जापानी तकनीक से एक साल में खड़ा कर दिया जंगल

जापानी तकनीक से एक साल में खड़ा कर दिया जंगल

hitesh sharma | Publish: Jun, 19 2019 03:34:31 PM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

वाल्मी के नवाचार से तैयार हो गया जंगल

भोपाल। पर्यावरण प्रदूषण की वजह से हर किसी को मुश्किल उठानी पड़ती है, लेकिन इसके बारे में सोचने वाले लोग कम ही हैं। कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो पर्यावरण और प्रकृति को बचाने के लिए अपना सबकुछ लगा देते हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो बड़ी खामोशी और शिद्दत से प्रकृति को नवजीवन देने में लगे हुए हैं। इसका ताजा उदाहरण है जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी) परिसर में काम कर रहे लोग। कर्मचारियों ने पिछले एक वर्ष में खाली और बंजर पड़ी जमीन को अपने जुनून से पूरी तरह से हराभरा कर दिया है। यह प्लांटेशन का काम जापान की ए फॉर स्टेशन टेक्निक जिसे मियांवाकी कहा जाता है उस तकनीक के आधार पर किया है।

इस तकनीक की खासियत है कि इसमें पौधे महज कुछ माह में ही बड़ा आकार ले लेते है।वाल्मी की संचालक उर्मिला शुक्ला ने बताया कि जब मैंने इस खाली और बेगार पड़ी जमीन को देखा, तो मेरे मन में ख्याल आया कि क्यों न इस जमीन का उपयोग करने के उद्देश्य से यहां पर औषधीय पौधे लगाए जाए। उसी दौरान मैंने इस जमीन का रिसर्च करवाया और पाया कि इस जमीन पर औषधीय और वन्य प्रजातियों के पौधे लगाए जा सकते है।

उसके बाद हमने 6 अलग-अलग स्ट्रिप्स में 42 प्रजातियों के पौधे लगाए। इन पौधों को चार अलग-अलग भागों में डिवाइड किया। पहला ऐसे पौधे जो जिनकी ऊंचाई सबसे ज्यादा हो। दूसरे वो पौधे जो अपर ट्री यानी आम, गुलमोहर, पलाश आदि। तीसरे ऐसे पेड़ जो सामान्य है और इनकी ऊंचाई अन्य पेड़ो की तुलना में कम हो, चौथा झाडियों वाले पौधे जो देखने में सुंदर लगे और आदि को लगाया गया।

खुद से तैयार की खाद का किया उपयोग
वाल्मी के टेक्निकल अस्सिटेंट सुनील दत्त चौधरी ने बताया कि खाली और बेगार पड़ी इस जमीन पर अगस्त 2018 में बैंगलोर की एक कंपनी ने जापान की इस तकनीक का उपयोग कर पेड़ लगाए थे। उस दौरान 20 अलग-अलग तरह की प्रजातियों के पौधे 125 स्क्वायरफीट की जगह पर लगाए गए। जिसकी लागत 5 लाख 40 हजार रूपए थी। इस तकनीक में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है स्वाइल प्रिपरेशन। इस स्वाइल में किसी भी प्रकार के फर्टीलाइजर या कैमिकल का उपयोग नहीं होता है।

इसे पूरी तरह से ऑर्गनिक मैकेनिज्म से तैयार किया जाता है। जहां तक बात स्वाइल की है तो यह स्वाइल गन्ना वेस्ट, धानभूसा, गोबर खाद गौ मूत्र, आदि से मिलाकर तैयार किया जाता है। इन पौधो को लगाने के लिए वाल्मी परिसर में स्थापित वर्मी कम्पोस्ट यूनिट से तैयार खाद्य का इस्तेमाल किया जाता है। यह खाद परिसर के अंदर फैली सूखी पत्तियां, कचरा सहित हॉस्टल में बचा हुआ खाना आदि को कम्पोस्ट कर तैयार की जाती है।

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