मुख्यमंत्री ने 24 घंटे में निकाला उद्योग लगाने में दो साल से आ रही मुश्किलों का समाधान

- एनआरआई परिवार ने मुख्यमंत्री को किया था ईमेल
- ईमेल में फैक्टरी लगाने में आ रही दिक्कतों का जिक्र
- पीथमपुर में दो साल से चल रहा है फैक्टरी निर्माण का काम
- हांगकांग की फार्मास्युटिकल कंपनी लगा रही है फैक्टरी
- 18 अक्टूबर को इंदौर में मैग्रीफिसेंट एमपी

 

भोपाल : मध्यप्रदेश में दो साल से उद्योग लगाने के लिए परेशान हो रहे हांगकांग के एनआरआई परिवार की मुश्किलों का समाधान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 24 घंटे में कर दिया। पीथमपुर में फैक्टरी लगाने वाली बालाजी फार्मास्युटिकल कंपनी की डायरेक्टर जैस्मिन अलदसानी ने मुख्यमंत्री को ईमेल कर अपनी समस्याओं की जानकारी दी। जैस्मिन ने लिखा कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सरकारी विभागों के साथ मिलकर उनकी फैक्टरी के निर्माण में रुकावटें पैदा कर दी हैं।

यहां तक कि उनको गुंडों और पुलिस के जरिए भी धमकाया गया। अब वे उद्योग लगाने की जगह पुलिस और वकीलों के चक्कर काट रही हैं। इस ईमेल के मिलते ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 24 घंटे में उनकी सारी समस्याओं का समाधान हो जाना चाहिए। मुश्किलों का हल करने के बाद सीएम ने उनसे मुलाकात की और रुकावटों को दूर करने के बारे में जानकारी दी। सीएम से मिलने बाद जैस्मिन संतुष्ट नजर आईं। इस समय ये मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि प्रदेश में 18 अक्टूबर को इन्वेस्टर मीट मैग्रीफिसेंट एमपी होने जा रही है।

ये है मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी :

सम्मानीय मुख्यमंत्री जी,
हम बालाजी स्टेयरॉइड्स एंड होर्मोंस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। ये फार्मास्युटिकल कंपनी है। हमारी फैक्टरी पीथमपुर में है। ये दो साल से बन रही है और जल्द ही इसका निर्माण पूरा होने वाला है। मैने अपने भाई के साथ मिलकर ये कंपनी शुरु की है। मैं 26 साल की हूं और मेरा भाई 24 साल का है। हमने ये फैक्टरी मेक इन इंडिया और यंग इंडिया प्रोग्राम के तहत शुरु की है। हांगकांड में हमारी इकलौती भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनी है जिसके पास लाइसेंस है। हांगकांग में कड़े कानूनों के कारण लाइसेंस पाना नामुमकिन जैसा है।

 

हमने यहां पर बैंक और सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय के साथ काम शुरु किया। पर्यावरण और एकेवीएन के अधिकारियों ने कई बार हमारी साइट पर दौरा कर निरीक्षण किया और वे निर्माण और सुविधाओं से संतुष्ट नजर आए। उन्होंने तो यहां तक कहा कि हाल के वर्षों में उन्होंने जितने भी निर्माण कार्य देखे हैं उनमें हमारी फैक्टरी सबसे अच्छी है। फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में हमारी कंपनी का बड़ा नाम है। भारत में हम पहली बार काम शुरु कर रहे हैं।

 

पिछले एक साल से हम यहां की स्थानीय कंपनियों,विक्रेताओं और सरकारी विभागों के रवैये से परेशान हैं और कई दिक्कतों का सामना कर रहे हैं जबकि एकेवीएन और एमपीएफडी ने हमारा बहुत साथ दिया। हमारी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने भी 2017 से ये कोशिश शुरु कर दी कि हम मध्यप्रदेश छोड़कर चले जाएं। उन्होंने हमारे स्टाफ को परेशान किया,धमकियां दी और स्थानीय प्रशासन को हमारे बारे में गलत जानकारियां दीं। हम यहां के नहीं हैं और देश के बाहर से आए हैं इसलिए उन्होंने विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर लाइसेंस लेने में कठिनाई पैदा कर दी।

 

उन सरकारी विभागों ने प्रतिस्पर्धी कंपनियों के दबाव में हमारे सामने कई रुकावटें पैदा कीं। उनका रवैया बेहद मुश्किल पैदा करने वाला रहा। कुछ निजी कंपनियों ने हमें परेशान करने के लिए गुंडों और पुलिस का सहारा भी लिया। उन्होंने हमारे खिलाफ फर्जी सबूतों के आधार पर आपराधिक शिकायतें भी की। पुलिस को उन्होंने बताया कि इसके लिए वे हमको पैसा दे चुके हैं। जो समय हमें अपने व्यवसाय के लिए देना था वो समय हमारा वकील और पुलिस के पास जाने में बर्बाद हो गया।


हम जानते हंै कि आप मध्यप्रदेश को बहुत आगे ले जाना चाहते हैं। हम आपकी कार्यशैली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री के रुप में देख चुके हैं। आप भारतीय राजनीति के बहुत डायनामिक लीडर हैं। आपके काम करने के तरीके से हम बहुत प्रभावित हैं। कारोबार में स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। हांगकांड और चीन में लोग हमसे पूछते हैं कि क्या मध्यप्रदेश निवेश के लिए अच्छा है लेकिन वे हमारे हाल ही के अनुभवों से डरते हैं।

 

हम जानते हैं कि हम भारतीय हैं इसलिए आप हमारा सहयोग करेंगे, हमने हमेशा मध्यप्रदेश की तारीफ की है। हमें आपसे बहुत उम्मीदें हैं इसलिए ये सारी बातें आपसे कह रहे हैं। हम पिछले एक साल से बहुत दुखी हैं। फार्मास्युटिकल कंपनी के लिए नर्मदा का पानी बहुत अच्छा है इसलिए हम यहां आए। हम सौ लोगों को प्रत्यक्ष तौर पर और सौ से ज्यादा लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मुहैया कराएंगे। हमें उम्मीद है कि आप हमारी परेशानियों को समझेंगे और उन्हें दूर करेंगेे, हम आपसे थोड़ा सा समय चाहते हैं जिससे आपको मुश्किलों के बारे में बता सकें।

Arun Tiwari
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