scriptJourney from Luna to Mercedes, Range Rover, high speed bike in 40 year | 40 साल में लूना से मर्सिडीज, रेंज रोवर, हाईस्पीड बाइक तक का सफर, सड़कों पर रफ्तार लिमिट पुरानी, अब नए सिरे से तय करने की जरूरत | Patrika News

40 साल में लूना से मर्सिडीज, रेंज रोवर, हाईस्पीड बाइक तक का सफर, सड़कों पर रफ्तार लिमिट पुरानी, अब नए सिरे से तय करने की जरूरत

locationभोपालPublished: Dec 11, 2023 10:45:47 pm

- एनीसीआरबी, स्थानीय पुलिस के पिछले पांच साल के आंकड़े बता रहे शहर में हुए रोड एक्सीडेंट की भयावहता, 60 फीसदी में रफ्तार बनी वजह

- 20 साल में फर्श से अर्श तक पहुंच गई वाहनों की रफ्तार, आए दिन हादसों में यही वजह, कर्व पर कहीं कारें टकरा रहीं ताे कहीं डिवाइडर पर पलट रहीं

40 साल में लूना से मर्सिडीज, रेंज रोवर, हाईस्पीड बाइक तक का सफर, सड़कों पर रफ्तार लिमिट पुरानी, अब नए सिरे से तय करने की जरूरत
- एनीसीआरबी, स्थानीय पुलिस के पिछले पांच साल के आंकड़े बता रहे शहर में हुए रोड एक्सीडेंट की भयावहता, 60 फीसदी में रफ्तार बनी वजह
प्रवेंद्र तोमर. 40 साल में लूना से मर्सिडीज, रेंज रोवर, हाईस्पीड बाइक तक पर सफर शुरू हो गया, लेकिन शहर की सड़कों की रफ्तार में कोई बदलाव नहीं हुआ। बीस साल पुरानी तय रफ्तार ही सड़काें पर लागू है। किस सड़क पर कितनी रफ्तार है, उसके बोर्ड अब कहीं नजर नहीं आते। जनता को पता ही नहीं चलता शहर की प्रमुख सड़कों पर रफ्तार की क्या स्थिति है। इसके उलट कई जगह कट सड़कों पर कट, सर्विस रोड, पुल तक उतर गए, इससे कहीं से भी वाहनों की एंट्री होती है। इन कारणों से शहर में एक्सीडेंट तेजी से बढ़े हैं, तेज रफ्तार वाहन एक्सीलेटर पर पैर रखते ही भागते हैं, ऐसे में सड़कों पर बने कट, कर्व से कहीं न कहीं कार डिवाइडर पर चढ़ी दिखती है, कई बार तो सड़कों पर कारें पलट भी चुकी हैं। ऐसे में अब नए सिरे से सड़कों का सर्वे कर वाहनों के रफ्तार की लिमिट तय करना जरूरी हो गया है।
वर्ष 2019 में नर्मदापुरम रोड पर मिसरोद से लेकर एमप्री तक सड़क की रफ्तार तय करने का प्रस्ताव सामने आया था। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इस पर सहमति बन गई, तत्कालीन कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने इस पर सहमति दी, लेकिन इसका क्या हुआ किसी को नहीं पता। नर्मदापुरम रोड पर बोर्ड तक नहीं लगे, अन्य सड़कों की तरह इस सड़क की रफ्तार साठ किमी ही मानकर चल रहे हैं।
लिंक रोड नंबर एक, दो, तीन: वर्षों पूर्व इस सड़क पर 60 किमी की रफ्तार तय की, लेकिन बोर्ड कहीं भी नजर नहीं आता, कुछ समय पूर्व एक बोर्ड था, लेकिन वह भी अब नहीं दिखता। वर्तमान में यहां 80 से 90 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से वाहन दौड़ते हैं।वीआइपी रोड: इस रोड की लिमिट 50 किमी तय की थी, क्योंकि इस पर कर्व हैं, लेकिन तेज रफ्तार वाहन यहां 70 से 80 की स्पीड से दौड़ते हैं। कई बार कर्व पर पलटने से बचते हैं।
भोपाल में 62 प्रमुख सड़कें हैं

शहर और आस-पास 62 प्रमुख सड़कें हैं, आईटीएमएस के तहत अभी 17 स्थानों पर स्पीड-डिटेक्शन कैमरे लगाए गए हैं। लेकिन रफ्तार पर चालान न के बराबर ही बनते हैं। वीआईपी रोड पर दो स्थान और लिंक रोड 1, 2 और 3 पर, नर्मदापुरम रोड, नई जेल रोड और करोंद को छोड़ दें तो इनमें से कई के कैमरे भी प्रॉपर काम नहीं करते। स्पीड डिटेक्शन कैमरे सिर्फ दिखावे के साबित हो रहे हैं।
एक्सपर्ट: नए सिरे से सर्वे कर स्पीड तय करने की जरूरत-एक्सपर्ट, सिद्धार्थ रोकड़ेमैनिट के एक्सपर्ट का कहना है कि शहर में जब सड़कों की रफ्तार तय की गई थी, उस समय से वाहनों की संख्या, आबादी, कट, तिराहों और चौराहों तक में बदलाव हुआ है। कई नई सड़कें भी बढ़ी हैं, वाहनों की रफ्तार में इजाफा हुआ है, हाल ही में रोड एक्सीडेंट इन इंडिया की रिपोर्ट में ही देखें तो शहर और हाइवे पर हादसों की संख्या बढ़ी है, ऐसे में सड़कों के रफ्तार की लिमिट का सर्वे कर नए सिरे से इन्हें तय करना चाहिए, कहां एक्सीडेंट ज्यादा हो रहे हैं। उनके कारणों को भी लिमिट तय करते समय ध्यान में रखने की जरूरत है।
वर्जनसड़कों के रफ्तार की लिमिट को लेकर जनप्रतिनिधियों, अफसरों के साथ चर्चा की जाएगी। जरूरत अनुसार नए सिरे से सर्वे भी कराएंगे। सड़क सुरक्षा समिति में इस प्रस्ताव को शामिल कराएंगे।

आशीष सिंह, कलेक्टर------------------
रोड एक्सीडेंट

पिछले 5 साल में सड़क दुर्घटनाएं

2018 31952019 2615

2020 16542021 1967

2022 25662023 3567

पिछले 5 साल में मृतकों की संख्या2018 269

2019 1482020 123
2021 126

2022 1742023 197

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