निरीक्षण करने पहुंचे थे तहसीलदार, डॉक्टरों के इंतजार में खड़े रहे मरीज, व्यवस्था देख बोले- सब ठीक है

हसीलदार जब निरीक्षण कर रहे थे तब वहां मरीज लंबी कतार में डॉक्टरों का इंतजार कर रहे थे। दवा लेने के लिए भी लंबी लाइन थी, इसके बावजूद अधिकारियों को अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखीं।

By: KRISHNAKANT SHUKLA

Published: 05 Sep 2019, 12:51 PM IST

भोपाल. जिला कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदारों की टीम ने बुधवार को जेपी अस्पताल का निरीक्षण किया। तहसीलदार तय समय सुबह 9 बजे जेपी अस्पताल पहुंच गए, लेकिन डॉक्टर नहीं मिले। तहसीलदार जब निरीक्षण कर रहे थे तब वहां मरीज लंबी कतार में डॉक्टरों का इंतजार कर रहे थे। दवा लेने के लिए भी लंबी लाइन थी, इसके बावजूद अधिकारियों को अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त दिखीं। सुबह की पाली में गए अधिकारी को सिर्फ बाथरूम में गंदगी मिली तो शाम को गए अधिकारी को वार्डों में सीलन।

 

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कोलार तहसीलदार संतोष मुदगल सुबह नौ बजे जेपी अस्पताल पहुंचे तो अस्पताल के आरएमओ उन्हें पीडियाट्रिक वार्ड में ले गए। इसके बाद वे वहां से सिविल सर्जन कक्ष की और निकल गए। रास्ते में उन्होनें बाथरूम में गदंगी देख साफ सफाई करने को कहा। शाम करीब तीन बजे हुजूर तहसीलदार चंद्रशेखर श्रीवास्तव जेपी पहुंचे। वे सीधे वार्ड में व्यवस्थाएं जानने चले गए। यहां बारिश का पानी खिड़कियों से अंदर आ रहा था और दीवारों पर भी सीलन थी। दोनों ने संतुष्टि जाहिर की।

 

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मरीज सुबह आठ बजे से कतार में, डॉक्टर नदारद

मेडिकल विशेषज्ञ डॉ. राकेश श्रीवास्तव के केबिन के बाहर एक दर्जन से अधिक मरीज कतार में खड़े हुए थे। इन्हे 11 बजे तक इलाज नसीब नहीं हुआ क्योंकि डॉक्टर साहब केबिन में मौजूद नहीं थे। इसी तरह ईएनटी विभाग के डॉक्टर अशोक कुमार बांठिया भी बाहर नजर आए। यहां भी दो दर्जन से अधिक मरीज लाइन में खड़े हुए थे, डॉक्टर साहब नदारद रहे।

 

 

कलेक्टर ने मांगी अस्पतालों की रिपोर्ट

भोपाल. राजधानी के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और स्टाफ की जांच को लेकर गठित की गईं टीमों से कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने रिपोर्ट तलब की है। कुछ दिन पूर्व बैरागढ़ सिविल अस्पताल का निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को लापरवाही मिली तो उन्होंने जेपी, हमीदिया और अन्य सरकारी डिस्पेंसरी की जांच के लिए टीमों का गठन किया। इस जांच के पीछे उनकी मंशा ये है कि अस्पतालों में मरीजों को इलाज मिल रहा है डॉक्टर समय से आते हैं या नहीं। काउंटर पर पर्चे की व्यवस्था है इसकी रिपोर्ट बनाकर वे शासन के पास भेजेंगे।

 

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जो काम नहीं करना चाहते उनके रिटायरमेंट का प्रस्ताव भेजें

भोपाल. राजधानी में फंदा और तूमड़ा के प्रसव केंद्रों पर डॉक्टरों मौजूद नहीं रहते, अक्सर गायब रहते हैं। दाइयां डिलेवरी कराती हैं। कलेक्टर तरुण पिथोड़े भी इन दो केंद्रों की व्यवस्था देखकर काफी हैरान रह गए। उन्होंने बुधवार को कलेक्टोरेट में डॉक्टरों की बैठक बुलाकर साफ निर्देश दिए कि जो डॉक्टर काम नहीं करना चाहते और उनकी उम्र 50 साल और नौकरी 20 साल की हो चुकी हैं सीएमएचओ ऐसे डॉक्टरों के रिटायरमेंट का प्रस्ताव बनाकर उनके पास भेजें।

 

यह हैं सबसे बड़ी समस्याएं

लंबी लंबी कतारें: मरीजों को ओपीडी पर्चा बनवाने से लेकर इलाज और जांच हर जगह लंबी कतारों का सामना करना पड़ता है। एक व्यक्ति तीन से चार घंटे का समय लगता है।

पुरानी तकनीक की लैब: अस्पताल में अब भी कई जांचे हाथ से की जाती है, जिसमें गलती संभव है। इसे जल्द से जल्द फुली ऑटोमेटिक होना चाहिए। डॉक्टरों की कमी: जेपी अस्पताल में व्यवस्थाएं तो हैं लेकिन चिकित्सक नहीं हैं। ईएनटी सहित कई ऐसे विभाग हैं जिसमें एक ही विशेषज्ञ है, लिहाजा मरीजों को सिर्फ तीन दिन ही इलाज मिलता है।

 

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साफ सफाई की कमी: अस्पताल में साफ सफाई की भी खासी कमी है। यहां बाथरूम से लेकर वार्ड और गलियारों में गंदगी देखी जा सकती है।

गंभीर मरीजों को इलाज नहीं : सबसे बड़ी कमी अस्पताल में गंभीर मरीजों के लिए इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। घायलों या अन्य गंभीर मरीजों को तत्काल रैफर किया जाता है, कई बार रास्ते में मरीज की मौत हो चुकी है।

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