कमलनाथ सरकार का बड़ा फैसला : बेशकीमती जमीन लौटाएगी सरकार

- रियल एस्टेट को बूस्टअप डोज : 66 प्रोजेक्ट की जमीन लौटाने का फैसला, नियमों में चालीस साल बाद किया बदलाव

भोपाल। कमलनाथ सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्टअप देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने हाउसिंग बोर्ड और विकास प्राधिकरणों के पुराने प्रोजेक्टों में काम न होने पर किसानों व अन्य लोगों को जमीन लौटाने का फैसला किया है।

इसके तहत 66 प्रोजेक्ट-स्कीम की करोड़ों की बेशकीमती जमीनें लौटाई जाएगी। इसमें ऐसी जमीन शामिल होंगी, जिनमें प्रोजेक्ट का काम दस फीसदी या उससे कम हुआ है। इसके अलावा हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए अब जमीन अधिग्रहण पर जमीन मालिक को अब 50 फीसदी जमीन या कैश भुगतान दिया जाएगा। अभी तक यह केवल बीस फीसदी होता था।

जनसम्पर्क मंत्री पीसी शर्मा और नगरीय प्रशासन मंत्री जयवद्र्धन सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कैबिनेट बैठक में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट 1973 में संशोधन मंजूर कर दिया गया है। चालीस साल बाद यह संशोधन किया गया है। इसके तहत उन जमीनों को लौटाना तय किया गया है, जहां काम नहीं हो पा रहा है। इनमें विवादों वाली जमीनें भी शामिल रहेंंगी।

अभी हाउसिंग व विकास प्राधिकरणों के कुल 84 प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें से 66 प्रोजेक्ट की जमीन लौटाई जाएगी। इनमें जहां एक प्रतिशत भी काम नहीं हुआ है, वहां जमीन तुरंत लौटाई जाएगी। इसके अलावा जहां एक से दस प्रतिशत तक काम हुआ है, वहां संबंधित जमीन मालिक को निर्माण व विकास काम के लिए एक न्यूनत राशि देना होगी, उसके बाद जमीन उसे लौटा दी जाएगी।

नए नियमों से ऐसा होगा-

- अब हाउसिंग व विकास प्राधिकरण का कोई भी नया प्रोजेक्ट घोषित होते ही उस प्रोजेक्ट की जमीन पर निर्माण की मंजूरी संबंधित जमीन मालिक को रहेगी। अभी प्रोजेक्ट पूरा होने पर ही निर्माण की मंजूरी मिल पाती थी।

- जो भी मास्टर प्लान अब घोषित होंगे, उनमें भविष्य के प्रोजेक्ट भी साथ में घोषित होंगे। इसमें प्रस्तावित रोड भी घोषित होगी। अलग से कोई भी स्कीम या प्रोजेक्ट नहीं आ सकेंगे।
- विकास प्रोजेक्ट में टाइमलाइन रहेगी। आवेदन के पंद्रह दिन के भीतर अॅथारिटी को प्रस्ताव आगे बढ़ाना होगा। राज्य शासन भी सामान्यत तीन और अधिकतम छह महीने ही स्कीम रोक सकेगा। फिर स्कीम-प्रोजेक्ट प्रस्ताव खत्म माना जाएगा।

- किसी भी स्कीम-प्रोजेक्ट में छोटे प्लाट-धारक चाहेंगे, तो संयुक्त रूप से मिलकर बड़े प्लाट को भी हासिल कर पाएंगे। शासन इसकी मंजूरी देगा। इससे छोटे प्लाट वाले मिलकर बड़े कॉम्पलेक्स या अन्य प्रोजेक्ट भी ला सकेंगे।
- यदि नए प्रोजेक्ट-स्कीम आती है और उस क्षेत्र में पहले से किसी का निर्माण है, तो उसे बेटरमेंट शुल्क देना होगा। स्कीम-प्रोजेक्ट से कनेक्टिंग निर्माण कार्य है, तो भी बेटरमेंट टैक्स लगेगा।

- यदि कोई प्रोजेक्ट-स्कीम में किसी की जमीन पर ग्राउंड-पार्क या ऐसा कुछ आता है जिससे जमीन की वेल्यू कम हो जाती है, तो उसे 50 प्रतिशत जमीन या कैश राशि दी जाएगी। छोटे की बजाए बड़े प्लाट की ही मंजूरी दी जाएगी।
- स्कीम व प्रोजेक्ट में मुख्य सड़क पर यदि कोई प्लाट चाहता है, तो उसे एक निर्धारित शुल्क देना होगा या फिर उसे 50 प्रतिशत से कम प्रतिशत की जमीन मिलेगी। यह प्रोजेक्ट के हिसाब से तय होगा।


कोर्ट के लिए नए नियम-

नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने बताया कि नए नियमों के तहत हाउसिंग और विकास प्राधिकरण के प्रोजेक्ट और इन जमीनों को वापस लौटाने में कोई भी सिविल कोर्ट दखल नहीं दे पाएगी। केवल हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में ही इन फैसलों के खिलाफ अपील हो सकेगी। इससे निर्माण काम नहीं रूकेंगे।

अब प्रोजेक्ट में जमीन ऐसे दी जाएगी -

20 फीसदी प्रोजेक्ट सड़क के लिए

05 फीसदी पार्क व प्ले-ग्राउंड के लिए
05 फीसदी अन्य सोशल स्ट्रक्चर जैसे अस्पताल

20 फीसदी अॅथारिटी के लिए। रेसीडेंशियल-कमर्शियल
50 फीसदी प्लाटॅ्स डेवलपमेंट के लिए


कहां कितने प्रोजेक्ट में जमीन लौटाएंगे-

भोपाल- 14
इंदौर- 19

ग्वालियर- 12
जबलपुर- 16

उज्जैन- 06
देवास- 12

साड़ा-ग्वालियर- 07


ये होगा फायदा-

- बरसों से विवादों में पड़ी जमीन अब छूट जाएगी

- किसानों को बेशकीमती जमीन वापस मिलेगी
- सरकार को राजस्व बढ़ेगा। रजिस्ट्री बढ़ेगी।

- बेकार पड़ी जमीनों पर निर्माण काम हो सकेंगे।
- सरकारी प्रोजेक्ट की टाइमलाइन होने से निर्माण तेज होंगे।

- प्राइम लोकेशन पर अटके निर्माण फिर शुरू हो जाएंगे
- रियल एस्टेट सेक्टर में बूम आएगा। निर्माण में तेजी आएगी।

 

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जीतेन्द्र चौरसिया
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