scriptjawaharlal nehru cancer hospital | ट्रस्ट के नाम पर दवा कंपनियों से वसूला भारी डिस्काउंट, मरीजों को प्रिंट रेट पर देकर कमा रहे दोहरा मुनाफा | Patrika News

ट्रस्ट के नाम पर दवा कंपनियों से वसूला भारी डिस्काउंट, मरीजों को प्रिंट रेट पर देकर कमा रहे दोहरा मुनाफा

जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में फर्जीवाड़े का आरोप: सुप्रीम कोर्ट की मॉनीटरिंग कमेटी के सदस्य और गैस राहत संगठन ने की कमिश्नर गुलशन बामरा को शिकायत

भोपाल

Updated: May 29, 2022 01:30:59 am

भोपाल. गरीब कैंसर पीडि़त मरीजों को रियायती दरों पर इलाज मुहैया कराने के लिए शुरू किए गए जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल मरीजों से इलाज ही नहीं दवा के नाम पर भी मनमानी वसूली कर रहा है। अस्पताल मरीजों का हवाला देकर दवा कंपनियों से दवाओं पर भारी डिस्काउंट ले रहा है, लेकिन इसका फायदा मरीजों को देने की बजाय उन्हें प्रिंट रेट पर दवाएं बेची जा रही हैं। यही नहीं अस्पताल में ही नई कंपनी शुरू कर टैक्स चोरी और फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। यह खुलासा सुप्रीम कोर्ट द्वारा गैस राहत अस्पतालों की देखरेख के लिए तैयार की गई मॉनीटरिंग कमेटी के सदस्य और गैस राहत संगठनों द्वारा कमिश्नर और फर्म एंड सोसायटी डिपार्टमेंट को की गई एक शिकायत से हुआ है। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल के अधिकारी अपने फायदे के लिए मरीजों का हक मार आर्थिक गड़बड़ी कर रहे हैं।
ट्रस्ट के नाम पर दवा कंपनियों से वसूला भारी डिस्काउंट, मरीजों को प्रिंट रेट पर देकर कमा रहे दोहरा मुनाफा
अस्पताल परिसर में बनवाया जा रहा था मकान।
फर्जी कर्मचारियों के नाम पर लाखों का गबन

फर्म एंड सोसायटी को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाए गए हैं कि जवाहर लाल नेहरू अस्पताल प्रबंधन ने कर्मचारियों की नियुक्ति में भी भारी फर्जीवाड़ा किया है। ट्रस्ट में रिश्तेदारों को मोटे वेतन पर रखा गया। यही नहीं कई फर्जी तरीके से कर्मचारी पेरोल पर दिखाकर उनके वेतन का गबन कर लिया गया।
संस्था की जमीन पर मकान का निर्माण

गैस पीडि़तों के लिए काम करने वाली रचना ढींगरा ने बताया कि सरकार ने जमीन अस्पताल के लिए ही आवंटित की थी। लेकिन अस्पताल प्रांगण में अस्पताल की सीईओ दिव्या पाराशर के लिए करीब 80 लाख रुपए की लागत से मकान का निर्माण किया जा रहा था। हालांकि कर्मचारी यूनियन के विरोध के बाद फिलहाल इसका निर्माण रोक दिया गया है।
फर्जी कंपनी खोल की गई टैक्स चोरी

रचना ढींगरा का कहना है कि कंपनी की उच्चाधिकारी ने अपने बेटे के नाम से सेक्शन आठ (नॉन प्रॉफिट कंपनी, टैक्स के दायरे से बाहर) शुरू की। इस कंपनी के माध्यम से अस्पताल में उपयोग होने वाली दवाओं की खरीदारी की गई। छह महीने में ही करीब 20 करोड़ रुपए की दवाएं खरीदी गईं, इनमें से करीब आठ करोड़ रुपए का मुनाफा भी कमाया गया।
एक व्यक्ति ही चला रहा सोसायटी

शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल मप्र कैंसर चिकित्सा एवं सेवा समिति के नाम से एक सामाजिक संस्था के रूप में रजिस्टर्ड है। इसमें गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन और कमिश्नर भी सदस्य होते हैं, लेकिन सिर्फ सीईओ के आदेशानुसार होते हैं। जबकि सामाजिक संस्थान में सीईओ का पद नहीं हो सकता। यही नहीं समिति में भाई और बेटे को भी सदस्य बना कर अस्पताल में भारी वेतन दिया जा रहा है।
मरीजों को बेचते हैं प्रिंट रेट में

मॉनीटरिंग कमेटी के सदस्य पूर्णेंदु शुक्ल ने बताया कि अस्पताल में जाे दवाएं खरीदी जाती हैं उस पर अस्पताल को 40 फीसदी तक कमिशन डिस्काउंट मिलता है। नियमानुसार यह डिस्काउंट मरीजों को दिया जाना चाहिए, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीजों को प्रिंट रेट पर ही दवाएं दी जाती है। इस तरह अस्पताल प्रबंधन दोहरा मुनाफा कमा रहा है।
सीईओ ने नहीं दिया जवाब

आरोपों के संबंध में अस्पताल की सीईओ दिव्या पाराशर से लगातार बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने न तो फोन रिसीव किया न ही मैसेज का जवाब दिया।
जवाहर लाल नेहरू अस्पातल के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है। हमने शिकायत के साथ उनको शो कॉज नोटिस जारी किया है। सात दिन के अंदर उनको जवाब देना है।

एमजे कुरैशी, सहायक पंजीयक, फर्म्स एवं सोसायटी

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