कोई शहर छोड़ गया तो किसी को सताया कार्रवाई का डर

- पीएम आवास योजना से मोहभंग : दस जिले के निकायों में हालत खराब
- बैतूल जिले में राशि सरेंडर कर रहे हितग्राही

By: anil chaudhary

Published: 22 Jun 2020, 05:04 AM IST

केस 01 - बैतूल के प्रताप वार्ड निवासी सुमन तुलराम सरसोदे को 60 हजार की पहली किस्त मिली, लेकिन मकान निर्माण शुरू नहीं कराया। नपा ने राशि सरेंडर करने को कहा तो शहर छोड़कर गांव चले गए। खाता सीज कर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के बाद हितग्राही ने पैसे लौटाए।
केस 02 - बैतूल के तिलक वार्ड निवासी लीलाबाई गोस्वमी को भी 60 हजार रुपए मिले थे, लेकिन उन्होंने नगर पालिका को यह राशि लौटा दी। उन्हें डर था कि मकान बनने के बाद सरकार अपना कब्जा कर लेगी या छत किसी और को दूसरा मकान बनाने के लिए दे दी जाएगी।
केस 03- बैतूल के अर्जुन वार्ड निवासी भागा बाई यादव को पहली किस्त मिली, लेकिन कुछ दिन बाद राशि सरेंडर कर दी। उन्होंने बताया कि राशि मिलने में काफी देरी होती है। किराए के मकान में ही काफी पैसा चला जाता है।
भोपाल/बैतूल. प्रधानमंत्री आवास की पहली किस्त लेने के बाद भी करीब एक लाख से अधिक हितग्राहियों ने आवास निर्माण शुरू नहीं किया। इसका खुलासा जियो टैगिंग रिपोर्ट में हुआ है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति दस जिले के नगरीय निकायों की है। पिछले छह माह से इन आवासों के निर्माण में कोई विशेष काम नहीं हुआ। उधर, बैतूल जिले में तो हाल यह हैं कि राशि सरेंडर करने के डर से कोई शहर छोड़कर चला गया तो किसी ने कार्रवाई के डर से पैसे वापस कर दिए।
सरकार ने प्रदेश में चार लाख से अधिक हितग्राहियों को छह माह पहले किस्त जारी की थी। अब प्रगति देखी गई तो एक लाख से अधिक हितग्राहियों के आवासों का काम शुरू नहीं हुआ। सबसे ज्यादा खराब स्थिति जबलपुर, सागर, दमोह, देवास, खरगोन, हरदा, खंडवा और नरसिंहपुर जिले की है। इस संबंध में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इन जिलों के निकायों से तमाम जानकारी मांगी है। इसके लिए दस दिन का समय दिया गया है।
शासकीय जमीनों पर तैयार हो रहे सामूहिक पीएम आवासों की गति में तेजी लाने के लिए प्रोजेक्ट इंजीनियरों को कहा गया है। तैयार आवासों का आवंटन करने के लिए कार्ययोजना बनाने को कहा है।

- नोटिस जारी
बैतूल शहर में कुल 74 हितग्राहियों द्वारा अलग-अलग कारण बताते हुए राशि नगर पालिका को लौटाई जा रही है। 20 से ज्यादा हितग्राही ऐसे हैं जिन्हें पांच माह पूर्व राशि जारी की गई थी। नगर पालिका ने इन्हें नोटिस जारी किए हैं। आवास योजना से लोगों का मोह भंग होने का बड़ा कारण किस्त मिलने में लेटलतीफी है।
- तीन चरणों में सबसे ज्यादा सरेंडर
पहले चरण में तीन हितग्राहियों ने राशि सरेंडर की। दूसरे चरण में 27, तीसरे चरण में 14, चौथे चरण में 21 हितग्राहियों ने पैसे लौटाए। पांचवें चरण में नौ हितग्राहियों ने राशि सरेंडर के लिए आवेदन किया है।
- इसलिए निर्माण नहीं
पहली किस्त के 60 हजार में नींव का काम भी पूरा नहीं हो पाता।
तीन चरणों में पैसे दिए जाना।
राशि मिलने में लंबा समय लगता है।
कई बार राज्य का हिस्सा नहीं मिलने पर किस्त कम कर दी जाती है।
महंगाई के लिहाज से मकान बनाने के लिए ढाई लाख रुपए काफी कम।
कई लोगों को पुराना घर तोड़कर किराये के मकान में रहना पड़ता है, लेकिन सरकार से पैसे मिलने में डेढ़ से दो साल लग जाते हैं।

- लॉकडाउन एक बड़ी वजह
प्रदेश में 24 मार्च के बाद लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद हो गईं। मजदूर पलायन कर गए। नगरीय निकाय के अधिकारी आवास निर्माण में देरी होना इसे मुख्य वजह बता रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि खुद के आवास बनाने की बात है तो लॉकडाउन के चलते रेत, ईंट, सीमेंट सहित अन्य मटेरियल मिलना बंद हो गया था, जिससे हितग्रहियों ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया। अब इस निर्माण कार्य फिर से शुरू कराए जा रहे हैं।

पीएम आवास के साफ्टवेयर पर हितग्राहियों की जानकारी देना जरूरी। इसमें हितग्राहियों को हर चरण के निर्माण कार्यों की जानकारी और फोटो अपलोड करना जरूरी है। जिन हितग्राहियों ने अपने आवास की प्रगति नहीं दी है, उनकी अगली किस्तें नहीं मिलेंगी।
- पी. नरहरि, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग
अभी तक 74 हितग्राहियों ने राशि मिलने के बाद भी आवास नहीं बनाए हैं। इनसे राशि वापस ली जा रही है। मकान नहीं बनाने को लेकर अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं।
- नगेन्द्र वागद्रे, प्रभारी, पीएम आवास योजना बैतूल

 

Kamal Nath
anil chaudhary Desk
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