मुझे टाइपकास्ट होना पसंद नहीं, मैं हर जोनर में अपनी पहचान बनाना चाहता हूं

प्लेबैक सिंगर जावेद अली से पत्रिका प्लस की विशेष बातचीत

 

By: hitesh sharma

Published: 03 Mar 2019, 03:52 PM IST

भोपाल। मैं रोमाटिंक, जैज, कव्वाली, आइटम सॉन्ग से लेकर भजन तक गाना पसंद करता हूं। मुझे टाइपकास्ट कहलाना पसंद नहीं है। मैं हर जोनर में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता हूं। मैंने खुद हमेशा से वर्सेटाइल की तरह ही तैयार किया है। कई बार एक जैसे गानें गाकर प्रॉड्यूसर-डायरेक्टर भी आपको ऐसी ही गानें ऑफर करते हैं। धीरे-धीरे आप पर टैग लग जाता है और इंडस्ट्री में टाइपकास्ट कहलाने लगते हो। यह कहना है प्लेबैक सिंगर जावेद अली वे रविवार को परफॉर्मेंस देने रवीन्द्र भवन में आ रहे हैं। इससे पहले पत्रिका प्लस से विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी लाइफ जर्नी शेयर की। उन्होंने कहा कि सिंगर को हर पल चुनौतियां का सामना करना पड़ता है।

गिरिजादेवी को लाइट म्यूजिक पसंद आया
उन्होंने गिरिजा देवी से जुड़ा एक किस्सा शेयर करते हुए कहा कि मुम्बई में मेरा एक शो था। मैं स्टेज पर परफॉर्म कर रहा था। तभी मेरे साथी म्यूजिशियन ने बताया कि ऑडियंस के बीच गिरिजादेवी भी बैठी हैं। मैंने उनकी ओर देखा तो वे मुस्कुरा दीं। वे काफी देर तक मुझे सुनती रहीं। हालांकि उनकी व्यस्तता के कारण वे शो में से चली गईं। बाद में उनसे जुड़े लोगों ने मुझे बताया कि गिरिजा देवी को मेरा लाइट म्यूजिक काफी पसंद आया। वे बार-बार मुझे दाद दे रही थीं। मेरा सौभाग्य है कि मैं उन्हें अपने गानों के माध्यम से ट्रिब्यूट दे पाऊंगा।

डैडी ने किया सपोर्ट
उनके पिता ख्यात कव्वाली गायक थे। वे चाहते थे कि मैं भी कव्वाली गाऊं। जब उन्हें मेरी इ'छा पता चली तो उन्होंने मेरा सपोर्ट किया। इंडस्ट्री में मेरा कोई गॉड फादर नहीं था। सालों तक धक्के खाए। करीब छह साल की मेहनत के बाद फिल्म नकाब में एक दिन तेरी बाहों में... गाना हिट हुआ तो इंडस्ट्री में पहचान बनी पाई। उन्होंने रिएलिटी शो के बारे में कहा कि ये एक प्लेटफॉर्म तो देते हैं लेकिन इसके बाद अपने मेहनत के दम पर मुकाम बनाना पड़ता है। इंडस्ट्री में टैलेंट की कोई कमी नहीं है।

hitesh sharma Reporting
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