माता, पिता, गुरु के संस्कारों से ही बालक सच्चा श्रावक बनता है: आर्जव सागर महाराज

अशोका गार्डन जैन मंदिर में सिद्धचक्र महामंडल विधान: एक पाषाण प्रतिमा मंत्रों से संस्कार देने के बाद पूज्य हो जाती है, इसी तरह माता-पिता और गुरु द्वारा दिए जाने वाले संस्कारों से बालक सच्चा श्रावक, भक्त बन सकता है।

भोपाल. आप अपनी अस्मिता, मर्यादा तभी सुरक्षित रख पाएंगे जब अपने बच्चों के अंदर धर्म संस्कार के बीज रोपण कर पाएंगे। व्यसन, फैशन व भौतिक प्रगति में ही यदि उलझे रहे तो एक दिन मकड़ी के जाले की तरह उसमें स्वयं ही उलझ जाओगे। यह बात आचार्य आर्जव सागर महाराज ने अशोका गार्डन जैन मंदिर में चल रहे प्रवचन में कहीं। उन्होंने कहा कि जब एक पाषाण प्रतिमा मंत्रों से संस्कार देने के बाद पूज्य हो जाती है, इसी तरह माता-पिता और गुरु द्वारा दिए जाने वाले संस्कारों से बालक सच्चा श्रावक, भक्त बन सकता है।

जब माता-पिता खुद सुधरेंगे, व्यसनों का त्याग करेंगे, रोज मंदिर जाएंगे, संतों के प्रवचन सुनेंगे, स्वाध्याय व पूजा में शामिल होंगे, तभी तो वे अपने बच्चों को वैसे ही संस्कार दे पाएंगे। जब स्वयं का समर्पण, आस्था, विश्वास और श्रद्धा डगमगा गई, तभी तो जीवन अमर्यादित हो गया, इसलिए तो क्लेश व अशांति बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि केवल भौतिक ज्ञान, संपदा से कभी उन्नति नहीं होगी बल्कि आध्यात्मिक शिक्षा से ही मानवीय विकास ,इंसानियत उत्पन्न हो सकेगी। आचार्य आर्जव सागर महाराज ने इंद्र इंद्राणियों को संदेश देते हुए कहा कि श्रावकों को सुबह उठकर भक्ति से जिनेंद्र देव, निग्रंथ गुरु का दर्शन और वंदना कर धर्म श्रवण करना चाहिए। इसके बाद अन्य कार्य करने चाहिए।

विश्वशांति की भावना
चक्र महामंडल विधान में सुबह मंत्रोच्चार, अभिषेक के साथ विश्वशांति की भावना से शांतिधारा की गई। इस मौके पर इंद्र इंद्राणियों ने 256 अघ्र्य समर्पित किए गए। इस दौरान संगीतमय स्वलहरियां गूंज उठी। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

योगेंद्र Sen
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