दिग्विजय सिंह को भी चुकानी पड़ सकती है सिंधिया के बगावत की कीमत, छिन सकती है राज्यसभा सीट

पूर्व मंत्री ने कहा- दिग्विजय सिंह की जगह फूल सिंह बरैया को पहली वरीयता का उम्मीदवार घोषित किया जाना चाहिए।

भोपाल. ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावत के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर गई। कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन सिंधिया की बगावत का असर अब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भी चुकानी पड़ सकती है। दरअसल, कांग्रेस के एक खेमे ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्यसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह को कांग्रेस ने पहली वरीयता का उम्मीदवार घोषित किया है जबकि फूल सिंह बरैया को दूसरी वरीयता का उम्मीदवार बनाया है। इससे कांग्रेस के कई नेता नाराज हैं और पूर्व मंत्री ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को लेटर लिखकर कहा है कि दिग्विजय सिंह की जगह फूल सिंह बरैया को पहली वरीयता का उम्मीदवार घोषित किया जाना चाहिए।

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राज्यसभा चुनाव स्थागित
कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण राज्यसभा चुनाव स्थागित कर दिए गए हैं। मध्यप्रदेश की तीन सीटें खाली हो रही हैं। 9 अप्रैल को दिग्विजय सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है। कांग्रेस ने उन्हें एक बार फिर से राज्यसभा का टिकट दिया है। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री रहे अखंड प्रताप सिंह ने दिग्विजय सिंह के नाम का विरोध करते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को एक लेटर लिखा है।

सिंधिया के बगावत के बाद बिगड़ा समीकरण
मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावत के बाद समीकरण बिगड़ गया है। कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे से पहले राज्यसभा की दो सीटें कांग्रेस को मिल रही थीं जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जा रही थी लेकिन अब समीकरण बदल गया है। 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद भाजपा के खाते में 2 सीटें जबकि कांग्रेस के खाते में एक सीट जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस की तरफ से दिग्विजय सिंह का राज्यसभा जाना तय माना जा रहा था लेकिन अब कांग्रेस में ही दिग्विजय सिंह के नाम का विरोध हो रहा है।

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उपचुनाव को देखते हुए लिखा लेटर
पूर्व मंत्री अखंड प्रताप सिंह ने लेटर लिखकर कहा है कि मध्यप्रदेश की 24 सीटों पर उपचुनाव होना है। जिन सीटों में उपचुनाव होना है वो ज्यादातर ग्वालियर-चंबल की सीट हैं लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के कारण ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस के पास बड़े चेहरे का आभाव है। जबकि जिन 24 सीटों में उपचुनाव होना है उसमें से करीब 10 सीटें रिजर्व हैं ऐसे में आदिवासी अनुसूचित जाति और आदिवासी समुदाय को साधने के लिए फूल सिंह बरैया को राज्यसभा जाना चाहिए जिसका सियासी फायदा मिल सकता है। कांग्रेस में दिग्विजय सिंह के विरोधी गुट ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को इस बात का संदेश दिया है कि फूल सिंह बरैया को पार्टी अगर प्रथम वरियता देती है तो इससे अनुसूचित जाति और आदिवासी समुदाय के वोटर्स प्रभावित होंगे और खुद फूल सिंह बरैया ग्वालियर-चंबल से संबंध रखते हैं जिससे उपचुनाव में फायदा हो सकता है।

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दलित के बहाने दिग्विजय पर निशाना
कांग्रेस के जिन 22 विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उनमें ज्यादातर सिंधिया के गढ़ ग्वालियर-चंबल संभाग क्षेत्र के हैं। फूल सिंह बरैया भी इसी चंबल इलाके से हैं और दलित समुदाय से आते हैं। चंबल क्षेत्र दलित बहुल माना जाता है। ऐसे में मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एक लॉबी पार्टी हाईकमान को उपचुनाव में दलित और आदिवासियों को वोट के गणित का फायदा बताते हुए भूल सिंह बरैया को राज्यसभा में भेजने की योजना बना रही है।

सिंधिया की जीत तय
राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को उम्मीदवार बनाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की जीत तय है। क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के पहली वरीयता के उम्मीदवार है। वहीं, कांग्रेस से दिग्विजय सिंह की जीत तय मानी जा रही है। अब दोनों नेता राज्यसभा में दिखाई देंगे। ये पहला मौका होगा जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह एक ही सदन में बैठेंगे।

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क्या है राज्यसभा का गणित
230 सदस्यों वाली विधानसभा की 24 सीटें खाली हैं। ऐसे में विधायकों की संख्या 206 हो गई है। अह राज्यसभा चुनाव के एक उम्मीदवार के लिए 52 विधायक वोट करेंगे। भाजपा के पास विधायकों की संख्या 107 है जबकि कांग्रेस के पास केवल 92 विधायक हैं ऐसी स्थिति में कांग्रेस के खाते में एक सीट जा सकती है जबकि भाजपा को दो सीटों पर जीत मिल सकती है।

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