कार रेसिंग का स्पॉट बना कलियसोत डैम

जल अधिनियम के तहत ऐसा करना है अवैध, तैनात होने पर भी स्टाफ नहीं रोकता ऐसी गतिविधियां...

भोपाल. कलियासोत डैम तमाम अवैध गतिविधियों का अड्डा बनकर रह गया है और जल संसाधन विभाग इस पर प्रभावी रोक लगाने में नाकामयाब है। डैम में कई स्थानों से सीधे गाडिय़ां अंदर तक ले जाकर रेसिंग हब बना लिया गया है। इसके साथ ही रात में मछली और वन्यजीवों के आखेट की बातें पूर्व में सामने आ चुकी हैं, फिर भी कार्रवाई शून्य है। डैम में वाहनों के सीधे जाने पर रोक नहीं होने के कारण यह सब हो रहा है।


उल्लेखनीय है कि शहर से सटे कलियासोत डैम में दुर्लभ व लुप्तप्राय कई वन्यजीव हैं, जिनमें घडिय़ाल, मगरमच्छ, कछुए, मोर आदि शामिल हैं। कुछ दिन पूर्व शिकारियों का जाल एक घडिय़ाल के मुंह में फंस गया था। तब यह भी बात सामने आई थी कि इस डैम में घडिय़ालों और कछुओं का शिकार किया गया। इस मामले में वन विभाग प्रकरण दर्ज कर जांच कर रहा है।

डैम का पानी उतरने के बाद जलभराव क्षेत्र में जीप और कारों का रेसिंग हब बना दिया गया है। युवक-युवतियां यहां वाहनों को अंदर लाकर रेसिंग करते हैं, जो जल अधिनियम 1974 के प्रावधानों का सरासर उल्लंघन है। यहां तैनात जल संसाधन विभाग का स्टाफ भी कुछ नहीं कहता।

फेंकते हैं रासायनिक कचरा
डैम के जल क्षेत्र में लोग रात-बिरात रासायनिक व अन्य कचरा भी फेंक जाते हैं, जिससे जलस्रोत जहरीला होता जा रहा है। दो दिन पूर्व किसी ने टापू के पास स्थित शिवालय के नजदीक बच्चों की दवाएं फेंकी थीं, जिनकीं एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी।

अंदाज लगाया जा रहा है कि ये दवाएं आसपास के किसी हॉस्पिटल से फेंकी गई हैं। इन दवाओं की वहां फेंके जाने की भनक पाते ही जल संसाधन विभाग ने इन्हें वहां से हटवाया। इसकी जांच भी नहीं की गई कि ये दवाएं किस बैच और लॉट नम्बर की हैं, जिससे आगे की जांच में दोषी तक पहुंचा जा सकता था।

पूर्व में दिया था एस्टिमेट
इस बांध को संरक्षित करने के लिए जल संसाधन विभाग ने एक एस्टिमेट तैयार किया था, लेकिन अज्ञात कारणों की वजह से वह एस्टिमेट ठंडे बस्ते में चला गया। यदि इस बांध की फेंसिंग हो जाए तो वाहन, शिकार और व्यक्तियों के अवैध प्रवेश पर प्रभावी रोक लग सके।


डैम में नशीली दवाएं पाई गई हैं, जिसकी रिपोर्ट बनाकर दे दी गई है। कार रेसिंग आदि गतिविधियों को रोकने के लिए संभव प्रयासों पर विचार किया जाएगा।
- आरके जैन, एसडीओ, जल संसाधन

 

दिनेश भदौरिया
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