सिंधिया को कमलनाथ का जवाब, बोले- वचन-पत्र पांच साल का है, पांच महीने का नहीं...

- सिंधिया के सड़कों पर उतरने के बयान पर बवाल :

- सिंधिया फिर बोले- जमीन पर खड़ा हूं, इसका अहसास है

- दो मंत्रियों ने दी सलाह, कहा सड़कों पर न उतरे

 

भोपाल@जितेंद्र चौरसिया की रिपोर्ट...

कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस के वचन-पत्र का पालन न होने पर सड़क पर उतरने के बयान पर सियासत गर्मा गई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शुक्रवार को सिंधिया को इस पर जवाब दिया है।

मलनाथ ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत में इस मुद्दे पर सवाल के जवाब में कहा कि हमारा वचन-पत्र पांच साल का है, पांच महीने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अपने सारे वचन निभाएगी। वहीं सहकारिता मंत्री डा. गोविंद सिंह ने भी सिंधिया को नसीहत दी है।

सिंह ने कहा कि सिंधिया को सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं है। सिंधिया पार्टी फोरम पर और मुख्यमंत्री से मिलकर चर्चा के बाद कोई कदम उठाए। अतिथि विद्वान टेम्प्रेरी हैं, उनको स्थाई नियुक्ति नहीं दी गई थी। उन्हें नियमित तब किया जाएगा, जब वे पहले नियमों का पालन करेंगे।

इमरती बोली- सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं...

दूसरी ओर इस मुद्दे पर उनके खेमे की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया बड़े और संघर्षशील नेता है, उनकी भावनाओं को समझना चाहिए। वचन पत्र में किए गए वादों को पूरा कराने के लिए उन्हें सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं है। हम लोग भी नहीं चाहते कि वे सड़कों पर उतरें। वचन पत्र के वादे पूरे होंगे।


ये कहा था सिंधिया ने-

सिंधिया ने बीते गुरुवार को एक सभा में अतिथि विद्वानों के लिए कहा था कि हमाी सरकार वचन-पत्र के हर वचन-पत्र को पूरा करेगी। आपकी मांग कांग्रेस के वचन-पत्र में है और वह हमारा ग्रंथ है। आप लोग खुद का अकेला मत समझना, वचन पूरा नहीं हुआ तो आपके साथ सिंधिया भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगा। सिंधिया के इसी बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है।

सिंधिया का दर्द फिर छलका, बोले- जमीन पर खड़ा हूं...

सिंधिया ने शुक्रवार को अशोकनगर में फिर हार की पीड़ा जाहिर की। सिंधिया ने कहा कि जनता ही आम आदमी को नेता बनाती है और जनता ही उस आम आदमी को सड़क पर खड़ा कर देती है। आज मैं जमीन पर खड़ा हूं, इसका अहसास है मुझे। लेकिन, मेरी चाहत है कि इस जमीन पर मैं टिका रहूं और आपके दिल में भी टिका रहूं।

सिंधिया लोकसभा में करारी हार के बाद दूसरी बार शुक्रवार को अशोकनगर पहुंचे थे। उनके साथ पांच मंत्री प्रद्युत्न सिंह तोमर, गोविंद सिंह राजपूत, तुलसी सिलावट, महेंद्र सिंह सिसौदिया व प्रभुराम चौधरी भी थे। यहां सिंधिया ने कहा कि मैं अब प्रत्यक्ष राजनीति में शायद नहीं हूं, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से आपका जनसेवक हूं।

संसद में भले ही न हूं, लेकिन आप पर कोई संकट आए, तो कोई रहे न रहे, पर सिंधिया आपके साथ खड़ा है। स्थानीय अंडरब्रिज को लेकर कहा कि इसके शिलान्यास पर मेरा नाम नहीं है, लेकिन एक-एक ईंट पर मेरा प्यार लिखा है। चुनावी हार की पीड़ा जताते हुए सिंधिया ने कहा कि चुनाव में कभी-कभी हम लोग अति-आत्मविश्वास में रह जाते हैं। सोचते हैं कि एक वोट से क्या फर्क पड़ता है। इसलिए कभी-भी अति-आत्म विश्वास में मत रहना।

इधर, लक्ष्मण की पार्टी को सलाह-
दूसरी ओर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के छोटे भाई लक्ष्मण सिंह ने ट्वीट करके अपनी ही पार्टी को नसीहत दी है। लक्ष्मण ने कहा है कि दिल्ली की हार से पार्टी को सबक सीखना चाहिए। उन्होंने लिखा कि दिल्ली की हार कांग्रेस के लिए कार्यप्रणाली सुधारने का अवसर है। कांग्रेस पार्टी अप्रासंगिक हो जाएगी? ऐसा मैं नहीं मानता। आप-पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में जनाधार बढ़ाना बहुत कठिन होगा। लोक सभा में कांग्रेस 100 सीट लाएगी और सरकार बनाएगी।

शिवराज बोले- कांग्रेस करे आत्मचिंतन-
सिंधिया की नाराजगी पर भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस को अब आत्मचिंतन कर ही लेना चाहिए। इन्हें सोचना पड़ेगा कि आखिर क्यों इनके अपने ही इनके सामने तलवारें खींचने लगे हैं। वादों से नहीं परिणाम देने से सरकार चलती है। कांग्रेस ने जो वचन दिया है उसे पूरा करने की उनकी नीयत नहीं है।

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दीपेश तिवारी
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