सॉफ्ट हिंदुत्व से लोकसभा साधने की तैयारी, पुजारियों को बड़ा तोहफा देगी सरकार

सॉफ्ट हिंदुत्व से लोकसभा साधने की तैयारी, पुजारियों को बड़ा तोहफा देगी सरकार

By: Faiz

Published: 19 Jan 2019, 07:30 PM IST

भोपालः लोकसभा चुनाव से पहले हर वर्ग-तबके को साधने का लक्ष्य लेकर चलने वाली मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार अब प्रदेश में स्थित मंदिरों के पुजारियों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में जुट गई है। सेकुलर पार्टी से सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चली कांग्रेस जल्द ही प्रदेश के पुजारियों का भत्ता राशि बढ़ाने जा रही है।इसके लिए तैयारियां शुर कर दी गई हैं। यही नहीं सरकार, प्रदेश में धार्मिक स्थलों का निर्माण एवं उनका संरक्षण करने की भी तैयारी में है। जानकारों की माने तो कांग्रेस लोकसभा चुनाव से पहले जनता में इस बात का संदेश देना चाहती है कि वह धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि धार्मिक है। इसलिए पार्टी सॉफ्ट हिंदुत्व के एजेंडे को अपनाते हुए प्रदेश के संत और पुजारियों को खुश करने की रणनीति पर काम कर रही है।

जानकारों का अनुमान

अपने वचन पत्र में भी कांग्रेस ने 12 बिंदुओं का वादा किया है। सरकार बनने के बाद सीएम कमलनाथ ने इस तरह का ये पहला कदम उठाया है। सरकार बनते ही सबसे पहले कमलनाथ ने प्रदेश में एक नए विभाग का गठन किया, जो प्रदेश में राम वन गमन पथ समेत अन्य धार्मिक वादों को हकीकीत में बदलने का काम करेगा। सूत्रों की माने तो, अब राज्य सरकार पुजारियों और सेवादारों का भत्ता बढ़ाने वाली है। इसकी फाइल मंत्री पीसी शर्मा के दफ्तर में पहुंच चुकी है। पार्टी के सूत्रों ने भी यही बताया कि, सरकार वचन पत्र के माध्यम से की गई लगभग हर बड़ी घोषणा को पूरा करने की रणनीति पर काम कर रही है। कई चीजों को लेकर लोकसभा चुनाव से पहले का टारगेट भी सेट किया गया है, ताकि, आगामी चुनाव में इसका लाभ मिल सके और जनता के बीच बना असमंजस भी दूर हो सके। इसलिए पार्टी उन मामलों पर ज्यादा फौकस कर रही है, जिनका रिश्ता सीधे जनता से जुड़ा हो, यानि वोट बैंक को प्रभावित किया जा सके।

इन धार्मिक मुद्दों पर सरकार की नज़र

सूत्रों के मुताबिक नर्मदा न्यास, ताप्ती, मंदाकिनी और क्षिप्रा नदी के न्यास का गठन, मध्यभारत गंगाजली निधि न्यास, पवित्र नदियों को जीवित इकाई बनाने के संबंध में कार्यवाही, राम वनगमन पथ का प्रस्ताव भी तैयार किया जा चुका है। इसका प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है। पथ का कार्य सांस्कृतिक विभाग द्वारा धारण किया गया है और इसे नए आध्यात्मिक विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है। जबकि यह दावा किया जाता है कि प्रस्ताव अंतिम चरण में है और वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बाद इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

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