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बड़ा बदलाव: मेडिकल कॉलेजों में हिंदी में पढ़ाई के बाद अब ये ड्रेस कोड पहनेंगे डॉक्टर

- सभी मेडिकल कॉलेजों में एप्रेन और अन्य वस्त्र खादी में बनाने का सुझाव

- चिकित्सा का देशीकरण

भोपाल

Updated: June 09, 2022 09:14:00 am

भोपाल। चिकित्सा शिक्षा का देशीकरण अब एक कदम और आगे बढ़ गया है। हिंदी में किताब, शपथ के साथ महापुरुषों की जीवनी पढऩे के साथ ही मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर और छात्र अब खादी पहनेंगे। नेशनल मेडिकल कमीशन ने पत्र लिखकर देश के सभी मेडिकल कॉलेजों को यह सुझाव दिया है कि वह डॉक्टरों के एप्रेन से लेकर अस्पताल में उपयोग होने वाले बेडशीट और पर्दे तक खादी से तैयार करें। इसका दूसरा फायदा यह भी है कि खादी जहां ज्यादा सुविधाजनक है, वहीं मौसम के अनुसार पहनने में आरामदायक है।
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यह होगा फायदा
- मौसम के अनुकूल होती है, लगातार कई घंटों तक पहनने के बाद भी डॉक्टरों को असुविधा नहीं होगी
- खादी उद्योग को न सिर्फ बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार भी बढ़ेगा।

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग की पहल अच्छी है। इससे ग्रामीण और शहरी अंचलों में चल रहे खादी उद्योग को न सिर्फ बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार भी बढ़ेगा। खादी वस्त्र ईकोफ्रेंडली होते हैं, यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
- डॉ. राकेश पाण्डेय, राष्ट्रीय प्रवक्ता आयुर्वेद महासम्मेलन

यहां होगा उपयोग
स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड के पत्र के अनुसार सभी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, अस्पताल प्रबंधन में शामिल अन्य स्टाफ के एप्रेन के अलावा, मरीजों के इस्तेमाल में आने वाले गाउंस, बेड-शीट, पिलो कवर, एप्रेन, पर्दे के लिए खादी का उपयोग किया जा सकता है।

इसलिए बदलाव की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि यह अब वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि खादी से बने उत्पाद न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से बल्कि पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होते हैं। चूंकि डॉक्टरों को ड्यूटी के दौरान हर वक्त सफेद कोट पहनना अनिवार्य होता है, इसलिए उन्हें खादी से बने सफेद कोट का उपयोग करना चाहिए, जिससे उन्हें सर्दियों में गर्माहट और गर्मियों में ठंडक मिलती रहे। अगर कपड़े अनुकूल होंगे तो उनकी कार्य क्षमता में भी इजाफा होगा।

यह अच्छा सुझाव है। खादी पर्यावरण अनुकूल होने के साथ-साथ आरामदायक भी होती है। इसके उपयोग से डॉक्टर और अन्य चिकित्सा स्टाफ की कार्य क्षमता भी बेहतर होगी।
- डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी
सदस्य मध्य प्रदेश चिकित्सा प्रकोष्ठ

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