scriptkaliasot river inspection | कैसे बचे कलियासोत नदी, किनारे पर कब्जों के साथ अब बनी डेयरियां, सबका कचरा जा रहा नदी में | Patrika News

कैसे बचे कलियासोत नदी, किनारे पर कब्जों के साथ अब बनी डेयरियां, सबका कचरा जा रहा नदी में

- याचिकाकर्ता डॉ सुभाष सी पांडे के साथ एमपीपीसीबी की टीम के निरीक्षण में सामने आई हकीकत

भोपाल

Published: August 04, 2021 12:01:36 am

भोपाल.शहर की एकमात्र कलियासोत नदी के किनारे अभी तक कोई एसटीपी नहीं बन पाया है। नदी पर अतिक्रमण कर मकान बना लिए गए हैं। यही नहीं अब तो वहां पर डेयरियां भी संचालित की जा रही हैं। दामखेड़ा की झुग्गी बस्ती और रहवासी कॉलोनियों सहित इसके किनारे बने शैक्षणिक संस्थानों का पूरा सीवेज और नगरीय ठोस अपशिष्ट नदी में ही जा रहा है। इसके साथ बाघ भ्रमण क्षेत्र वाले जंगल में भी कचरा फेंका जा रहा है। पत्रिका द्वारा यह मुद्दा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एनजीटी में इस मामले के याचिकाकर्ता डॉ सुभाष सी पांडे के साथ कलियासोत नदी के किनारे का निरीक्षण किया। इस दौरान यह हकीकत सामने आई है। यह रिपोर्ट एनजीटी को भी सौंपी जाएगी।
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पत्रिका ने 26 जुलाई को भोपाल में लापरवाही से बेतवा प्रदूषित, जिससे गंगा में पहुंच रही गंदगी शीर्षक से कलियासोत में प्रदूषण फैलाने का मामला प्रमुखता से प्रकाशित किया था। एनजीटी ने भी कलियासोत नदी का संरक्षण गंगा बेसिन की तर्ज पर करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद मंगलवार को पीसीबी के डायरेक्टर डायरेक्टर विजय अहिरवार, क्षेत्रीय अधिकारी बृजेश शर्मा सहित चार अधिकारी, याचिकाकर्ता डॉ सुभाष सी पांडे को लेकर निरीक्षण के लिए गए। इसका मुख्य उद्देश्य नदी में सीवेज मिलने की वास्तविकता का पता लगाना था।
टीम ने केरवा रोड के पास से नदी किनारे निरीक्षण शुरू किया। इस दौरान पाया गया कि नदी के ग्रीन बेल्ट पर कुछ जगह पक्की सड़क बनाकर ग्रीन बेल्ट को नष्ट कर दिया गया है। नदी के किनारे कई बड़े अपार्टमेंट और शैक्षणिक संस्थान बने हुए हैं। लेकिन यहां पर कोई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट या ईटीपी नहीं बनाया गया है। इससे इनका अनुपचारित सीवेज सीधे नदी में डाला जा रहा है। मंगलवार को सिर्फ कलियासोत नदी के एक तरफ के किनारे का ही निरीक्षण किया जा सका बुधवार को दूसरी तरफ से भी निरीक्षण जारी रहेगा।
निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा खराब स्थिति दामखेड़ा में मिली। यहां नदी के ग्रीनबेल्ट में ही बड़ी संख्या में झुग्गियां बन गई हैं और बड़े अपार्टमेंट भी बने हुए हैं। कई मकान अतिक्रमण कर भी बनाए गए हैं। इन सबका अनुपचारित सीवेज सीधे कलियासोत नदी में मिलाया जा रहा है। यहां पर एक भी एसटीपी नहीं बनाया गया है। यह वाटर एक्ट 1974 एवं नगरीय ठोस अपशिष्ट नियम 2016 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। कलियासोत नदी को पाट कर उस पर कई डेयरियां भी संचालित की जा रही हैं। यहां दर्जनों गाय और भैंस पाली गई हैं। उनका भी अपशिष्ट सीधा नदी में जा रहा है। जबकि डेयरियों के लिए भी अलग से एसटीपी, ईटीपी बनाने के नियम हैं।
एनजीटी ने 6 साल पहले दिया था यह आदेश

- वर्ष 2014 में एनजीटी ने आदेश दिया था कि कलियासोत नदी के किनारे पर दोनों ओर 33 मीटर दायरे की पहचान और सीमांकन किया जाए। वहां पर चिन्ह भी लगाए जाएं। इसमें किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं किया जाए
- इस 33 मीटर के दायरे में ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाए।

- कलियासोत नदी का पानी प्रदूषित है इसलिए इसमें केवल ट्रीटेड पानी ही आए यह सुनिश्चित किया जाए।

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