करीब 150 साल पहले एक करोड़ का बना था यह महल,हाथियों से नापी थी छत की मजबूती

करीब 150 साल पहले एक करोड़ का बना था यह महल,हाथियों से नापी थी छत की मजबूती
jai vilas palace

400 कमरे हैं महल में,यहां के रॉयल दरबार हॉल की छत से 140 साल से साढ़े तीन टन का झूमर टंगा हुआ है, यह सुनने में ही नहीं देखने के बाद भी आज के जमाने में अजूबा ही लगता है। 


भोपाल। क्या आप किसी ऐसे महल के बारे में जानते हैं?, जो करीब 150 साल पहले बना हो। लेकिन उसकी रंगोरोगत आज भी ऐसी हो कि देखने वाले को ऐसा लगे, जैसे अभी कुछ ही समय पहले यह बना हो। 

करीब 150 साल पुराने 400 कमरों के साथ बना यह महल आज भी जहां एक ओर लोगों को आकर्षित करता है, वहीं यहां अभी भी इस महल का निर्माण कराने वाले राजवंश का परिवार निवास करता है। यह कोई आम महल नहीं है, करीब 150 साल पहले इसे बनाने का खर्च 1 करोड़ रुपए आया था।




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जी हां, हम बात कर रहे है सिंधिया राजघराने के ग्वालियर स्थित निवास जयविलास पैलेस की। इतना ही नहीं इस महल की मजबूती नापने के लिए उस समय करीब 10 हाथियों की मदद तक ली गई थी। दूर से देखने पर एक बार तो महल ऐसा लगता है मानो संगमरमर का बना हो।






कभी देश की सबसे बड़ी रियासतों में शुमार रही ग्वालियर रियासत के आखिरी शासक सिंधिया राजवंश की मौजूदा पीढ़ी यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनका परिवार जयविलास 1874 में बनाए गए इस पैलेस में रहता है । 

इस महल में 400 कमरे हैं। वहीं इमारत के 40 कमरों के एक हिस्से को अब म्यूजियम का रूप दे दिया गया है। जीवाजी राव सिंधिया म्यूजियम में सिंधिया राजवंश और ग्वालियर की ऐतिहासिक विरासत को सहेज कर रखा गया है। किसी हॉल में राजसी शान लाना हो तो छत पर झाड़-फानूस का होना जरूरी है। जयविलास पैलेस के रॉयल दरबार हॉल की छत से 140 साल से साढ़े तीन टन का झूमर टंगा हुआ है, यह सुनने में ही नहीं देखने के बाद भी आज के जमाने में अजूबा ही लगता है। ग्वालियर के जयविलास पैलेस के इस हॉल में ऐसे कई झाड़-फानूस जोड़े में टंगे हैं। दुनिया के सबसे बड़े झाड़-फानूसों में शुमार ये फानूस महाराजा जयाजी राव ने खासतौर पर बेल्जियम के कारीगरों से बनवाए थे।



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पैलेस की कुछ खास बातें...

>>    400 कमरे वाला यह महल पूरी तरह व्हाइट है और यह 12 लाख वर्ग फीट में बना है। 1874 में बनाया गए इस महल की उस वक्त 1 करोड़ रुपए कीमत थी।

>>    इस पैलेस में 400 कमरे हैं, जिनमें से 40 कमरों में अब म्यूजियम है।

>>    इसके डाइनिंग हॉल में चांदी की ट्रेन है, जो खाना परोसने के काम आती थी।

>>    इस पैलेस के अहम हिस्से दरबार हॉल की छत से 140 सालों से 3500 किलो का झूमर टंगा है।

>>    दुनिया के सबसे बड़ झूमरों में शामिल इस झूमर को बेल्जियम के कारीगरों ने बनाया था।





हाथियों से नापी थी मजबूती...

>>    इन झूमरों को छत पर टांगने से पहले इंजीनियरों ने छत पर 10 हाथी चढ़ाकर देखे थे कि छत वजन सह पाती है या नहीं।

>>    यह हाथी 7 दिनों तक छत की परख करते रहे थे, इसके बाद यह झूमर लगाया गया था।





प्रिंस एडवर्ड के स्वागत में बनवाया :

>>    सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव 8 साल की उम्र में ग्वालियर के महाराज बने थे। बड़े होने पर जब इंग्लैंड के शासक एडवर्ड-vii का भारत आना हुआ तो महाराज ने उन्हें ग्वालियर इनवाइट किया।

>>    उनके स्वागत के लिए ही उन्होंने जयविलास पैलेस को बनाने प्लानिंग की। इसके लिए फ्रांसीसी आर्किटेक्ट मिशेल फिलोस को अपोइंट किया। 




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महल की खासियत : 
>>    जयविलास पैलेस 1874 में बनाया गया था।

>>    400 कमरे वाला यह महल पूरी तरह व्हाइट है और यह 12 लाख वर्ग फीट में बना है।

>>    उस समय इसकी कीमत 1 करोड़ रुपए थी।

>>    इस पैलेस में 400 कमरे हैं, जिनमें से 40 कमरों में अब म्यूजियम है।

>>    12,40,771 वर्ग फीट में बना है जय विलास पैलेस। 



40 कमरे म्यूजियम :
महल के 40 कमरे म्यूजियम के तौर पर रखे गए हैं, जिसमें महल के अंदर की गैलरी, उस समय प्रचलित अस्त्र-शस्त्र, उस समय प्रयुक्त होने वाली डोली एवं बग्घी और कांच के पायों पर टिकी सीढिय़ों की रेलिंग म्यूजियम के रूप में दिखाई गई हैं। महल की ट्रस्टी ज्योतिरादित्य की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया हैं।

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