ज्योतिरादित्य सिंधिया सीएम पद की रेस से हुए 'OUT', उनके गुट के मंत्री ने ही इन्हें बताया अगला CM

मंत्री महेंद्र सिंय सिसौदिया के बयान के निकाले जा रहे हैं सियासी मायने, क्या ये कांग्रेस की गुटबाजी और अंतर्कलह का नया स्वरुप है


भोपाल/ मध्यप्रदेश के श्रममंत्री ने एक अनोखी भविष्यवाणी की है। मंत्री महेन्द्र सिसौदिया ने गुना में कहा कि 10-15 साल बाद तुलसी सिलावट मुख्यमंत्री बनेंगे। अब ये बयान आया तो कई सवाल उठ खड़े हुए। अब इसे सिंधिया की अनदेखी कहा जाए या कांग्रेस की अंतर्कलह का नया स्वरुप। क्योंकि अपने समर्थकों के बल पर ही अपनी ताकत का अब तक सिंधिया मध्यप्रदेश में एहसास करवाते थे।

मध्यप्रदेश में हर दिन सियासत की नई कहानी लिखी जाती है। राजनेता बिना सोचे समझे अपने मन की बात में कुछ ऐसा कह जाते हैं जिस पर सियासी बवाल खड़ा हो जाता है। तमाशा तो ये चल रहा है कि अगर बीजेपी और कांग्रेस में कोई युद्ध न चल रहा हो तो कांग्रेस के मंत्री ही कोई जुबानी तीर छोड़कर मुद्दा खड़ा कर देते हैं। ताजा मामला गुना का है। जहां पर एमपी के श्रम मंत्री महेन्द्र सिसौदिया एक सभा में भाषण दे रहे थे।

इस दौरान वो रौ में कुछ इस कदर बह गए कि भविष्यवाणी कर बैठे और अपने मन की बात जनता के सामने लाकर बोले कि मेरा मन कहता है कि 10-15 साल बाद तुलसी सिलावट मुख्यमंत्री बनेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने तो गुना कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार के लिए भी टिप्पणी कर दी...और कहा कि ये मुख्य सचिव बनेंगे।

तो सुना आपने...बिन बादल बरसात करना कोई मंत्रीजी से सीखे। हालांकि इस बात को कहते-कहते श्रम मंत्री के चेहरे पर भी रहस्यमयी मुस्कान आ गई लेकिन राजनीति में भले ही आपका मन कितना ही पाक साफ क्यों न हो। यहां हर बात और हर इशारे के मतलब निकाल लिये जाते हैं तो इस बयान के बाद कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

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मन की बात पर बवाल
मंत्री सिसौदिया ने आखिर तुलसी सिलावट का ही नाम क्यों लिया ?
दोनों ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी मंत्री हैं तो फिर सिंधिया का नाम क्यों नहीं ?
मंत्री सिसौदिया 10 साल बाद सिंधिया को किस भूमिका में देखना चाहते हैं ?
दस साल बाद सिसौदिया खुद के लिए क्या सोचते हैं ?
क्या गुरु को पीछे छोड़ने की चल रही है कवायद ?
कलेक्टर को सीएस बनाने की बात कहना क्या मंत्री के लिए उचित है ?
आखिर इस तरह के बयान से कार्यकर्ताओं में क्या संदेश जाएगा ?
क्या ये बयानबाजी कांग्रेस में नई तरह की गुटबाजी है ?
इस बयान से क्या महाराज नाराज नहीं होंगे ?

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खैर, बयान ही ऐसा है कि भला इस पर बीजेपी चुटकी लेने से कैसे पीछे रहती। फिलहाल तो सबकी नजर सिंधिया के रिएक्शन पर होगी। क्योंकि एक तरफ सिंधिया को प्रदेश में कोई जिम्मेदारी नहीं दी जा रही। उन्हें एक अदद राज्यसभा सीट के लिए भी हर दिन अपनी नाराजगी जाहिर करनी पड़ती है और दूसरी तरफ उसी खेमे के मंत्री दूसरे मंत्री को सीएम बनाने की कामना कर रहे हैंय़ तो क्या अब महाराज की मर्जी के बगैर मंत्री इतने बड़े ख्वाब देखने लगे हैं या फिर ये कांग्रेस की गुटबाजी और अंतर्कलह का नया स्वरुप है।

Muneshwar Kumar
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