छह माह में कितना कर्ज ले लिया कमलनाथ सरकार ने, पढ़ें पूरी खबर

बेकाबू : आर्थिक आपातकाल के हालात बरकरार
अब तक 8600 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी सरकार

By: anil chaudhary

Published: 07 Jun 2019, 05:19 AM IST

भोपाल. विधानसभा चुनाव की दस्तक के वक्त प्रदेश में आर्थिक आपातकाल के जो हालात बने वे खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। 38 हजार करोड़ की किसान कर्जमाफी के बोझ तले दबी कमलनाथ सरकार शुरुआती छह महीनों में 8600 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। यह पिछली भाजपा की शिवराज सरकार के शुरुआती छह महीनों के मुकाबले दोगुना से भी ज्यादा है। 2013-14 में शिवराज सरकार बनने पर पहले छह महीने में महज 3350 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। इतना जरूर है कि 2013 वर्सेस 2018 के हालात जुदा हंै। सत्ता परिवर्तन का बोझ कमलनाथ सरकार पर अधिक है। सरकारी खजाने की हालात ज्यादा खस्ता है। कांग्रेस सरकार के जिम्मे कर्ज को कम करने की चुनौती है, लेकिन जनवरी से अब तक ऐसा कोई सा महीना नहीं गया है, जब कमलनाथ सरकार ने कर्ज नहीं लिया हो।
- 2003 बनाम 2018
2003 में कांग्रेस सरकार की सरकार हटी, तब 31 मार्च 2003 की स्थिति में प्रदेश पर 20147 करोड़ का कर्ज था। भाजपा ने सत्ता संभाली तो कर्ज कई गुना बढ़ गया। 15 साल बाद 2018 में सरकारी रेकॉर्ड के मुताबिक प्रदेश पर 1.35 लाख करोड़ का कर्ज है, लेकिन कैग की रिपोर्ट के मुताबिक यह कर्ज 1.87 लाख करोड़ से ज्यादा का है।
- चुनावों ने बिगाड़े हालात
सरकारी खजाने के हालात चुनावों के कारण बिगड़ गए हैं। पहले विधानसभा चुनाव थे तो उसका बोझ खजाने पर आया। तत्कालीन भाजपा सरकार ने सरकारी खजाने से चुनावी खर्च किए। सितंबर 2018 में कुछ जिला पंचायतों में वेतन बांटने के लाले पड़ गए थे, तब आकस्मिक निधि से वेतन दिया गया। कांग्रेस सरकार आई तो खस्ताहाल खजाने पर कर्जमाफी व वचनों के बोझ के साथ लोकसभा चुनाव की दस्तक ने स्थिति बिगाड़ दी। किसान कर्जमाफी के लिए 5000 करोड़ का प्रावधान किया गया। दूसरे वचन पूरे करने में भी राशि खर्च हुई।
- अब ये आर्थिक चुनौतियां सामने
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 38 हजार करोड़ की किसान कर्जमाफी है। इसके बाद बिजली, पानी व सड़कों के हालात संभालना है। 3000 किमी से ज्यादा सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट भारी-भरकम खर्च वाला है। साथ ही चुनाव के वक्त के वचनों को पूरा करना भी बहुत बड़ी चुनौती है।

- कमलनाथ ने लिखी थी चि_ी
कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद 23 जनवरी 2018 को तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान को चि_ी लिखकर कर्ज पर श्वेत-पत्र जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कर्ज का पूरा हिसाब मांगा था।
- पिछली सरकार ने चुनाव पूर्व ताबड़तोड़ लिया कर्ज
पिछली शिवराज सरकार ने अपने दोनों कार्यकालों में आखिरी सालों में बेतहाशा कर्ज लिया। 2017-18 में ही शिवराज सरकार ने 18 हजार करोड़ से ज्यादा का कर्ज लिया था, जिसमें से ज्यादातर कर्ज अप्रेल से सितंबर 2018 के बीच लिया गया था। नवंबर 2018 में चुनाव होना थे। तत्कालीन वित्त एसीएस एपी श्रीवास्तव ने तय लिमिट से ज्यादा कर्ज पहले लेने से इनकार भी कर दिया था। कर्ज की लिमिट को लेकर भी पिछली सरकार विधानसभा में कई बार घिरी थी। तब सदन में पिछली सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री जयंत मलैया ने कर्ज को विकास के लिए जरूरी बताया था।
- जोड़-तोड़ का बजट, माथापच्ची बढ़ी
जुलाई में होने वाले विधानसभा सत्र में सरकार मुख्य बजट लाएगी। वित्त मंत्री तरुण भनोत ने विभागों की बजट मांगों का रिव्यू शुरू कर दिया है। विभागों में बिना योजना बंद किए कटौती करना है, लेकिन खर्च बढ़ते जा रहे हैं। 2018-19 का बजट 2.04 लाख करोड़ का है, लेकिन अब 2019-20 के बजट में ज्यादा बढ़ोतरी की गुंजाइश नहीं है। औसत 10 फीसदी तक ही बढ़ोतरी संभावित है। इस पर खींचतान चल रही है।

कमलनाथ सरकार ने 2019 में लिया कर्ज
- 1000 करोड़ - 11 जनवरी
- 1000 करोड़ - 01 फरवरी
- 1000 करोड़ - 08 फरवरी
- 1000 करोड़ - 22 फरवरी
- 1000 करोड़ - 28 फरवरी
- 1000 करोड़- 08 मार्च
- 600 करोड़- 25 मार्च
- 500 करोड़- 05 अप्रेल
- 500 करोड़- 30 अप्रेल
- 1000 करोड़- 03 मई
(कर्ज रुपए में)

शिवराज सरकार का 2014 में शुरुआती छह महीनों का कर्ज
- 1000 करोड़- 10 जनवरी
- 1000 करोड़- 24 जनवरी
- 1000 करोड़- 22 मई
- 350 करोड़- 20 जून
(कर्ज रुपए में)


पिछली भाजपा सरकार हमें खस्ताहाल सरकारी खजाना देकर गई है, लेकिन हम लगातार स्थिति को संभाल रहे हैं। भाजपा ने कर्ज लिया और उसे विकास पर खर्च नहीं किया। आय के साधन नहीं बढ़ाए। हम जो कर्ज ले रहे हैं, उससे आय के साधन बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं।
- तरुण भनोत, मंत्री, वित्त विभाग

 

anil chaudhary Desk
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