एक किस्सा: जानिए भोपाल में इंदिरा ने ऐसा क्या कहा था, जिससे हिल गई थी दिल्ली

भारत भवन की स्थापना दिवस के मौके पर प्रस्तुत है वो किस्सा जिसे आज भी आज भी याद किया जाता है...।

 

भोपाल। 38 साल पहले जब भोपाल में भारत भवन बनकर तैयार हुआ और उसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कर रही थी, तब प्रधानमंत्री के एक बयान से देश की राजनीति गर्मा गई थी और भोपाल से दिल्ली तक हलचल मच गई थी। जानिए इंदिरा गांधी ने भोपाल में ऐसा कौन-सा बयान दे दिया था, जिससे कई दिनों तक वे सुर्खियों में बनी रहीं। यह किस्सा आज भी याद किया जाता है।

 

13 फरवरी 1982 का दिन था। इसी दिन भोपाल के श्यामला हिल्स पर बनकर तैयार हुए भारत भवन का उद्घाटन करने के लिए देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आई हुई थी। तब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह थे। मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह मध्यप्रदेश को देश की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करना चाहते थे। उनके वीजन को लेकर ही भोपाल को देश की सांस्कृतिक राजधानी भो कहा जाने लगा था।

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डिजाइन देख हैरान हो गई थीं इंदिरा
भारत भवन का डिजाइन चार्ल्स कोरिया ने बनाया था। इसके उद्घाटन के मौके पर ही जब इसकी डिजाइन इंदिरा ने देखी तो वे हैरान रह गईं। भारत भवन को इस ढंग से बनाया गया था कि वो कभी भी एक इमारत जैसी न लगे। आज भी इसे देख हर कोई चौक जाता है। यह एक इमारत लगती है नहीं है। यह पहाड़ को काटकर अंडरग्राउंड बनाया गया है।

तो इंदिरा ने दिया था यह बयान
देश की विभिन्न कला-संस्कृति और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को एक ही जगह देख वे काफी प्रभावित हो गईं और उन्हें यह कहना पड़ गया कि 'जो दिल्ली में नहीं हो रहा है वो भोपाल में हो रहा है।'

इंदिरा की बातों से यह अनुमान लगाया गया कि वे चाहती थीं कि कला और संस्कृति का यह भवन दिल्ली में स्थापित हो। इसके बाद कई लोग इंदिरा गांधी के वक्तव्य से घबरा गए थे। तरह-तरह की बयान और सफाई दी जाने लगी। यह बात काफी दिनों तक सुर्खियों में रही।

 

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यह है संस्कृति और कला का मंदिर
-भोपाल शहर में बड़े तालाब किनारे है भारत भवन।
-इसकी स्थापना 1982 में हुई थी।
-इसे मुख्य रूप से प्रदर्शन कला और दृश्य कला का केंद्र माना जाता है।
-यह विभिन्न पारंपरिक शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण का यह प्रमुख केन्द्र है।
-भारत भवन चार्ल्स कोरेया द्वारा डिजाइन किया गया है।
-चार्ल्‍स का भारत भवन के बारे में कहना था कि यह पानी पर झुका हुआ एक पठार जहाँ से तालाब और ऐतिहासिक शहर दिखाई देता है।
-यहां अनेक रचनात्मक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
-भारत भवन में आर्ट गैलरी, इनडोर या आउटडोर ओडिटोरियम, रिहर्सल रूम, म्यूजियम ऑफ आर्ट, ललित कला संग्रह, भारतीय काव्य से भरा पुस्तकालय आदि कई चीज़ें शामिल हैं

 

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Manish Gite Desk/Reporting
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