जमानती वारंट पर मानवाधिकार आयोग की बेंच में पेश हुए निगम आयुक्त, 5 हजार के मुचलके पर छूटे

- बार-बार नोटिस देने पर भी निगमायुक्त नहीं आए तो आयोग ने जारी किया था जमानती वारंट

भोपाल। शिकायत पर कार्रवाई न करने वाले नगर निगम के अफसरों की लापरवाही की वजह से निगम आयुक्त को राज्य मानवाधिकार आयोग के सामने जमानती वारंट के साथ पेश होना पड़ा। भोपाल नगर निगम कमिश्नर के वीएस चौधरी मंगलवार को राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष प्रस्तुत हुए। इसके बाद बेंच के निर्देश के अनुसार उन्हें 5 हजार के मुचलके पर जमानत मिल गई।

कमिश्नर से जवाब तलब करते हुए आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन ने कहा कि 5 बार नोटिस जारी करने के बाद भी उपस्थित नहीं होने का क्या कारण है?
इस पर कमिश्नर चौधरी ने कहा कि उनका तबादला हाल ही में भोपाल नगर निगम में हुआ है। आयोग की तरफ से नोटिस जारी होने के बाद उन्होंने इस मामले की जानकारी जुटाई है। संबंधित अफसर पर कार्रवाई की जाएगी। बेंच के समक्ष फरियादी ने आयोग की कार्रवाई पर संतोष जताया और कहा कि उनका मामला आयोग की वजह से निपटने जा रहा है। अध्यक्ष ने कमिश्नर से कहा कि कार्रवाई करने के साथ आयोग को भी जानकारी दी जाए। जिससे कि आगे भविष्य में ऐसे अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके। गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों पहले नगर निगम कमिश्नर को राज्य मानवाधिकार आयोग ने तलब किया था और जमानती वारंट भी जारी किया था। जिसकी तामीली करते हुए मंगलवार को कमिश्नर पहुंचे थे। यह मामला बीते 2 साल पुराना है। नगर निगम के अफसरों द्वारा एक शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया गया था। जिस पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने कमिश्नर को बेंच के सामने प्रस्तुत होने के लिए कहा था।

यह था मामला
टीटी नगर स्थित एक प्लॉट के ऊपर से हाईटेंशन लाइन पास हुई थी और मालिक ने आवेदन किया था कि हाई टेंशन लाइन को डायवर्ट करते हुए खंभों के जरिए पास किया जाए लेकिन इस मामले में नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिसकी वजह से प्लॉट मालिक अपना मकान नहीं बना पाया और उसने राज्य मानवाधिकार आयोग में गुहार लगाई थी।

सुनील मिश्रा
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