाम एक ही है।

 

ऐसे समझें: चार ब्रांच के केस को कैसे तोड़ा गया...
सीबीआई ने आपराधिक षडयंत्र, चिटिंग, ठगी, फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने, पद का दुरुपयोग कर करीब 100 करोड़ रुपए की हेरफेर करने वाले आरोपियों के खिलाफ 16 जनवरी, 2018 को प्रकरण दर्ज किया।

आरोपी उज्जैन ब्रांच में भी पदस्थ रहे। चार ब्रांच के समान आरोपियों पर दर्ज 22 केस में लगभग 116 आरोपी बनाए गए हैं, जबकि सभी में समान आरोपियों की भूमिका का दोहराव हुआ हैं। करीब 17 प्रकरणों में नरेंद्र प्रजापति ही अकेले आरोपी है। अधिकांश प्रकरणों में नरेंद्र की पत्नी, भाई, बहन, बेटा, बेटी, मां सहित अन्य परिजन शामिल हैं।

 

 

कुछ प्रकरणों में संपत्ति का मूल्यांकन करने वाले अग्रवाल बंधु, संजय निगम बार-बार आए हैं। सीबीआई ने दो एफआइआर जुमेराती भोपाल ब्रांच की बनाई, जबकि इसमें शेख नसरुल्ला, चीफ मैनेजर पीएनबी एक ही शिकायतकर्ता हैं। चार एफआइआर नेहरू नगर ब्रांच से जुड़ी है। इनमें शिकायतकर्ता नारायण पवार चीफ मैनेजर हैं।

 

आठ केस पीएनबी मारवाड़ी रोड भोपाल से संबंधित है, जिनका शिकायतकर्ता सुभाष चंद्र मोहता एजीएम पीएनबी ही है। नेहरू नगर ब्रांच की एफआइआर में नरेंद्र प्रजापति उसके परिजन आरोपी हैं।

ब्रांच मैनेजर सहित अन्य आरोपियों को अलग-अलग प्रकरण में आरोपी बनाया गया है। अधिकांश आरोपी समान है। आठ केस एसेट रिकवरी मैनेजमेंट ब्रांच इंदौर के हैं, जिनमें शिकायतकर्ता, विजय कुमार हरित चीफ मैनेजर एसेट रिकवरी मैनेजमेंट ही हैं।

इनमें भी नरेंद्र प्रजापति, उनके परिजन, नातेदार-रिश्तेदार और मूल्यांकनकर्ता एजेंट सभी समान हैं। सभी एफआइआर में नरेंद्र प्रजापति और उसके परिजन व मूल्यांकनकर्ता, गारंटर, सभी समान होते हुए 22 केस दर्ज किए।

 

कहां कितना घोटाला
- चारों ब्रांच से लिए गए लोन से कुल 10010.44 लाख रुपए का घोटाला।
- पीएनबी, जुमेराती से 1133.14 लाख रुपए के दो लोन केस है।
- पीएनबी, नेहरू नगर, से 2279.66 लाख रुपए के चार लोन केस हैं।
- पीएनबी मारवाड़ी रोड से 4056.13 लाख के आठ लोन केस हैं।
- पीएनबी एसेट रिकवरी मैनेजमेंट, ब्रांच इंदौर से 2541.51 लाख रुपए के आठ अलग-अलग लोन केस हैं।

 

 

 

 


सीबीआई के नियम के मुताबिक पांच करोड़ के गबन, घोटाले में दर्ज होती है सेपरेट एफआइआर, लेकिन 13 ऐसे केस हैं, जिनमें पांच करोड़ रुपए से कम का लोन घोटाला है।

गिरफ्तार करेंगे
पत्रिका ने सीबीआइ के अफसरों से तीन सवाल पूछे थे। जवाब में जानकारी दी गई कि पीएनबी प्रबंधन की तरफ से 22 शिकायतें मिली थी, इसलिए 22 प्रकरण दर्ज हैं।

वही, डेढ़ साल बाद भी एक ही आरोपी की गिरफ्तारी पर कहा कि मुख्य आरोपी नरेंद्र प्रजापति सीबीआइ को जानकारी देने में टालमटोल कर रहा था, बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। अब अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

 

इधर, सीबीआई की जब्ती में मिला रिकॉर्ड, अब खुलेंगी परतें
वहीं एक अन्य मामले में राजधानी की विवादित रोहित गृह निर्माण समिति में 2003 से 2013 के बीच हुए फर्जीवाड़े की परतें अब खुलती नजर आ रही हैं। 2008 में रिकॉर्ड की जब्ती की जानकारी सीबीआई से पुष्ट हो चुकी है।

सहकारिता विभाग समिति का रिकॉर्ड सीबीआई से प्राप्त कर पता करेगा कि किस अध्यक्ष और सदस्य के समय में फर्जीवाड़ा हुआ है। उसके आधार पर शिकंजा कसा जाएगा। दरअसल विभाग ने रोहित गृह निर्माण समिति की जांच तो शुरू कर दी, लेकिन रिकॉर्ड किसी के पास नहीं था।

 

 

सहकारिता मुख्यालय ने विभाग के सहायक आयुक्त छविकांत वाघमारे को जांच का जिम्मा दिया। उन्होंने आते ही 24 पुराने सदस्यों और अध्यक्षों को नोटिस जारी कर तलब किया। अधिकतर ने बयान में कहा कि 2008 में रिकॉर्ड सीबीआई जब्त करके ले गई, जबकि कुछ ने बताया कि रिकॉर्ड सहकारिता के ऑडिट अफसरों के पास है।

सीबीआई ने उस समय रिकॉर्ड जब्त किया है, इसकी पुष्टी हो गई है। जल्द ही पूरी जानकारी प्राप्त कर फर्जीवाड़े की जड़ तक पहुंचेंगे।
- छविकांत वाघमारे, सहायक आयुक्त

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