scriptIndia's new 'Neeraj Chopra' | इंडिया का नया ‘नीरज चोपड़ा’- पिरानी से बैलों को हांकते सीखा और फेंकने लगे भाला | Patrika News

इंडिया का नया ‘नीरज चोपड़ा’- पिरानी से बैलों को हांकते सीखा और फेंकने लगे भाला

नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीत लिया. अब यह जुनूनी खिलाड़ी इंडिया के लिए खेलने की तैयारी करने में जुट गया है. न जेवलिन थे, न जूते, पर संसाधनों की कमी के बीच कुछ करने का है जुनून

 

भोपाल

Published: January 12, 2022 12:53:34 pm

मुकेश विश्वकर्मा भोपाल. उनके पास न तो जेवलिन थे और न ही ढंग के जूते. जंगल में बकरियां और गाय चराने जाते तो उनको हांकने की पिरानी लंबी दूरी तक फेंकते. ऐसे ही अभ्यास करते करते वे नेशनल गेम्स खेलने जा पहुंचे और उसमें स्वर्ण पदक भी जीत लिया. अब यह जुनूनी खिलाड़ी इंडिया के लिए खेलने की तैयारी करने में जुट गया है.
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हरदा के पास है रूनझुन गांव। यहां एक नीरज चोपड़ा तैयार हो रहा है जो बिना स्पाइक के 62 मीटर का भाला फेंकता है। हम बात कर रहे हैं 17 वर्षीय युवा गुलाब सिंह की, जो टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चौपड़ा को अपना रोल मॉडल मानते हैं। नीरज की फोटो को डीपी में लगाते हैं और फोटो को घर में सजाया है। वे उन्हीं की तरह भाला फेंकने की तैयारी कर रहे हैं।
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उन्होंने कमल युवा खेल महोत्सव में खिरकिया ब्लॉक, जिला लेवल पर स्वर्ण पदक जीते हैं। वे बताते हैं कि जब मैं आठवीं में था। तब टीचर दौलत सिंह वर्मा ने मुझे ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए विशाखापट्टनम ले गए थे। तब मैं लॉन्ग जंप और रनिंग करता था। वहां मैंने जेवलिन थ्रो करते एथलीटों को देखा। टीचर के कहने पर भाला फेंकने लगा। लेकिन तैयारी के लिए भाला नहीं था तो पिरानी से सडक़ में अभ्यास करते हैं।

17 वर्षीय गुलाब सिंह सडक़ पर भाला फेंकने का अभ्यास करते हैं। वे बताते हैं कि मैं अपने घर के पास जंगल में बकरियां और गाय चराता हूं। उनको हांकने के लिए पिरानी साथ लेकर जाता था। जिसे जंगल में लंबी दूरी तक फेंकता था। शुरुआत में 25 मीटर और 30 मीटर ही फेंक पाता था। फिर धीरे-धीरे 60 के ऊपर तक भेंकने लगा। जिस कारण मुझे 2018 में एसजीएफआई नेशनल गेम्स खेलने का मौका मिला और मैंने उसमें स्वर्ण पदक जीत लिया। अब इंडिया के लिए खेलने की तैयारी करना है।

टीचर ने स्पाइक लाकर दी: भाला फेंकने के लिए स्पाइक (शूज) जरूरी होते है। जिससे पैरों में ग्रिप मिलती है। लेकिन इनके पास स्पाइक नहीं थी। फिर टीचर ने स्पाइक लाकर दी। जिससे वे भाला फेंक में अपना बेस्ट दे रहे हैं। वे 12वीं कक्षा में पढ़ते हैं। हरदा डीएसवायडब्ल्यू में ट्रेनिंग ले रहे हैं।

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