अच्छी खबर: अगर नहीं कर पा रहे हैं भारत भम्रण तो जरूर जाएं इस जगह, दिखेंगी सारी कलाएं

आने वाले दिनों में इस शहर में दिखेगा 'मिनी इंडिया'....

By: Ashtha Awasthi

Published: 04 Jan 2018, 02:54 PM IST

भोपाल। भारत भ्रमण कर हर राज्य की संस्कृति व सभ्यता को जानने की उत्सुकता तो हर किसी में होती है लेकिन देश घूमने का ख्वाब कम लोगों का ही पूरा हो पाता है। जो लोग भारत भम्रण नहीं कर पा रहे हैं उन्हें लिए अच्छी खबर है। शहर के श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के उत्सव 'कला उत्सव-2017' का बुधवार को रंगारंग शुभारंभ एनसीईआरटी के निदेशक, प्रोफेसर एचके सेनापति ने किया। क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान के प्राचार्य व स्थानीय आयोजक प्रोफेसर एन. प्रधान ने बताया कि कला उत्सव 2017 में देश के सभी राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के 1285 माध्यमिक स्तर के स्टूडेंट्स पार्टिसिपेट कर रहे हैं। यह नजारा ऐसा है कि मानों भोपाल में एक मिनी भारत सिमट आया है।

विलुप्त कलाओं को सहेजने का प्रयास

राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वयक ज्योत्सना तिवारी ने बताया कि कला उत्सव मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद का तीसरा आयोजन है। इसकी शुरूआत एमएचआरडी की पहल पर वर्ष 2015 से हुई। हमारे देश में कला की लाखों विधाएं हैं जिनमें से बहुत सी विधाएं खत्म होने की कगार पर हैं। इसका उद्देश्य कला के प्रति युवा पीढ़ी को जागृत करना है।

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चार दिन में दिखानी हैं चार विधाएं

कला उत्सव के लिए 240 प्रोजेक्ट पर ऑनलाइन कार्य किया गया। इन प्रोजेक्ट का चयन पहले विद्यालय स्तर पर, फिर जिला स्तर फिर राज्य स्तर पर हुआ। राज्य स्तर चयनित हुए स्टूडेंट्स यहां चार दिनों में अपनी कला की 4 विधाओं नृत्य, संगीत, थिएटर, विजुअल आर्ट का प्रदर्शन करेंगे। कला के क्षेत्रों के विशेषज्ञों की ज्यूरी सभी प्रदर्शनों को मूल्यांकन कर रही है। पहले दिन १४ राज्यों के पार्टिसिपेंट ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कला को बनाएं शिक्षा का हिस्सा

प्रोफेसर एचके सेनापति ने कहा कि आज के स्कूली बच्चे ही वे व्यक्ति हैं जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण व पोषण करेंगें और इस विरासत को पूरे विश्व भर में फैलाने के लिए राजदूत की भूमिका निभाएंगे। सिर्फ किताबों से प्राप्त ज्ञान और परीक्षा द्वारा मूल्याकंन से समग्र विकास नहीं होता है। हमें इससे बाहर निकलना है, कला को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

तेय्यम में गाया जाता है थोट्यम पट्टू

केरल के स्टूडेंट्स ने थोट्यम पट्टू की प्रस्तुति दी। यह केरल के उत्तर मलबार इलाके के पूजा अनुष्ठान तेय्यम में गाते हैं। यह मुख्य रूप में कोलत -नाड इलाके और कर्णाटक के कोडगु और तुलु नाडु इलाके में जीते-जागते पंथ के रूप मे हज़ारों साल पुरानी रीति से प्रस्तुत किया जाता है।

कर्नाटक से आए प्रतिभागियों ने ट्रेडिशनल सॉग ऑफ कईवरा पेश किया। यह कल्चरल कलरफुल कॉस्ट्यूम, रिदमिक लिरिक्स और स्टाइल परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है। यह कर्नाटक का ओल्डेस्ट म्यूजिक फॉर्म है, इसमें यूनिक कॉस्ट्यूम अट्रैक्शन होता है। पार्टिसिपेंट्स ने एलु कोटि एलुकोटिगो चांगमलो... से शुरुआत की। इस म्यूजिक फॉर्म में पार्टिसिपेंट्स का ऐसा परफेक्शन था कि प्रस्तुति समाप्त होने के बाद जजेस ने ड्रम बजवाकर देखा, जजेस को लगा कि बैकस्टेज कोई ड्रम प्ले कर रहा है। लेकिन जब गल्र्स ने ड्रम प्ले करके दिखाया तो जजेस भी हैरान रह गए।

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