जूडा की हड़ताल से 70 ऑपरेशन टले

चरमराई व्यवस्था: हमीदिया और सुल्तानिया अस्पताल में इलाज के लिए भटकते रहे मरीज

By: Rohit verma

Published: 24 Jul 2018, 07:40 AM IST

भोपाल. मंडीदीप में ऑटो पलटने से गंभीर रूप से घायल 15 साल का हिमांशु ओपीडी में दर्द से तड़पता रहा। कभी मां की गोद में सर रखकर रोता रहा तो कभी बहन का हाथ पकडकऱ। बेटे को दर्द से बिलखता देख पिता इलाज की गुहार लगाते रहे। डॉक्टर एक से दूसरे डिपार्टमेंट भेजते रहे।

मेडिसिन ओपीडी में गुना से आई 16 साल की माया दिमाग की नस फटने से जमीन पर तड़पती रही। उसे देखने कोई तैयार नहीं था। कोई मेडिसिन विभाग तो कोई मानसिक रोग विभाग में जाने को कह रहा था।

सोमवार को हमीदिया अस्पताल में जूनियर डॉक्टर और टेक्निकल स्टाफ के हड़ताल पर होने से व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं। न मरीज भर्ती किए गए न ही ऑपरेशन हो पाए। इससे हमीदिया और सुल्तानिया में 70 से ज्यादा ऑपरेशन टाल दिए। सरकार ने दोपहर 2:30 बजे एस्मा (एसेंशियल सर्विसेस मेंटेनेंस एक्ट) लागू कर दिया। खबर लिखे जाने तक जूडा काम पर नहीं लौटे थे।

दोपहर दो बजे मरीजों को दूसरी मंजिल पर ले जा रही लिफ्ट अचानक खराब हो गई। लिफ्ट अटकने से मरीजों में अफरा तफरी मच गई। करीब आधे घंटे बाद टेक्निशियन आए और लिफ्ट को ठीक किया। गनीमत रही कि मरीजों को कोई नुकसान नहीं हुआ।

 

कंसल्टेंट ने संभाली ओपीडी तो ओटी बंद
जूडा के काम ना करने पर कंसल्टेंट ने ओपीडी संभाली। सुल्तानिया व हमीदिया में 70 से ज्यादा ऑपरेशन टल गए। हमीदिया में हर रोज 35-40 ऑपरेशन होते हैं। सोमवार को पांच हुए। सुल्तानिया में भी 40 की जगह 4 डिलेवरी हुई। बाकी मरीजों को लौटा दिया।

यह रही स्थिति...
हमीदिया अस्पताल
ओपीडी 1678
आइपीडी 74
ऑपरेशन 5
सुल्तानिया अस्पताल
ओपीडी 159
आइपीडी 11
ऑपरेशन 4
डिलेवरी 5

स्टायपेंड बढ़ाने व 7वें वेतनमान की मांग...
जूनियर डॉक्टर स्टायपेंड बढ़ाने, तो स्वशासी कर्मचारी समयमान वेतनमान के लिए हड़ताल पर रहे। जूडा अध्यक्ष डॉ. संजय यादव का कहना है, दूसरे राज्यों के मुकाबले उन्हें काफी कम स्टायपेंड दिया जाता है। अस्पताल में डॉक्टरों की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है।

अनट्रेंड के भरोसे व्यवस्था
जूडा की हड़ताल को देखते हुए जीएमसी प्रबंधन ने अस्पताल में काम कर रही यूडीएफ कंपनी को व्यवस्थाएं संभालने का जिम्मा दिया। कंपनी ने अनट्रेंड कर्मचारियों से एक्स-रे कराने के साथ ही मरीजों को इंजेक्शन लगाने व दवाएं देने का काम नर्सिंग स्टूडेंट्स को सौंपा था।

दूसरी जगह किया रैफर
कहने को तो सुल्तानिया अस्पताल रैफरल अस्पताल है। सोमवार को यहां से मरीजों को रैफर किया गया। यहां आए मरीजों को जेपी अस्पताल और इंदिरा गांधी अस्पताल में रैफर किया गया। हड़ताल के मद्देनजर यहां सिर्फ 11 महिलाओं को ही भर्ती किया गया।

Rohit verma Desk
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