SAND MINING: अंबानी की सैलरी से भी ज्यादा है MP के इस डिपार्टमेंट की कमाई

अवैध रेत खनन और ओवरलोडिंग का काला धंधा इतना पनप चुका है कि इसकी एक-एक जानकारी आपको चौंका सकती है।

By: Brajendra Sarvariya

Published: 19 Feb 2017, 09:03 AM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार पर नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से लगातार हो रहे अवैध रेत खनन को रोकने के लिए जनता का दबाव बढ़ता जा रहा है। दबाव कम करने के लिए राजधानी भोपाल में दो दिन पहले सिर्फ चंद घंटों के लिए कार्रवाई की गई। 100 ट्रक जब्त हुए। पर, जो असल में रेत माफिया है, उनका एक भी ट्रक नहीं पकड़ाया। इतना ही नहीं शिवराज सरकार के जो विभाग इन अवैध रेत ट्रकों को शहर में एंट्री कराते हैं, उन विभागों में भ्रष्टाचार इतना है कि एक दिन में 16 लाख रुपए तक की कमाई हो जाती है। इस कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश सरकार के माइनिंग डिपार्टमेंट का है। कमाई के लिहाज से देखें तो ये विभाग एक दिन में इंडिया के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी से भी ज्यादा कमा रहा है। अवैध रेत खनन और ओवरलोडिंग का काला धंधा इतना पनप चुका है कि इसकी एक-एक जानकारी आपको चौंका सकती है। आइए हम बताते हैं....




ऐसे होती है 400 चौकियों पर कमाई
नाम न छापने की शर्त पर इस ऑपरेशन के अनुभवी कारोबारियों से मिली जानकारी के अनुसार हर दिन ट्रक-डंपरों की 400 ट्रिप से चार कमाऊ चौकियों पर बंटने वाली रिश्वत की रकम ही 16 लाख रुपए है। सीएम शिवराज सिंह चौहान की पहल पर नर्मदा की रेत चोरी के इस कारोबार पर सख्ती शुरू हुई है। अगर विभागीय अफसर उनकी मंशा के मुताबिक पक्षपात से दूर रहकर कार्रवाई करेंगे तो अवैध रेत खनन रुकेगा। हर चौकी पर 500 रुपए तय। दो ट्रिप में एक चौकी पर 1000 रुपए। चार चौकियों पर 4000 रुपए। 400 डंपरों से 16 लाख रुपए की वसूली। एक जिले के अफसरों के हिस्से में हर दिन चार लाख रुपए। इन कमाऊ चौकियों पर माइनिंग विभाग के करीब 200 बाबू व कर्मचारी लगे हैं।




चुपके से हवा भराई, रेत पलटी और ले गए 12 डंपर
गुरुवार देर रात की गई कार्रवाई के बाद 16 डंपरों को होशंगाबाद रोड पर 11 मील बायपास के पास खड़ा करा दिया था। इनमें से 12 डंपरों की हवा भी निकाल दी थी। शुक्रवार को खनिज विभाग के इंस्पेक्टर जब वहां कार्रवाई के लिए नहीं पहुंचे तो माफिया के लोग ठेलों पर कम्प्रेशर लादकर वहां पहुंचे। उन्होंने हवा भराई और रेत पलटकर होशंगाबाद की ओर भाग गए। रेत इसलिए पलट दी कि आगे गड़रिया नाला नाके व अन्य नाकों पर पकड़े जाने का डर था। शनिवार सुबह जब इस बात की जानकारी विभाग में हुई तो हड़कंप मच गया, क्योंकि मौके पर सिर्फ रेत है। लापरवाही की हद तो ये है कि इन डंपरों का लेखा-जोखा भी खनिज विभाग के पास नहीं है। क्योंकि कार्रवाई के दौरान पूरा अमला सारवकर सेतू और शुक्रवार को लाल परेड ग्राउंड पर जब्त 52 डंपरों की कार्रवाई में लगा रहा।




कुछ डंपर अभी खड़े हैं
भोजपुर रोड और होशंगाबाद रोड पर ही करीब आधा दर्जन डंपर अभी मौजूद हैं, लेकिन ये तय नहीं हो पा रहा है कि इनमें से वो कौन से चार डंपर है जिन्हें कार्रवाई के बाद यहां रोक दिया गया। 



अभी भी लापता हंै डंपर
जो 34 डंपर गुरुवार रात से गायब हैं उनका पता शनिवार को भी नहीं लगा सका है। खुद विभाग भी इनको खोजने की कोशिश नहीं कर रहा है। सूत्र बताते हैं कि जिस समय कार्रवाई चल रही थी उस समय खनिज इंस्पेक्टर विदिशा बायपास पर उपस्थित थे। इस वजह से जो डंपर सावरकर सेतू पर पकड़े गए वही रह गए। बाकी के जो डंपर इधर-उधर खड़े करा रखे थे उनमें से 12 भाग गए, बाकी उसी दिन कोई न कोई सेटिंग बैठा कर अपने डंपरों को लेकर निकल गए।




इनका कहना है..
भागने वाले डंपरों के 14 नंबर हमारे पास हैं जिन्हें परिवहन विभाग को दे दिए हैं, वे इनको ट्रेस करेंगे।
- अशीष भार्गव, प्रभारी खनिज अधिकारी
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