scriptJP District Hospital Bhopal Blood Separator News | सावधान! एक मरीज को चढ़ाया जा रहा है तीन के काम आने वाला खून | Patrika News

सावधान! एक मरीज को चढ़ाया जा रहा है तीन के काम आने वाला खून

डेंगू मलेरिया के दौरान प्लेटलेट्स की होती है जरूरत, आ सकती है परेशानी

 

भोपाल

Updated: September 09, 2022 03:08:31 pm

भोपाल. एक यूनिट ब्लड तीन लोगों के काम आ सकता है लेकिन ब्लड सेपरेटर नहीं होने से राजधानी के जिला जेपी जिला अस्पताल में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। यहां के ब्लड बैंक में ये सुविधा ही नहीं है। इसके जरिए पीआरबीसी एफएसपी प्लाज्मा आरडीपी को अलग किया जाता है। अभी ये हमीदिया पर निर्भर है। डेंगू मलेरिया के दौरान प्लेटलेट्स की कमी होती है। मरीजों की जान बचाने खून से इन्हें अलग निकाला जाता है। राजधानी के सभी अस्पतालों में इसकी व्यवस्था नहीं है।
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बीएमएचआरसी हमीदिया और एम्स में ही ये काम कर रही हैं. बाकी सरकारी अस्पतालों में सुविधा नहीं है। कोरोना काल के दौरान प्लाज्मा को अलग करने के मामले में काफी दिक्कत आई थी। इसे बढ़ाने पर जोर तो दिया गया लेकिन खरीदी नहीं हो पाई। जेपी में मरीजों को प्लेटलेट््स या खून के दूसरे कंपोनेट्स की जरूरत पडऩे पर दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।
आठ से 12 हजार रुपए तक की है किट
बताया गया कि प्लेटलेट्स की जरूरत होने पर एक किट का इस्तेमाल किया जाता है। कई अस्पतालों में ये किट आठ हजार से 12 हजार के बीच है। निजी अस्पतालों में इसके नाम पर मनमानी वसूली के कई मामले सामने आ चुके हैं।
सेंट्रल लैब के बाद होगी व्यवस्था
जेपी अस्पताल में सेंट्रल लैब का गठन किया जाना है। इसका प्रस्ताव है। जिम्मेदारों ने बताया कि ये लैब बनने के बाद यहां पर सुविधाएं बेहतर होंगी। अभी हमीदिया अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ता है।
मच्छर बढऩे के साथ बीमारियों का खतरा, आएगी दिक्कत
बारिश बंद होते ही मच्छरों की संख्या बढ़ रही है। इसके साथ इनसे होने वाली बीमारियां भी बढ़ेंगी। इनमें डेंगू सबसे खतरनाक है। इसमें मरीजों के खून में तेजी से प्लेटलेट्स की संख्या कम होती है। इसे समय पर मुहैया न कराया जाए तो मौत भी हो सकती है। इसी दौरान ब्लड सेपरेटर की जरूरत होती है।
हमीदिया के ब्लड बैंक इंचार्ज उमेन्द्र शर्मा के अनुसार हमीदिया अस्पताल में दो मशीनें हैं। खून से एसडीपी और आरडीपी कई मरीजों को चढ़ाया जाता है। जेपी में कंपोनेट अलग करने की मशीन नहीं है।
जीवन सार्थक ब्लड बैंक के शैलेन्द्र दुबे बताते हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने वालों की संख्या राजधानी में कम है। वर्तमान में हमारे पास ऐसे 125 लोग एक्टिव हैं। ऐसी स्थिति में कई बार दिक्कत आती है।

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