जेपी एसोसिएट्स ने सरेंडर की कोयले की दो खदानें

साउथ और हिमांचल पावर प्रोजेक्ट बेचने के बाद कोयला खुले बाजार में बेचने की अनुमति चाह रहा था ग्रुप

By: Hitendra Sharma

Published: 08 Oct 2021, 11:28 AM IST

भोपाल. छिंदवाड़ा जिले के कोयले की दो खदानों को जेपी एसोसिएट्स ने सरेंडर कर दिया है। वह साउथ और हिमांचल पावर प्रोजेक्ट बेचने के बाद खदानों से निकलने वाले कोयले को खुले बाजार में बेचना चाह रहा था। जबकि, उसे ये खदानें उक्त दोनों पावर प्लांट के उपयोग के लिए आवंटित की गई थीं। पावर प्लांट बेचने से ग्रुप कोयले की खदानें चालू नहीं कर पाया।

केन्द्र ने प्रदेश की 5 कोल खदानें वर्ष 2015 में नीलाम की थी। इसमें से तीन खदानें जेपी एसोसिएट्स को आवंटित की गई थीं, जिनमें से दो में उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। ये खदानें छिंदवाड़ा जिले में हैं। तीसरी खदान 2015 में चालू की गई थी। यह सिंगरौली जिले में है। इस खदान का आवंटन पावर वेंचर के साथ किया गया है।

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केंद्र ने नहीं बदली शर्ते
दोनों खदानें साउथ पावर प्रोजेक्ट और हिमांचल पावर प्रोजेक्ट के लिए आवंटित की गई थीं। इन दोनों पावर पोजेक्टों को जेपी ग्रुप ने वर्ष २०१७ में बेच दिया था। इसके बाद जेपी एसोसिएट्स केन्द्र से कोल आवंटन शर्तों में जुड़वाना चाह रहा था कि इन खदानों का कोयला रीवा, सतना पावर प्र्रोजेक्ट को आवंटित हो या खुले बाजार में बेचने की अनुमति दें।

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पिछले तीन सालों के प्रयास के बाद भी केन्द्र सरकार के खनन एवं कोल मंत्रालय ने शर्तों को नहीं जोड़ा। इसके चलते जेपी एसोसिएट्स ने कोल खदानों को सरेंडर कर दिया है। इन खदानों की नए सिरे से नीलामी की जाएगी। वहीं एक अन्य घोड़ाडोंगरी की कोल खदान काफी समय पहले सरेंडर की जा चुकी है।

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करोड़ों का नुकसान
खदान सरेंडर करने से केंद्र व राज्य सरकार को करोड़ का नुकसान हुआ है। इन कोयला खदानों से लाखों टन कोयले का उत्पादन हर साल होता, जिससे सकरार को रायल्टी मिलती। पावर पोजेक्ट से बिजली का उत्पादन होता, जिससे बिजली की सप्लाई प्रदेश व बाहर होती, जिससे भी करोड़ों राजस्व मिलता। लाखों लोगों को इससे रोजगार भी मिलता।

Hitendra Sharma
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