scriptInfection rate reaching scary level in Bhopal reached 16.59, Anganwadi | भोपाल में डरावने स्तर पर पहुंच रही संक्रमण दर,16.59 पहुंची, स्कूल के बाद आंगनबाड़ी केंद्र बंद, दो लाख बच्चे आते हैं इनमें | Patrika News

भोपाल में डरावने स्तर पर पहुंच रही संक्रमण दर,16.59 पहुंची, स्कूल के बाद आंगनबाड़ी केंद्र बंद, दो लाख बच्चे आते हैं इनमें

- 2 से 14 साल तक के 330 बच्चे संक्रमित, बाकी इससे ऊपर के, जिले की 1872 आंगनबाडिय़ों में आते हैं 0 से 6 साल के करीब दो लाख बच्चे

भोपाल

Updated: January 15, 2022 09:41:39 pm

सुपर इंट्रो... संक्रमण दर और बढऩे से जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया है। जिले में 2 से 14 वर्ष के बच्चों के पॉजिटिव होने की संख्या 330 के लगभग पहुंच गई है। स्कूल बंद होने के बाद प्रशासन ने आंगनबाडिय़ों को अगले आदेश तक बंद कर दिया है। महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी योगेंद्र यादव ने बताया कि जिले में संचालित हो रहीं 1872 आंगनबाडिय़ों में से 1261 शहरी सीमा के अंदर हैं। इनमें 0 से 6 वर्ष तक के करीब दो लाख बच्चे पूरक पोषण आहार लेने आते हैं। आंगनबाडिय़ों में अभी तक किसी बच्चे के पॉजिटिव होने की रिपोर्ट नहीं आई है। लेकिन बढ़ती संक्रमण दर को देखते हुए ये फैसला किया है। आंगनबाड़ी केंद्र कार्यकर्ताओं के लिए खुलेंगे, बच्चों को पहले की व्यवस्था में रेडी टू ईट उपलब्ध कराया जाएगा। आपको बतादें कि शनिवार रात की रिपोर्ट में संक्रमण की दर 15 फीसदी को छू गई है।
इधर राहत से है कि वैक्सीनेशन का ही असर है कि तीसरी लहर में वायरस उतना असर नहीं दिखा रहा जितना दूसरी में था। 95 फीसदी मरीजों में न कोई लक्षण हैं न कोई कोविड सिम्टम्स। इसी का परिणाम है कि होम आइसोलेशन में रह रहे 3852 पॉजिटिवों में 95 फीसदी तो ऐसे हैं जिनको कोई लक्षण ही नहीं हैं। कोरोना कंट्रोल रूम से फोन करने पर इनमें से कई पांच-पांच बार फोन करने पर उठाते हैं। उठाकर बोलते हैं कि हमें परेशान मत करो। वहीं 175 के लगभग मरीज ऐसे हैं जो अस्पतालों में भर्तीं हैं, इनमें से किसी को न तो ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी न ही किसी प्रकार के इंजेक्शन की। इस बार तो सिटी स्कैन तक की जरूरत महसूस नहीं हो रही। जानकार बताते हैं कि भारत में कोई भी महामारी हो वह तीसरी लहर में कमजोर हो ही जाती है। इस बार अस्पताल खाली हैं और होम आइसोलेशन भरा हुआ है। कोरोना कंट्रोल रूम से लगातार फोन मरीजों को जाते हैं तो वो अब चिढऩे लगे हैं। डॉक्टर भी मानते हैं कि अब पहले जैसी मॉनीटरिंग की जरूरत नहीं रही। न तो मरीज को ऑक्सीजन की समस्या हो रही है, न पल्स रेट में कोई परेशानी। ऐसे में वे भी लगातार फोन से अब चिढऩे लगे हैं। लेकिन फोन करना उनके प्रोटोकॉल में शामिल है। ताकि मरीज की मॉनीटरिंग होती रहे। दवा किट की डिमांड भी कम
भोपाल में डरावने स्तर पर पहुंच रही संक्रमण दर,16.59 पहुंची, स्कूल के बाद आंगनबाड़ी केंद्र बंद, दो लाख बच्चे आते हैं इनमें
भोपाल में डरावने स्तर पर पहुंच रही संक्रमण दर,16.59 पहुंची, स्कूल के बाद आंगनबाड़ी केंद्र बंद, दो लाख बच्चे आते हैं इनमें
इस बार पॉजिटिव होने के बाद दवा किट की डिमांड भी उतनी नहीं आ रही। कहीं पहले से दवा किट दे भी दी जाती है तो उसका उपयोग मरीज नहीं कर रहे। क्योंकि उन्हें कोई लक्षण ही नहीं हैं तो दवा क्यों खाएं। अवधपुरी निवासी दौलत राम पॉजिटिव होने के बाद होम आइसोलेशन में रह रहे हैं। इनके पास दवा की किट पहुंची तो ये कहकर वापस कर दी कि जरूरत नहीं है ले जाओ। ऐसे एक नहीं कई लोग हैं जो दवा लेने से ही मना कर रहे हैं।
सात दिन में खुद खत्म हो रहा आइसोलेशन
इस बार कोविड गाइडलाइन में बदलाव के कारण सात दिन में खुद की होम आइसोलेशन हो जा रहा है। वैसे तो अधिकांश मरीज टेस्ट भी नहीं कराते। अगर किासी को लगता है कि उसे टेस्ट की जरूरत हो रही तो उसका सैंपल लिया जाता है। इसमें भी नब्बे फीसदी निगेटिव ही निकल रहे हैं। अब तक सात सौ के लगभग मरीज ठीक भी हो चुके हैं।

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