खुद जाओ तो होती है परेशानी, दलाल बिना टेस्ट के करा देते हैं पास

खुद जाओ तो होती है परेशानी, दलाल बिना टेस्ट के करा देते हैं पास

Rohit Prasad Verma | Publish: May, 17 2019 08:57:52 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

आरटीओ में दलालों का कब्जा, जो दलाल से संपर्क नहीं करता उसका काम भी नहीं होता

भोपाल. आरटीओ दफ्तर फिर दलालों के के चंगुल में है। पूरे दफ्तर का माहौल ही ऐसा है कि अपने काम के लिए आपको घूमफिर कर दलालों के पास ही आना पड़ता है। लाइसेंस बनाने के लिए ये दलाल 13 सौ से 15 सौ रुपए लेते हैं। इसके बाद न तो ट्रायल का झंझट ना ही बार-बार ऑफिस आने का।

इस पूरे काम में आरटीओ बाबुओं की भी मिलीभगत है। सीधे उन्हें भी इतनी रकम देकर लाइसेंस बनवाया जा सकता है। कई दलाल तो एजेंट बन बाबुओं के लिए ही काम करते हैं। यही नहीं आरटीओ परिसर में दलालों का कब्जा है। ये सभी अपने आप को एजेंट कहते हैं, जो आरटीओ स्टाफ के मुकाबले दस गुना तेजी से सारे काम निपटा सकते हैं।

ऐसे करते हैं काम
आरटीओ में दलालों से लेकर अधिकारियों की पूरी चेन है। आप किसी भी एजेंट से मिलिए, वह लाइसेंस बनाने के लिए कागजात के साथ 1500 रुपए तक की मांग रखेगा। रकम व कागज देने के बाद एक दो दिन बाद बुलाया जाएगा। दोबारा आने पर लर्निंग मिलेगा और फिर एक महीने बाद लाइसेंस दिलाया जाता है।

अगर पूछो कि टेस्ट तो नहीं देना होगा तो जवाब होता है, रुपए दे रहे हो तो फिर काहे का टेस्ट। ऐसे ही हाल फिटनेस सहित अन्य मामलों के भी बने हुए हैं। अब दो साल के लिए फिटनेस किया जा रहा है। इसकी सरकारी फीस तो 600 से 700 के बीच है, लेकिन दलालों द्वारा इसके लिए 2600 रुपए तक की वसूली की जा रही है।

बनाया जटिल सिस्टम
जो लोग खुद लायसेंस बनावाना चाहते हैं उनसे इतने सवाल किए जाते हैं कि वे घबराकर दलाल के पास चले जाते हैं। मसलन व्यक्ति कागजात लेकर सीधे इंस्पेक्टर के पास पहुंचता है, वह कागजों में ही तमाम कमियां गिना देते हैं, जिन्हें पूरी करने में दो दिन लग जाते हैं। लाइसेंस बनवाने के लिए तमाम दस्तावेजों की कॉपी जमा कर लर्निंग के लिए रसीद कटाने की लाइन में लगो।

इसके बाद अधिकारी कागजों की जांच करते हैं। फिर ऑनलाइन फोटो और अंगूठे का निशान लिया जाता है। इसके बाद लर्निंग लाइसेंस मिलता है, जिसमें छह से सात दिन तक लग जाते हैं। इसके एवज में भी कई बार रुपयों की वसूली होती है। इसके कारण लोग परेशान होते हैं।

फर्जी फिटनेस सर्टीफिकेट
दलालों की दबंगता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ये फर्जी फिटनेस सर्टीफिकेट तक बनवा देते हैं। कइयों के पास डॉक्टर का साइन किया फार्म तक रहता है। फार्म भरकर सील लगा अधिकारियों से पास करा लेते हैं।

 

मैन्युअल लेते हैं फीस
सरकार ने फर्जीवाड़े को रोकने ऑनलाइन सिस्टम लागू करने की बात कही थी, पर अब तक यहां पैसों के लेनदेन का काम मैन्युअल ही होता है। इसमें आसानी से फर्जीवाड़ा किया जा सकता है।

इससे जाते हैं दलालों के पास
परमानेंट लाइसेंस बनवाने खुद के जाने पर ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, ऐसे में कई बार फेल भी हो जाते हैं। फेल होने पर दोबारा टेस्ट की तारीख 15 दिन के बाद मिलती है। दलाल के जरिए न कोई टेस्ट होता न ही कतार में लगने का झंझट। समय बचता है सो अलग। प्रशासन इन दलालों पर कार्रवाई करता है तो वे टेबल-कुर्सी हटाकर चार पहिया वाहनों से कारोबार चलाने लग जाते हैं।

किस काम का कितना पैसा
काम सरकारी फीस दलाल के जरिए
लर्निग लाइसेंस(दो व चार पहिया) 350 1500 से 1600
परमानेंट लाइसेंस (दो व चार पहिया) 1100 2500 से 3500
हैवी लाइसेंस 2500 15000
रजिस्ट्रेशन दो पहिया 2500 से 3200 3200 से 4200
डुप्लीकेट आरसी 350 1200 से 1400


लोग परेशान ना हों इसके लिए सारी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। जो लोग ऑनलाइन अप्लाई कर रहे हैं, उन्हें दलालों के पास जाने की कोई जरूरत नहीं है।
संजय तिवारी, आरटीओ

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