सिंधिया समर्थक नेता के बागी तेवर: छलका दर्द, कहा- सेकंडलाइन की लीडरशिप ने धोखा दिया

उपचुनाव में सिंधिया समर्थक 6 नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। जबकि 13 नेता चुनाव जीते हैं।

By: Pawan Tiwari

Updated: 20 Nov 2020, 10:59 AM IST

भोपाल. विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद भाजपा में अब विरोध के शुरू दिखाई दे रहे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नेताओं ने भाजपा के कुछ नेताओं पर आरोप लगाया है। दरअसल, प्रशिक्षण पाठशाला में पहली बार सिंधिया समर्थक नेता शामिल हुए। यहां हारे हुए नेताओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने पार्टी में भितरघात का आरोप लगाते हुए प्रदेश संगठन के बड़ेनेताओं को परिणाम भुगतने तक की चेतावनी दे दी।

नाराज नेताओं ने कहा कि सेकंडलाइन की लीडरशिप ने धोखा दिया है। हमें हरवाकर भाजपा की पीठ में भी छुरा भोंका। यदि इन पर कार्रवाई नहीं हुई तो दुष्परिणाम आगे भी आएंगे। उपचुनाव के बाद प्रदेश भाजपा का यह पहला जमावड़ा गुस्सा, हार, सबक और निकाय चुनाव के लिए संगठनात्मक कामों की नसीहतों से घिरा रहा। दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की यह पहली पाठशाला थी। ग्वालियर पूर्व से चुनाव हारे मुन्नालाल गोयल ने कहा कि मुझे प्रशिक्षण की जरूरत नहीं। यह प्रशिक्षण तो कार्यकर्ताओं के स्तर पर देना चाहिए।

वहीं, रघुराज कंसाना प्रशिक्षण की बात पर मुस्कुरा कर चल दिए। मुरैना से हारे रघुराज कंसाना ने कहा, कार्यकर्ताओं ने काम किया, लेकिन सेकंडलाइन की लीडरशिप ने धोखा दिया है। दिमनी से हारे गिर्राज दंडोतिया ने कहा कि हमारा त्याग सफल रहा। सीएम शिवराज सिंह चौहान से मिलकर ही इस्तीफा दूंगा। हार का कारण पार्टी फोरम पर बात करके रखूंगा। पद की लालसा नहीं है, भाजपा का आदेश मानूंगा।

राकेश मावई से हारे हैं रघुराज कंसाना
28 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में मुरैना सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के राकेश मावई को 53301 यानी 35.67% वोट मिले, जबकि बीजेपी के रघुराज कंसाना को 47550 यानी 31.82% वोट मिले थे। मुरैना सीट पर शुरुआती रुझानों में बसपा सबसे आगे चल रही थी, भाजपा दूसरी और कांग्रेस तीसरे नंबर पर चल रही। लेकिन अंतिम समय में पासा पलटा और कांग्रेस ने बड़े मार्जेन से जीत हासिल की।

सिंधिया समर्थक हैं रघुराज कंसाना
रघुराज सिंह कंसाना राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। 2018 में कांग्रेस की टिकट पर वे चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन बाद में सिंधिया की बगावत के साथ वे बीजेपी में शामिल हो गए और उपचुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

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