तो क्या सिमी को आर्थिक मदद पहुंचा रहा था बलराम

तो क्या सिमी को आर्थिक मदद पहुंचा रहा था बलराम
bhopal

Sumeet Pandey | Updated: 14 Feb 2017, 02:42:00 AM (IST) Bhopal, Madhya Pradesh, India

मध्यप्रदेश एटीएस इस सवाल का जवाब ढूंढ रही है।


भोपाल. क्या आईएसआई के जासूसों को धन पहुंचाने वाला सतना का बलराम सिंह, सिमी को भी आर्थिक मदद पहुंचा रहा था? मध्यप्रदेश एटीएस इस सवाल का जवाब ढूंढ रही है। इसके लिए बलराम से जब्त दस्तावेज, खातों की डिटेल और उसके प्रदेश में फैले नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है। एक उच्च अधिकारी ने बताया कि हम उन सभी बिंदुओं पर जांच कर रहे हैं जिनका संबंध आईएसआई से है। प्रदेश में सिमी का तगड़ा नेटवर्क है। इस कारण हो सकता है आईएसआई सिमी को आर्थिक मदद कर कोई बड़ी साजिश को अंजाम देना चाहती हो। बलराम ने कहां और किसे, कितनी राशि हवाला के माध्यम से पहुंचाई है उसकी जांच की जा रही है। हाल ही में केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने नक्सल प्रभावित राज्यों को अलर्ट किया था कि आईएसआई सिमी के माध्यम से नक्सलियों से संपर्क कर रहा है। कई राज्यों में आईएसआई यह काम कर भी चुकी है।
दूसरी ओर एटीएस ने दो निजी मोबाइल कंपनियों से जानकारी तलब की है। इन कंपनियों की सिम ही आरोपियों ने ज्यादातर उपयोग की है। आरोपी आपस में सूचनाओं के लिए वाट्सएप का उपयोग करते थे।

आज पेश होंगे आरोपी
एटीएस की रिमांड पर चल रहे आरोपी बलराम, ध्रुव सक्सेना, मोहित अग्रवाल, मनीष गांधी, मनोज भारती और संजीव गुप्ता को मंगलवार को अदालत में पेश किया जाएगा। उन्हें अदालत ने 14 फरवरी तक पुलिस रिमांड पर सौंपा था, जिसकी अवधि आज समाप्त हो रही है। सूत्र बताते हैं कि बलराम और ध्रुव की रिमांड बढ़ाने की मांग की जाएगी।

ईडी भी करेगी जांच
हवाला मामले में ईडी भी जांच करेगी। इस मामले की पड़ताल के बाद हवाला की राशि के बारे में एटीएस ईडी को पूरी जानकारी देगा, ताकि वह आगे की जांच कर सके। आरोपी बलराम हवाला का काम करता था, जिसमें ओर भी लोग आ रहे हैं। इनका आईएसआई से कोई संबंध सामने नहीं आया है।

एक सिम का करते थे तीन बार उपयोग
आईएसआई के सामानांतर टेलीफोन एक्सचेंज के माध्यम से जासूसी कर आरोपी एक सिम को तीन बार ही उपयोग करते थे। आरोपियों ने उपयोग की गई सिम का तक कंपनियों से साठगांठ कर उपयोग कर लिया था। सूत्र बताते हैं कि निजी कंपनियों की मदद से वह नई सिम के ग्राहक के उपयोग करने से पहले भी उसका तीन बार इस्तेमाल कर लेते थे। वह दोनों तरह की नई और पुरानी सिम भी उपयोग में ला रहे थे। बड़ी संख्या में उपयोग के बाद नष्ट भी कर चुके थे।

आतंकी से जुड़ते चले गए जांच के तार
भोपाल. आईएसआई के लिए काम करने वाले जासूसों का पूरा जाल अभी ध्वस्त नहीं हुआ है।  खुफिया एजेंसियों के अनुसार एक हैंडलर से जुड़े नेटवर्क  की पड़ताल करके उसे ही तोड़ा गया है, लेकिन एक नेटवर्क के अपराधी दूसरे से खुद अंजान रहते हैं, एेसे में दूसरे नेटवर्क को तोडऩे के उच्च स्तर से फिर कडि़यां जोड़ी जा रही है। देश में एेसे सैकड़ों गददार हैं, जिनका खुलासा किया जाना है।

पकड़े गए जासूसों तक पहुंचने का रास्ता एक पाकिस्तानी आतंकवादी के जिंदा पकड़े जाने के बाद हुआ। लगभग तीन माह पूर्व जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार हुए आतंकी से सख्त पूछताछ में मप्र में फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ है। खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का कहना है कि देश ही नहीं प्रदेश में भी स्लीपर सेल का बड़ा जाल है, लेकिन इस एक कार्रवाई से बाकी तक नहीं पहुंचा जा सकता। एटीएस के नए मिशन में दूसरे नेटवर्क का खुलासा दूसरे हैंडलर की गिरफ्तारी से हो सकता है, जिसके लिए जाल बिछाया जा रहा है।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned