scriptIndia can become a 5 trillion dollar economy country in a few years | आपदाओं ने रास्ता नहीं रोका तो देश बहुत जल्द लगाएगा बड़ी छलांग | Patrika News

आपदाओं ने रास्ता नहीं रोका तो देश बहुत जल्द लगाएगा बड़ी छलांग

देश के प्रमुख अर्थशास्त्री प्रोफेसर वीके मल्ह़ोत्रा ने ‘पत्रिका’ से कहा....भारत कुछ सालों में 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी वाला देश बन सकता है, -उन्होंने कहा कि एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल पर बात चल रही है, उसकी जगह ट्रेड प्रमोशन काउंसिल बनना चाहिए

भोपाल

Published: December 27, 2021 08:00:40 pm

भोपाल. भारत की आर्थिक विकास दर तेजी से ग्रो कर रही है। देश के हर राज्यों में विकास को लेकर एनालिसिस हो रहा है। कुछ समय से वैश्विक महामारी कोरोना के कारण आर्थिक गतिविधियों में रूकावट आई थी लेकिन धीरे-धीरे उद्योग—व्यवसाय पटरी पर आ गए हैं। आने वाले समय में कुछ बड़ा करेक्शन नहीं आता है तो हमारा देश 5 ट्रिलियन इकोनॉमी वाला देश होगा। यह बात देश के प्रमुख अर्थशास्त्री एवं इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रोफेसर वीके मल्ह़ोत्रा ने ‘पत्रिका’ से चर्चा में कही। मल्ह़ोत्रा आईसीएसएसआर संस्था के सेकेट्री भी हैं। वे भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी में हुए इंडियन इकोनॉमिक एसोसिएशन के 104वें एनुअल कान्फरेंस में शामिल हुए। तीन दिन तक चले इस सम्मेलन में इंडस्ट्री, एग्रीकल्चर, इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ सहित शेयर बाजार, एक्सपोर्ट, पॉलिसी रिसर्च, बायो टेक्नोलॉजी, चुनौतियां जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। देश के अलग-अलग राज्यों से आए अर्थशास्त्रियों ने अपने विचार रखे।
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IMAGE CREDIT: patrika
एमपी में रोड कनेक्टिविटी बढ़ रही

मेहरोत्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सेंटर प्वाइंट है। यहां से हर प्रांत के माल का परिवहन होता है। देखा जा रहा है कि रोड़ कनेक्टिविटी बढ़ रही है। सड़कों का लगातार सुधार हो रहा है। चूंकि मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है। यहां अनाज की प्रचुर मात्रा में पैदावार होती है। इसलिए दूसरे राज्यों से टाइअप कर बदले में उनसे उन राज्यों की फल-फसलों या उद्योग आधारित सामानों का आदान-प्रदान बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए प्रदेश को वेयर हाउस हब बनाने की जरूरत है। ऐसा नहीं होने से लॉजिस्टिक का खर्च बढ़ता जा रहा है। मेहरोत्रा ने राज्य के संदर्भ में कहा कि एमपी में 45 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र को बढ़ाकर सरकार 65 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य को लेकर चल रही है। सरकार का यह विजन विकास को दर्शाता है।
डेटा में इम्प्रूवमेंट की जरूरत
आज जो सरकारी विभाग, संस्थाएं विभिन्न सेक्टरों के डेटा (आंकड़े) जारी करती हैं, उनमें गेप है। आंकड़ों के सहारे हम बात करते हैं और अनुमान लगाते हैं। ग्राउंड लेवल पर इसमें अंतर आ जाता है। कुछ संदर्भ में समझें तो डेटा गेप्स को खत्म किया जाना चाहिए। इसमें इम्प्रूवमेंट की जरूरत है।
आर्थिक विकास दर 8 से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी
देश को 5 ट्रिलियन की इकोनॉमी तक पहुंचाने की बात प्रधानमंत्री ने 2019 में कही थी। उस समय देश की अर्थव्यवस्था काफी नीचे थी। उसके बाद ग्रोथ 8-9 प्रतिशत पर आ गई। मेहरोत्रा ने कहा कि मेरा अनुमान है कि ग्रोथ दर 8 से 10 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। कोविड के दौर 7-7.50 प्रतिशत को छोड़ भी दें तो अगले साल तक 9 से 11 प्रतिशत तक आर्थिक विकास दर ग्रो कर सकती है।
निवेशकों को सलाह— शेयर बाजार में धैर्य से काम लें
शेयर बाजार में निवेशक शार्ट टर्म की नीयत से उतरते हैं या पैसा लगाते हैं, जो गलत है। रिटेल इन्वेस्टर्स भी कैपिटल मार्केट में पैसा बना सकते हैं लेकिन इसमें धैर्य की जरूरत है। रिटेल इन्वेस्टर्स की संख्या काफी बढ़ रही है लेकिन उन्हें एक्सपर्ट की सलाह लेकर ऐसी कंपनियों में पैसा लगाना चाहिए जो अच्छे ढंग से परफार्म कर रही हो। कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट, मैनेजमेंट भी इसके कारक हो सकते हैं। इकोनॉमिक सिक्योरिटी मानकर लान्ग टर्म इन्वेस्टमेंट होना चाहिए। इस समय इकोनॉमी में माइक्रो फंडामेंटल मजबूत बने हुए है।
कृषि में टेक्नीकल यूज बढ़ा : सतीश वर्मा
इंडियन इकोनॉमी एसोसिएशन के सदस्य एवं अर्थशास्त्री प्रोफेसर सतीश वर्मा का कहना है कि देश में कृषि के क्षेत्र में टेक्नीकल यूज बढ़ा है। इससे कृषि के क्षेत्र में ग्रोथ भी दिखाई दे रही है। पहले इंडस्ट्री में ग्रोथ दिखाई देती थी। उसके आंकड़े भी जारी होते थे लेकिन अब कृषि में भी ग्रोथ दिखाई देने लगी है। फार्मिंग सेक्टर में काफी बदलाव आया है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति से मल्टी क्रॉपिंग अच्छी पहल है।
मुख्यमंत्री के सुझाव पर अमल हो: अग्रवाल
प्रशासन एकेडमी में चले इंडियन इकोनॉमी एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने यहां देश के अर्थशास्त्रियों से प्रदेश के बजट में उनके सुझावों को शामिल करने की बात कहीं। इसे लेकर एनएएस के प्रेंसीपल प्रो. मनोज अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के सुझावों पर अमल होना चाहिए ताकि राज्य का बजट बनाते समय कोई कमी नहीं रह जाए।

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