BHOPAL में गूंजी 'तेजस' की गड़गड़ाहट, थंडर से भी तेज है ये फाइटर प्लेन

भारतीय सेना का लड़ाकू विमान 'तेजस' ने बुधवार को 12 बजे राजाभोज एयरपोर्ट पर लैंड किया। तेजस की गड़गड़ाहट से राजधानी गूंज गई। 


भोपाल। भारतीय सेना के लड़ाकू विमान 'तेजस' ने बुधवार को 12 बजे राजाभोज एयरपोर्ट पर लैंड किया। तेजस की गड़गड़ाहट से राजधानी गूंज गई। एक जुलाई को भारतीय सेना में शामिल हुआ यह विमान मिग-21 की जगह लेने वाला है।

यह बेहद हल्का विमान है और दुश्मनों को पछाड़ने में सक्षम है। यह चीन और पाकिस्तान के थंडर से भी तेज है। भोपाल में एक दिन रुकने के बाद तेजस लेह लद्दाख के लिए रवाना हो जाएगा।




tejas aircraft


तेजस बेंगलुरू एयरपोर्ट से उड़ान भरकर यहां पहुंचा है। इस एयरक्राफ्ट को भोपाल लेकर आये पायलट और ग्रुप कैप्टन राजीव ने बताया कि एक डोमेस्टिक एअरपोर्ट पर फाइटर प्लेन को लैंड कराना एक अलग ही अनुभव रहा। बताया जाता है कि तेजस विमान पिछले माह आने वाला था, लेकिन किसी कारण से यह उड़ान नहीं भर पाया। इसके पीछे कई बार मौसम में खराबी भी माना जा रहा है। इसके बाद एयरफोर्स ने इसे भोपाल भेजने का कार्यक्रम टाल दिया था। भोपाल एयरपोर्ट पर विशेषज्ञों की टीम विमान की जांच करेगी। फ्यूल भी भरा जाएगा। इसके बाद यह आगे की उड़ान भरेगा।




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एक जुलाई को ही फोर्स में शामिल हुआ है तेजस
1. इसे बनाने में 30 साल लग गए। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिडेट ने कड़ी मेहनत के बाद यह लड़ाकू विमान बनाया है।

2. तेजस का जेट इंजन अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक ने बनाया और इसके अलावा कई उपकरण अन्य देशों से लिए गए हैं।

3. तेजस की कीमत लगभग तीन करोड़ के आसपास है। जबकि  सुखोई की कीमत साढ़े तीन से चार करोड़ रुपए थे। यह बूढ़े हो चुके सुखोई की जगह लेगा।

4. चीन और पाकिस्तान ने मिलकर PAC जेफ-17 थंडर बनाया था। माना जाता है कि तेजस उसी का मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम है।

5. दो तेजस विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल कर लिया गया। विधिवत पूजा-पाठ किया गया। वायुसेना देश में ही विकसित इस हल्के लड़ाकू विमान (LCA) के पहले स्क्वाड्रन का गठन करेगी।

6. हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) पहले दो तेजस विमान भारतीय वायुसेना को सौंप रही है।

7. तेजस अगले साल वायुसेना की लड़ाकू योजना में नजर आएगा। इसे अग्रिम अड्डों पर भी तैनात किया जाएगा। तेजस के सभी स्क्वाड्रन में कुल 20 विमान शामिल किए जाएंगे जिसमें चार आरक्षित रहेंगे।

8. इस साल कुल 6 विमान तैयार करने का और अगले साल करीब आठ और विमान तैयार करने का विचार है।

9. यह वजन में बेहद हल्का है। इसके जरिए गोला-बारूद और बम इसे सटीक तरीके से निशाना साधने में सक्षम बनाते हैं।

10. देश में ही लड़ाकू विमान बनाने की अवधारणा 1970 के दशक में रखी थी, वहीं इस पर वास्तविक काम 80 के दशक में शुरू हो पाया और पहली उड़ान 4 जनवरी 2001 में भरी गई थी।
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Manish Gite
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