वन ग्रामों में सुबह की डोंड़ी और शाम की गश्ती से रुकीं वन्य प्राणियों की इंसानी हमले की घटनाएं

- बाघ, हाथी के हमले से पिछले माह एक दर्जन से अधिक लोगों की गई थीं जाने-

Last month more than a dozen people were killed due to tiger, elephant attack

By: Ashok gautam

Published: 10 May 2020, 04:04 AM IST


भोपाल। वन ग्रामों में सुबह डोड़ी पिटवाना और शाम को सुरक्षा समितियों के साथ गश्ती करने का प्रदेश में वन्य प्राण्यिों का इंसानी हमले पर बड़ा असर देखने को मिला है। वन विभाग के इस प्रयोग से वन्य प्राणियों का इंसानी हमले की घटनाएं खत्म ही हो गई हैं।

वन विभाग ने इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए सभी नेशनल पार्क, संचुरी और वनों से लगे गांवों में लॉक डाउन तक जारी रखने के लिए मैदानी अमलों को कहा है। लॉक डाउन होते ही पिछले माह वन्य प्राणी हर दूसरे दिन एक इंसान पर हमला कर उसे मौत के घाट उतारते थे। गांव में डोंड़ी पिटवाने और गांव की सुरक्षा समितियों के साथ दल बनाकर18 अप्रैल से गश्ती करने से इसके परिणाम विभाग को 29 अप्रैल से देखने को मिले हैं।
वन्य प्राणियों के हमले से अप्रैल माह में करीब 14-15 लोगों की जाने गई हैं। इससे स्थानीय लोगों का वन्य प्राणियों के प्रति गुस्सा भी दिखने लगा था, जो वन्य प्राणियों के लिए एक खतरे की घंटी थी। वन विभाग के अधिकारियों ने इसे रोकने और ग्रामीणों को समझाने के गांव गांव में बैठक की, हमले की वजह बताते हुए सतर्क रहने और जंगलों में नहीं जाने की सलाह दी थी। जहां लोगा सलाह को नहीं मान रहे थे वहां सख्ती भी की। इसके बाद इसे रोकने की जिम्मेदारी ग्राम समितियों को दिया, जिसका नतीजा यह सामने आया कि घटनाओं पर पूरी तरह से नियंत्रण किया जा सका। 29 अप्रैल के बाद से हमले की घटनाएं एकदम से बंद हो गई हैं।

सबसे ज्यादा घटनाएं महुआ बिनते समय
इंसानों पर हमले की 80 फीसदी घटनाएं महुआ बिनते समय हुई हैं। वन्य प्राणियों के जानकार बताते हैं कि शकाहारी वन्य प्राणियों को महुंआ बहुत पसंद है। वे इस समय महुआ खाने आते हैं। इसके चलते मांसाहारी वन्य प्राणी महुआ के आस-पास घात लगए बैठे रहते हैं, जैसे की नील गाय, हिरण मवेशी सहित अन्य वन्य जीव महुंआ खाने लगते हैं, वैसे ही ये उन पर हमला कर देते हैं। इसी तरह से महुआ बिनने वालें लोगों पर भी हमला कर बैठते हैं।

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कब-कब हुई घटनाएं
- 2 अप्रैल: बांधवगढ़ में सुरक्षा श्रमिक चिंतमाणि पर बाघ ने हमला कर मार डाला सुरक्षा श्रमिक शौच के लिए जा रहा था।
- 3 अप्रैल : अनूपपुर में हाथियों ने प्रेम सिंह, जानकी बाई, कुंती बाई को कुचल कर मार दिया। ये खेत में फसलों की कटाई कर रहे थे।
- 8 अप्रैल : पेंच में बाघ ने किशोरी नीलकली पर हमला कर मार डाला। ये अपनी मां के साथ महुंआ बीनने जंगल में गई थी।
- 9 अप्रैल: बांधवगढ़ में बाघ ने पप्पी बाई पर हमला कर दिया। ये जंगल में महुआ बिनने गई थी।
-11 अप्रैल: भालू ने शहडोल में रामदीन और गोरेलाल पर हमला कर मारा दिया। यह महुंआ बीनने जंगल में गए थे।
-11 अप्रैल : रतलाम में जंगली ***** ने रतन नामक युवक पर हमला कर दिया। युवक की मौत हो गई। महुआ बिनने गया था।
-12 अप्रैल : सिवनी जिले में हाथी ने गिन्नी लाल को कुचल दिया। वो जंगल में महुंआ बिनने गया था।
-15 अप्रैल : को छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ थाने के मोहगांव निवासी संतोषी तुमराम उम्र 18 वर्ष पर हमला कर उसकी जान ले ली।
-17 अप्रैल : को संजय गांधी नेशनल पार्क सीधी में घोपड़ छुईया गांव में वंदना सिंग दस वर्ष, मां के साथ तेंदुआ ने हमला बोल कर उसकी जान ले ली।
-25 अप्रैल : को संजय गांधी नेशनल पार्क शहडोल ब्यौहारी में बाघों ने राम नरेश पटेल 60 साल का शिकार कर लिया।
- 29 अप्रैल : को बांधवगढ़ नेशनल पार्क रेंज में पनपथा ब्ीट में कुछमहा गांव में उमरिया जिला में रामसुहावन बैगा 45 साल पर हमला कर दिया, जिससे उसी मौत हो गई। यह जंगल में महुआ बिनने गया था।

Ashok gautam Reporting
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