Migrant Workers Story: कोरोना के कारण पांच माह से घर बैठे थे, अब रोजगार के लिए वापस लौटना जरूरी

कोरोना के लॉकडाउन के कारण काम धंधा छोड़कर अपने गांव चले गए थे लोग...।

By: Manish Gite

Published: 02 Sep 2020, 08:16 PM IST

 

भोपाल। पांच माह पहले रोजगार छोड़कर अपने गांव जाने वाले हजारों लोग अब धीरे-धीरे रोजगार पर लौटने लगे हैं। यह लोग बाइक, ऑटो, कारों और ट्रकों से वापस महाराष्ट्र के लिए निकल पड़े हैं। इसी प्रकार बड़ी संख्या में कामगार लोग फैक्ट्रियों से आ रहे बुलावे पर भी वापस लौट रहे हैं। भोपाल के बायपास से बड़ी संख्या में ऐसे कई लोग गुजर रहे हैं।

 

उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र लौट रहे इन प्रवासी श्रमिकों ने पत्रिका को अपनी आपबाती बताई। मुंबई में आटो चलाने वाले आशीष यादव भी मार्च के बाद लगे लॉकडाउन में सबकुछ छोड़कर इलाहाबाद चले गए थे। रविवार को तीन आटो में भरकर यह लोग भोपाल से गुजरे।

 

यादव ने बताया कि पांच माह घर बैठे-बैठे और खाना खाते-खाते थक गए। अब रोजी-रोटी तो मुंबई में ही मिलेगी। वहां ऑटो चलाएंगे तो दो पैसा कमाएंगे। मुंबई में अभी स्कूल बंद हैं, लेकिन बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस चल रही है, इसलिए परिवार को गांव में ही छोड़कर आए हैं। यादव कहते हैं कि पांच माह पहले लॉकडाउन दौर याद नहीं करना चाहते, लेकिन पांच माह पहले मध्यप्रदेश के लोगों ने जो मदद की वो हमेशा याद रहेगी। मध्यप्रदेश और यहां के लोग सबसे बेस्ट हैं।

 

इन्हीं के साथ भदौही से लौट रहे गणेशजीत यादव भी उन लोगों में से हैं जो मुबई में रिक्शा चलाते हैं। वे भी अपने साथियों के साथ ऑटो रिक्शे से ही मुंबई जा रहे हैं। वहां के हालात पर चिंता जताते हुए गणेशजीत कहते हैं कि परिवार को घर पर ही छोड़ना पड़ा क्योंकि वहां क्या स्थिति है पता नहीं, पैसा भी खत्म हो गया है, सभी का हिसाब भी चुकाना है। हमें तो दो पैसा कमाना पड़ेगा, कब तक घर में बैठे-बैठे खाते रहेंगे।

 

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बाइक से ही मुंबई वापसी

इलाहबाद से लौट रहे अरुण यादव इन आटो चालकों के साथ ही मोटरसाइकिल से मुंबई के लिए रवाना हुए हैं। वे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश की सरकार की तरफ से कोई व्यवस्था नहीं है कि हमें रोजगार मिले। सिर्फ राशन फ्री किया था, लेकिन राशन से जीवन कैसे चलेगा। हम घर बैठे-बैठे खाते रहेंगे तो कैसे काम चलेगा। कंस्ट्रक्शन कंपनी में पाइप फिटिंग का काम करने वाले अरुण यादव कहते हैं कि हमें वापस जाना ही पड़ेगा, क्योंकि हमारे राज्य में काम नहीं है। मुंबई में काम करेंगे तो आगे जिंदगी चला पाएंगे। अरुण भी कहते हैं कि जब यहां से अपने गांव जा रहे थे तो मध्यप्रदेश के लोगों ने और यहां की पुलिस ने बहुत मदद की। हर जगह खाने को देते थे और रास्ता भी सही बताते थे।

 

कारों से भी हुए लोग रवाना

इन आटो चालकों के अलावा सैकड़ों वाहनों में लोग महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों की तरफ लौट रहे हैं। लोग अब प्राइवेट टैक्सियों से भी वापस अपने रोजगार के लिए लौट रहे हैं। कई ट्रेनें नहीं चलने के कारण लोग अपने वाहन से लौट रहे हैं।

Manish Gite
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